US, चीन या पाकिस्तान? बांग्लादेश में शेख हसीना की सरकार गिराने के पीछे किसका हाथ? दूर करिए सभी कनफ्यूजन
Bangladesh Crisis: शेख हसीना के बेटे साजिब वाजेद जॉय ने अपनी मां की किसी भी राजनीतिक वापसी की संभावना को खारिज करते हुए कहा है, कि बांग्लादेश को बदलने की उनकी कोशिशों के बावजूद, उनके नेतृत्व के खिलाफ विद्रोह से वह "बहुत निराश" हैं।
बीबीसी वर्ल्ड सर्विस के न्यूजऑवर कार्यक्रम के साथ एक इंटरव्यू में साजिब वाजेद जॉय, जो शेख हसीना के बांग्लादेश से निकलने से पहले तक उनके आधिकारिक सलाहकार भी थे, उन्होंने कहा, कि शेख हसीना रविवार से ही इस्तीफा देने पर विचार कर रही थीं और उन्होंने अपने परिवार के दबाव के बाद अपनी सुरक्षा के लिए देश छोड़ने का फैसला किया।

दूसरी तरफ बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है, कि सेना ने शेख हसीना को देश छोड़ने के लिए 45 मिनट का वक्त दिया था और इतने कम समय में उन्हें अपना सामान भी समेटना था और ये भी तय करना था, कि उन्हें शरण लेने के लिए कहां जाना है। उन्होंने भारत को चुना और भारत ने उन्हें शरण भी दी।
लेकिन, सवाल ये है, पिछले महीने तक जो शेख हसीना काफी ताकतवर थीं, वो अचानक इतनी कमजोर कैसे हो गईं और चीन, अमेरिका या पाकिस्तान, वो कौन सा देश है, जिसने उनकी सत्ता के विनाश में भूमिका निभाई है? आइये कुछ संकेतों से समझते हैं।
क्या चीन ने गिराई शेख हसीना की सरकार?
म्यांमार में लोकतांत्रिक नेता और भारत समर्थक आंग सान सू ची की पार्टी की सरकार ने विशाल बहुमत से साल 2020 में चुनाव जीता और 1 फरवरी 2021 को उनकी सरकार को गिराकर देश की सत्ता पर सेना ने कब्जा कर लिया। उसके बाद से म्यांमार गंभीर गृहयुद्ध से जूझ रहा है। म्यांमार के सैन्य शासकों के साथ चीन कई रणनीतिक सौदे कर रहा है, जो भारत के खिलाफ है।
शेख हसीना के साथ भी चीन के संबंध पिछले कुछ महीनों से खराब चल रहे थे और जब नरेन्द्र मोदी तीसरी बार प्रधानमंत्री बने, तो शेख हसीना बतौर मेहमान शामिल हुईं और उसके ठीक दो हफ्ते बाद उन्होंने आधिकारिक तौर पर भारत का दौरा किया, जहां दोनों देशों के बीच कई ऐतिहासिक प्रोजेक्ट्स के लिए समझौते किए गये।
भारत के बाद शेख हसीना चीन गईं, लेकिन मतभेद इतने बढ़ गये, कि उन्होंने चीन का दौरा बीच में ही छोड़ दिया और वापस बांग्लादेश लौट आईं। चीन ने शेख हसीना को वो प्रोटोकॉल नहीं दिया, जो किसी प्रधानमंत्री को दिया जाता है, इस बात से शेख हसीना नाराज थीं।
इसके अलावा, शेख हसीना चाहती थीं, कि चीन कम से कम 4 या पांच अरब डॉलर के निवेश को लेकर प्रतिबद्धता जताए, लेकिन चीन ने सिर्फ 500 मिलियन डॉलर के निवेश के लिए ही हामी भरी, जो शेख हसीना के लिए डिप्लोमेटिक अपमान था और वो गुस्सा होकर वापस ढाका लौट आईं।
ढाका लौटते ही उन्होंने तीस्ता प्रोजेक्ट को भारत की मदद से पूरा करने की घोषणा कर दी, और ये प्रोजेक्ट हर हाल में चीन चाहता था, क्योंकि इससे उसे भारत पर करीब से नजर रखने में मदद मिलती है, लेकिन शेख हसीना ने चीन को बड़ा झटका दिया।
इसक अलावा, सिलिगुड़ी गलियारे के पास बांग्लादेश चीन के साथ एक प्रोजेक्ट शुरू करने वाला था और ये जगह रणनीतिक तौर पर भारत के लिए काफी अहम है, लेकिन भारत की आपत्ति के बाद शेख हसीना ने आश्वासन दिया था, कि वो इस प्रोजेक्ट पर विचार करेंगी और ये भी चीन के लिए बड़ा झटका था। और निश्चित तौर पर ये वो वजहें हो सकती हैं, जिसने चीन की आंखों में शेख हसीना को कांटा बना दिया था।

क्या अमेरिका ने रची शेख हसीना सरकार को गिराने की साजिश?
RAND Corporation के इंडो-पैसिफिक के नेशनल सिक्योरिटी एनालिस्ट और फॉरेन अफेयर्स एक्सपर्ट डेरेक जे ग्रॉसमैन कहते हैं, कि "सिर्फ इसलिए, कि बाइडेन प्रशासन पिछले बांग्लादेशी चुनाव की स्वतंत्रता और निष्पक्षता की आलोचना कर रहा था (जिसके नतीजों को आखिरकार उसने स्वीकार कर लिया) इसका मतलब यह नहीं है, कि अमेरिका ने सक्रिय रूप से वहां तख्तापलट की कोशिश की थी। इसके अलावा कोई भी आरोप या निराधार आरोप, गैर-जिम्मेदाराना और खतरनाक है।"
इसके अलावा, शेख हसीना को हटाने में 'पश्चिम की साजिश' को उन्होंने फेक न्यूज करार दिया है। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा है, कि "आखिर अमेरिका ऐसा क्यों करेगा? इंडो-पैसिफिक में भारत, अमेरिका का एक सबसे महत्वपूर्ण भागीदार और अमेरिका बहुत अच्छे से ये जानता है, कि बेगम खालिदा जिया के आने से चीन को फायदा होगा, तो भला अमेरिका ऐसा क्यों करेगा?"
लेकिन, इसी साल मई में शेख हसीना ने पार्टी और गठबंधन नेताओं को संबोधित करते हुए परोक्ष तौर पर अमेरिका पर आरोप लगाए थे। उन्होंने कहा था, कि 'एक शक्तिशाली देश' की तरफ से एयरबेस बनाने के लिए जमीन मांगी जा रही है और ऐसा करने पर उनकी सरकार सुरक्षित चलने का ऑफर दिया गया है। लेकिन, उन्होंने इस ऑफर को मानने से इनकार कर दिया है।
शेख हसीना ने मई में 14-पार्टी गठबंधन के नेताओं से कहा था, कि बांग्लादेश और म्यांमार से कुछ हिस्से लेकर "पूर्वी तिमोर जैसा एक ईसाई राज्य" बनाने की साजिश चल रही है। हालांकि, उन्होंने भारत का नाम लेने से परहेज किया था, कि इसमें भारत के भी कुछ हिस्से को शामिल किया जा सकता है।
शेख हसीना ने यह भी कहा था, कि एक श्वेत व्यक्ति ने बांग्लादेश में 7 जनवरी को हुए चुनाव में बिना किसी पश्चिमी देश की परेशानी के उन्हें जीतने में मदद करने की पेशकश की थी, और इसके लिए शर्त ये थी, कि इसके बदले उन्हें एक 'विदेशी देश को बांग्लादेश में हवाई अड्डा स्थापित करने की इजाजत देना होगा।' हालांकि, शेख हसीना ने उस 'श्वेत व्यक्ति और उसकी नागरिकता' का खुलासा नहीं किया।
इस बयान के करीब दो महीने बाद ही शेख हसीना की सरकार का पतन हो गया। तो क्या इसके लिए अमेरिका को जिम्मेदार माना जाए? कहना मुश्किल है।

क्या पाकिस्तान की है साजिश?
सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने सऊदी में रहने वाले पाकिस्तानी मुस्लिमों, खासकर मौलानाओं पर सख्त एक्शन लिए हैं, क्योंकि उनका मानना है, कि ये सऊदी अरब में कट्टरपंथी विचारधारा को बढ़ा रहे हैं, जिसे वो खत्म करना चाहते हैं।
बांग्लादेश में हुए इस प्रदर्शन को भी इसी नजरिए से देखा जाना चाहिए।
पाकिस्तान कभी भी एक स्थिर बांग्लादेश नहीं चाहता है और ISI ने देश के चरमपंथियों को उकसाकर इस प्रदर्शन को भयावह बनाने में अहम भूमिका निभाई है। ISI ने छात्रों के प्रदर्शन में चरमपंथियों को शामिल किया।
बांग्लादेश में पिछले कुछ महीनों में हिंसा और आतंकवादी कृत्यों की लहर आई है, जिसके बाद 1 अगस्त 2024 को बांग्लादेश सरकार ने जमात-ए-इस्लामी और उसके छात्र विंग, इस्लामी छात्र शिबिर पर प्रतिबंध लगा दिया था, और इन संस्थाओं को आतंकवाद विरोधी अधिनियम 2009 की धारा 18/1 के तहत आतंकवादी संगठन घोषित किया है।
इसके अलावा, लंदन से, बेगम खालिदा जिया के बेटे तारिक रहमान ने कथित तौर पर पार्टी के धनी सदस्यों से सरकार विरोधी आंदोलन को फंड करने और चल रहे छात्र विरोध के कॉर्डिनेटर्स के साथ लगातार बातचीत करने के लिए कहा था। 2008 में, अमेरिकी अधिकारियों ने तारिक रहमान पर वीजा प्रतिबंध लगा दिए थे और ISI लगातार तारिक रहमान के संपर्क में था। इसके अलावा, पाकिस्तान से भारी संख्या में आतंकी भी बांग्लादेश पहुंचे थे, जिन्होंने हिंसा को बढ़ावा दिया है।
सबसे खतरनाक है, विचारधारा। पाकिस्तानी मौलानाओं ने लंबे समय से बांग्लादेश के युवाओं का ब्रेनवाश किया है और भारत के खिलाफ जहर भरा है और इस प्रदर्शन में उसका खतरनाक असर देखा गया है। लिहाजा, अब नये बांग्लादेश को लेकर भारत को सतर्क रहने की जरूरत है।












Click it and Unblock the Notifications