OBOR का विस्तार कर आर्कटिक तक ले जाएगा चीन
चीन ने शुक्रवार को अपनी आर्कटिक नीति को लेकर आधिकारिक तौर पर पहला श्वेत पत्र जारी किया।
नई दिल्ली। चीन ने राष्ट्रपति शी चिनफिंग की महत्वाकांक्षी परियोजना वन बेल्ट एंड वन रोड (ओबोर) के विस्तार का खाका पेश किया। जिसके तहत ओबोर को आर्कटिक तक ले जाने की प्लानिंग है। इसके लिए ग्लोबल वार्मिंग के कारण खुले नए रास्तों का जहाजों की आवाजाही के लिए विकास किया जाएगा। चीन के सरकारी अखबार "चाइना डेली" के अनुसार, इस क्षेत्र में चीन अपने हितों का विस्तार कर रहा है। आर्कटिक में रूस की यमाल तरल प्राकृतिक गैस (एलएनजी) परियोजना में चीन की बड़ी हिस्सेदारी भी है। इससे चीन को हर साल 40 लाख टन एलएनजी मिलने की उम्मीद है।

आर्कटिक नीति को लेकर आधिकारिक तौर पर पहला श्वेत पत्र जारी किया
चीन ने शुक्रवार को अपनी आर्कटिक नीति को लेकर आधिकारिक तौर पर पहला श्वेत पत्र जारी किया। इसमें कहा गया है, चीन विभिन्न उद्यमों को बुनियादी ढांचों के निर्माण और प्रायोगिक व्यावसायिक यात्राओं के लिए प्रोत्साहित करेगा। इससे "पोलर सिल्क रोड" आकृति लेगा। चीन आशा करता है कि सभी पक्ष आर्कटिक शिपिंग मार्गों के विकास के माध्यम से "पोलर सिल्क रोड" का निर्माण करेंगे। चाइना डेली के मुताबिक उत्तरी समुद्र मार्ग से जहाजों की आवाजाही होने से पारंपरिक स्वेज नहर मार्ग की अपेक्षा करीब 20 दिनों की बचत होगी।

तेल, गैस, खनिज संसाधनों पर नजर
श्वेत पत्र में कहा गया है कि चीन की क्षेत्र में तेल, गैस, खनिज संसाधनों, गैर जीवाश्म ऊर्जा और पर्यटन के विकास पर भी नजर है। यह सब आर्कटिक देशों की परंपराओं और संस्कृति का सम्मान करने के साथ उनके साथ संयुक्त रूप से किया जाएगा।

क्या है ओबोर परियोजना
चीन वन बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना के माध्यम से यूरोप और पश्चिम एशिया के दर्जनों देशों से जुड़ना चाहता है। ओबोर परियोजना के तहत ही चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (सीपीईसी) का भी निर्माण किया जा रहा है। सीपीईसी से पश्चिमी चीन के काशगर को पाकिस्तान के ग्वादर बंदरगाह को जोड़ा जाना है।












Click it and Unblock the Notifications