BRI Forum: जम्मू कश्मीर और अरुणाचल को भारत का हिस्सा बताने वाले सैकड़ों नक्शे चीन ने नष्ट किए
बीजिंग। चीन में शुक्रवार से बेल्ट एंड रोड इनीशिएटिव यानी बीआरआई समिट की शुरुआत हुई है। यहां पर पाकिस्तान के प्राइम मिनिस्टर इमरान खान समेत दुनिया के करीब 100 देशों के प्रतिनिधि पहुंचे हैं। चीन ने इस समिट से उन तमाम नक्शों को हटा दिया जो जम्मू कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश को भारत के हिस्से के तौर पर बता रहे थे। भारत ने दूसरी बार इस फोरम को बायकॉट करने का फैसला किया। चीन ने मई 2017 में पहली बार इस समिट का आयोजन किया था।

अरुणाचल को दक्षिणी तिब्बत मानता है चीन
रिपोर्ट्स के मुताबिक चीनी सरकार मान रही थी कि इन नक्शों से पीओके और अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीनी सरकार की गलत स्थिति लोगों में भ्रम पैदा करने वाली थी। इन सभी नक्शों में भारत को भी बीआरआई प्रोजेक्ट का हिस्सा बताया गया था। भारत अभी तक बीआरआई को यह कहकर मानने से इनकार करता आया है कि यह चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) के तहत आता है जो कि पीओके से होकर गुजरता है। भारत सरकार सीपीईसी को देश की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता का उल्लंघन बताती आई है। चीन ने हाल ही में उन तमाम मानचित्रों को नष्ट कर दिया है जिसमें अरुणाचल प्रदेश को भारत का हिस्सा बताया जा रहा था। चीन की तमाम कोशिशें के बाद भी भारत इस समिट में हिस्सा लेने से इनकार करता आया है। चीन, अरुणाचल प्रदेश को दक्षिणी तिब्बत के तौर पर बताता आया है।
पीओके से गुजरता है सीपीईसी
भारत के लिए सीपीईसी गंभीर चिंता का विषय बना हुआ है। सीपीईसी का एक बड़ा हिस्सा पीओके से होकर गुजरता है। भारतीय अधिकारियों की ओर से कहा गया है कि चीन इस प्रोजेक्ट की वजह से बीआरआई के प्रोजेक्ट्स को फायदा पहुंचाने के लिए चीन गलत तरीके से जमीन का प्रयोग कर रहा है। भारत कहता आया है कि इस तरह के प्रोजेक्ट को अंतरराष्ट्रीय मानकों के तहत ही आगे बढ़ाना चाहिए। चीनी अधिकारियों की मानें तो बीजिंग में इस सम्मेलन के दौरान 40 विदेशी सरकारों के नेता और 100 से ज्यादा देशों के प्रतिनिधि बीजिंग पहुंचे। भूटान ने भी इसमें हिस्सा नहीं लिया है। कार्यक्रम के उद्घाटन पर 29 देशों की सरकारों के मुखिया मौजूद रहे। समिट के लिए हालांकि अमेरिका और जर्मनी जैसे देशों की रूचि भी न के बराबर है।
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