चीन में आज से राष्ट्रपति चुनने की प्रक्रिया शुरू, जानिए 20वें कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस अधिवेशन में क्या होगा
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना साल 1921 में हुई थी और पार्टी की स्थापना के 101 साल बाद इस साल की 20वीं कांग्रेस की बैठक का काफी ज्यादा महत्व है, क्योंकि इसमें पार्टी के शीर्ष नेतृत्व का चुनाव किया जाएगा।
China's 20th Communist Party Congress: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी अपने राजनीति कैलेंडर पर सबसे महत्वपूर्ण कार्यक्रम का आयोजन कर रही है और आज से चीन कम्युनिस्ट पार्टी के देश भर में फैले करीब 2300 प्रतिनिधि, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के शीर्ष नेतृत्व को नियुक्त करने, इसके संविधान में संशोधन करने और अगले पांच सालों के लिए देश के नीति निर्देशों को मंजूरी देने के लिए बीजिंग के ग्रेट हॉल ऑफ द पीपल में एक सप्ताह तक चलने वाले कांग्रेस के लिए एकत्रित होंगे। इस बैठक के दौरान देश के अगले राष्ट्रपति का चुनाव किया जाएगा और शी जिनपिंग का तीसरी बार चीन का राष्ट्रपति बनना तय माना जा रहा है। ऐसे में आईये जानते हैं, कि आखिर चीन कन्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस की बैठक में क्या-क्या होने वाला है।
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कम्युनिस्ट पार्टी का 20वां अधिवेशन
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की स्थापना साल 1921 में हुई थी और पार्टी की स्थापना के 101 साल बाद इस साल की 20वीं कांग्रेस की बैठक का काफी ज्यादा महत्व है, क्योंकि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को पार्टी के नेता के रूप में एक अभूतपूर्व तीसरा कार्यकाल हासिल करने और संगठन के शीर्ष निर्णय लेने के लिए निकायों, पोलित ब्यूरो और एलिट पोलित ब्यूरो स्टैंडिंग कमेटी (पीएससी) में नियुक्तियों सहित अपनी शक्ति को और मजबूत करने की उम्मीद है।

यह कांग्रेस क्यों महत्वपूर्ण है?
चूंकि चीन कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा शासित एकदलीय राज्य है, इसलिए पार्टी का महासचिव देश का सर्वोपरि नेता होता है। यदि यह एक विशिष्ट कांग्रेस होती, तो शी जिनपिंग, जिन्होंने पहली बार 2012 में राष्ट्रपति पद का पदभार संभाला था और दो बार पांच साल का अपना कार्यकाल पूरा कर चुके होते हैं, वो इस साल किसी नये व्यक्ति को देश की जिम्मेदारी सौंप रहे होते। लेकिन, 69 वर्षीय शी जिनपिंग ऐसा कुछ नहीं करने वाले हैं औ ना ही इस बार शी जिनपिंग अपने उत्तराधिकारी के नाम की ही घोषणा करेंगे। चीन के इससे पहले के दो राष्ट्रपति हू जिंताओ और जियांग जेमिन ने जो परंपरा कायम रखी थी, शी जिनपिंग उसे तोड़ने जा रहे हैं। इन दोनों राष्ट्रपतियों ने अपना दो कार्यकाल पूरा करने के बाद पार्टी संविधान के मुताबिक राष्ट्रपति की कुर्सी छोड़ दी थी।

शी जिनपिंग कितने शक्तिशाली हैं?
कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ चायना के महासचिव होने के साथ साथ शी जिनपिंग दो और शक्तिशाली पदों पर आसीन हैं। शी जिनपिंग, सीसीपी सेंट्र्ल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन होने के साथ साथ पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चायना के राष्ट्रपति भी हैं। सेंट्र्ल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन होने के नाते उनके हाथ में देश का पूरा सशस्त्र बल आ जाता है और राष्ट्रपति होने के नाते पूरे देश का नियंत्रण उनकी हाथों में होता है। अगले साल मार्च महीने में चीन की रबर स्टांप संसद नेशनल पीपुल्स कांग्रेस की सालाना बैठक के दौरान शी जिनपिंग को सेंट्र्ल मिलिट्री कमीशन के चेयरमैन पद पर बरकरार रखने की भी इजाजत देगा। संयुक्त राज्य अमेरिका स्थित सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड में चाइना पावर प्रोजेक्ट के साथी ब्रायन हार्ट ने कहा कि, "20वीं पार्टी कांग्रेस में हम उम्मीद कर सकते हैं कि शी जिनपिंग पार्टी, राज्य और सेना पर अपनी पकड़ और मजबूत करेंगे। उन्होंने कहा कि, इसके अलावा तीसरे कार्यकाल में जाने से पहले शी जिनपिंग अपनी पसंदीदा मंत्रियों की नियुक्ति करेंगे। अपने पहले के दो कार्यकाल में उन्होंने अपने सहयोगियों को महत्वपूर्ण पदों पर बिठाया है, जिससे बंद दरवाजों के पीछे होने वाली कर्मियों की नियुक्ति प्रक्रियाओं पर अधिक प्रभाव पड़ता है। इसके साथ ही अपने पूर्ववर्ती राष्ट्रपतियों की तरह उन्हें अपने उत्तराधिकारी से भी प्रतिस्पर्धा करने की जरूरत नहीं होगी।

पार्टी नेतृत्व कैसे चुना जाएगा?
कम्युनिस्ट पार्टी कांग्रेस लगभग 2,300 प्रतिनिधियों से बनी है, जो चीन के 34 प्रांतों और क्षेत्रों में पार्टी पदानुक्रम के सभी स्तरों का प्रतिनिधित्व करते हैं। ये प्रतिनिधि पार्टी के टॉप नेशनल लेवल इंस्टीट्यूशन और सेन्ट्रल कमेटी में करीब 400 सदस्यों को नियुक्त करेंगे। वोटिंग के बाद सेंन्ट्रल कमेटी के चुने गये 200 सदस्य 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो का चुनाव करेंगे और उससे भी महत्वपूर्ण 7 सदस्यीय पीएससी का चुनाव करेंगे। इस दौरन पर्यवेक्षक पीएससी में नियुक्तियों पर करीब से नजर रखेंगे। टोनी ब्लेयर इंस्टीट्यूट फॉर ग्लोबल चेंज के शोधकर्ताओं एडवर्ड नाइट और रूबी उस्मान ने हाल ही में एक ब्लॉग पोस्ट में लिखा है कि, "सैद्धांतिक रूप से सेंट्रल कमेटी के सैकड़ों सदस्य शीर्ष अधिकारियों का चुनाव करते हैं, लेकिन वास्तविकता काफी अलग होती है और चुने जाने वाले सदस्य पहले से ही पर्दे के पीछे संघर्ष कर चुके होते हैं और जब कांग्रेस की बैठक औपचारिक तौर पर शुरू होती है, उससे पहले ही पूरा लाइनअप तैयार हो चुका होता है। पोलित ब्यूरो के सदस्यों का चुनाव के लिए 68 साल की अधिकतम उम्र होती है और 2007, 2012 और 2017 में हुई कांग्रेस की बैठकोंम में पार्टी ने 68 वर्ष या उससे अधिक उम्र के किसी भी व्यक्ति को पोलित ब्यूरो में एक नए कार्यकाल के लिए नियुक्त नहीं किया।

पद से हटा दिए जाएंगे प्रधानमंत्री
राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बाद दूसरे नंबर के नेता प्रधानमंत्री ली केकियांग पार्टी नेतृत्व की भूमिका से हट जाएंगे और उनकी जगह लेने वाले प्रमुख उम्मीदवारों में हान झेंग शामिल हैं, जो देश के मौजूदा चार उप-प्रधानमंत्रियों में पहले स्थान पर हैं और जिन्होंने 68 साल की उम्र में केवल पारंपरिक सेवानिवृत्ति की उम्र पूरी की है। वहीं, दूसरे उप प्रधानमंत्री 59 साल के हू चुनहुआ भी एक दावेदार हैं। लेकिनस 70 साल के लियू हे सबसे प्रमुख दावेदार माने जाते हैं, क्योंकि वो राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बचपन के दोस्त हैं। वहीं, पूर्व उप-प्रधानमंत्री वांग वांग भी एक उम्मीदवार माने जा रहे हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि, नया प्रधानमंत्री कौन होगा, इसके लिए हमें ज्यादा इंतजार नहीं करना होगा और 23 अक्टूबर को कांग्रेस की बैठक खत्म होने के ठीक बाद नये प्रधानमंत्री का नाम सामने आ जाएगा। वहीं, अब जहां तक मौजूदा प्रधानमंत्री ली केकियांग का सवाल है, तो 67 वर्षीय प्रधानमंत्री का राजनीतिक भविष्य अब अनिश्चित है।

क्या पीएससी में किसी महिला का होगा चुनाव
चीन के 7 सदस्यीय इलाइट पोलित ब्यूरो में कभी भी किसी महिला का चयन नहीं किया गया है, वहीं वर्तमान में 25 सदस्यीय पोलित ब्यूरो में एकमात्र महिला सुन चुनलन हैं, जो 72 साल की हो चुकी हैं और इस बार की बैठक में उनका रिटायर्ड होना तय माना जा रहा है। चीन की राजनीति में महिलाओं को महत्व नहीं दिया जाता है और इस बार भी पूरी उम्मीद है, कि शीर्ष नेतृत्व में किसी भी महिला का चयन नहीं किया जाएगा।

चीन का पॉलिसी बनाने में कांग्रेस का स्थान?
एक्सपर्ट्स का मानना है कि, तीसरा कार्यकाल अपने हाथ में लेने वाले शी जिनपिंग कोई नया एजेंडा बनाना नहीं चाहेंगे, बल्कि उनकी कोशिश घरेलू नीति के एजेंडे को ही आगे बढ़ाने की होगी, जिसका चुनाव उन्होंने अपने पहले दो कार्यकाल में किए हैं। ऑस्ट्रेलिया स्थित लोवी इंस्टीट्यूट के एक शोध साथी जेनिफर सू ने अलजजीरा से कहा कि, "चीन की आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुए और बढ़ती आबादी से लेकर बढ़ते कर्ज तक की अन्य समस्याओं को देखते हुए,यह आगामी कांग्रेस केवल पार्टी की शक्ति और चीन की राजनीतिक व्यवस्था में शी जिनपिंग के प्रभुत्व को और मजबूत करेगी। क्योंकि, पार्टी की नजर में स्थिरता पर लगातार जोर दिया जाता है और पार्टी राष्ट्रपति को और मजबूत करेगी"। उन्होंने कहा कि, 'फैसले लेना अब पूरी तरह से शी जिनपिंग की मुट्ठी में है और आगामी कांग्रेस की बैठक में इसके बदलने की संभावना नगन्य है। लिहाजा, किसी भी तरह के नये प्रयोग या नीति निर्धारण की गुंजाइश ना के बराबर है।'












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