भारत की सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत कर रहा चीन, अमेरिका ने दिया साथ का भरोसा
अमेरिका के अमेरिका के रक्षा सचिव लॉयड जेम्स ऑस्टिन ने कहा कि चीन भारत के साथ सटी सीमाओं पर लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
सिंगापुर, 11 जूनः अमेरिका के अमेरिका के रक्षा सचिव लॉयड जेम्स ऑस्टिन ने कहा कि चीन भारत के साथ सटी सीमाओं पर लगातार अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने अंदेशा जाहिर किया कि इस क्षेत्र के देशों को चीन की राजनीतिक धमकी का सामना करना पड़ सकता है।

चीन के आक्रमक रूख पर चिंता जताई
सिंगापुर में शनिवार को शांगरी-ला डायलॉग में चीनी शीर्ष नेता की मौजूदगी में बोलते हुए ऑस्टिन ने चीन के आक्रामक रुख पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि अमेरिका अपने मित्रों के साथ खड़ा है। भारत का साथ देने की बात करते हुए उन्होंने कहा कि हम देख रहे हैं कि चीन, भारत के साथ सीमा पर अपनी स्थिति को सख्त करना जारी रखे हुए है।

दक्षिण चीन सागर में चीन का रुख आक्रामक
ऑस्टिन ने कहा कि चीन दक्षिण चीन सागर में अपने क्षेत्रीय दावों को लेकर आक्रामक रुख अपना रहा है और अपनी अवैध समुद्री योजनाएं को आगे बढ़ा रहा है। वह अपने मछली पकड़ने के बेड़े का विस्तार कर रहा है, जो पड़ोसियों के साथ तनाव को बढ़ा रहा है। उन्होंने आगे कहा, ''चीन, अपने अवैध समुद्री दावों को आगे बढ़ाने के लिए उन्नत हथियारों से लैस मानव निर्मित द्वीपों पर चौकियों का उपयोग कर रहा है।''

भारत को बताया महत्वपूर्ण भागीदार
इस क्षेत्र में अमेरिका के लिए एक भागीदार के रूप में भारत के बारे में बोलते हुए ऑस्टिन ने कहा "हम अन्य भागीदारों के साथ भी घनिष्ठ संबंध बना रहे हैं। मैं विशेष रूप से दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के बारे में सोच रहा हूं। हम मानते हैं कि इसकी बढ़ती सैन्य क्षमता और तकनीकी कौशल क्षेत्र में एक स्थित शक्ति हो सकती है।"

आक्रामकता से निपटने के लिए अमेरिका तैयार
ऑस्टिन ने कहा कि अमेरिका भविष्य में किसी भी आक्रामकता से निपटने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में बीजिंग की गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए ऑस्टिन ने कहा कि हम बीजिंग के बढ़ते दबाव को देख रहे हैं। हमने ताइवान के पास उत्तेजक और अस्थिर करने वाली सैन्य गतिविधि में लगातार वृद्धि देखी है। हम ताइवान जलडमरूमध्य में शांति, स्थिरता और यथास्थिति बनाए रखने पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

भारत-प्रशांत में स्थिरता जरूरी
ऑस्टिन ने आगे कहा कि चीन के कदमों से भारत-प्रशांत में सुरक्षा, स्थिरता और समृद्धि कमजोर करने का खतरा है। यह इस क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण है ही साथ व्यापक दुनिया के लिए भी उतना ही जरूरी है। ताइवान जलडमरूमध्य में शांति औऱ स्थिरता बनाए रखना केवल अमेरिका का हित नहीं है। यह अंतरराष्ट्रीय चिंता का विषय है।
आजादी के बाद पाकिस्तान में थे 13 फीसदी हिन्दू, अब इतने रह गए शेष, 6 लोग करते हैं जैन धर्म का पालन












Click it and Unblock the Notifications