चीन की अर्थव्यवस्था में तबाही आने का खतरा, शी जिनपिंग ने बुलाई वैश्विक निवेशकों की आपातकालीन बैठक
China Invites Global Investors: चीन की अर्थव्यवस्था में तबाही मचने वाली है और दुनिया के तमाम बड़े देशों से पंगा ले चुके चीन की इकोनॉमी ताश के महल की तरह ढह सकती है। समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने मामले से जानकार तीन सूत्रों के हवाले से कहा है, कि चीन ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स की एक बैठक बुलाई है और चीन के लिए ऐसा करना अपने आप में दुर्लभ बात है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तीन सूत्रों ने बताया है, कि वैश्विक निवेशकों को जियो-पॉलिटिकल तनाव और चीन की अर्थव्यवस्था में आई कमजोरी को लेकर प्रोत्साहित करने के लिए चीन ने उनकी एक दुर्लभ बैठक बुलाई है। इसका मकसद ये है, कि वैश्विक निवेशक चीन में निवेश करना जारी रखें।

चीन की इमरजेंसी बैठक
मामले की प्रत्यक्ष जानकारी रखने वाले सूत्रों के हवाले से रॉयटर्स से बताया है, कि अगले शुक्रवार को बीजिंग में होने वाली बैठक में अमेरिकी डॉलर में निवेश करने वाली इन्वेस्टमेंट एजेंसियों को आमंत्रित किया गया है और बैठक में चीन में निवेश को लेकर उनकी चिंताओं के बारे में पूछा जाएगा।
रायटर्स ने कहा है, कि उन्होंने चीन के इनविटेशन कार्ड को भी देखा है।
चीन की ये बैठक ऐसे समय में हो रही है, जब वैश्विक निवेशक और बैंक चेतावनी दे रहे हैं, कि चीन के आर्थिक दृष्टिकोण पर विश्वास कम हो रहा है। महामारी के बाद चीन की सुधार की गति तेजी से कम हो रही है और चीन-अमेरिका संबंध राष्ट्रीय सुरक्षा मुद्दों पर सबसे निचले स्तर पर चले गये हैं।
चीन में निवेश करने वाली ज्यादातर एजेंसियां अमेरिका और यूरोप की हैं और चीन ने अमेरिका और यूरोप से पंगा ले रखा है। इसके अलावा, ताइवान की चीन लगातार घेराबंदी कर रहा है, जिससे अमेरिका के साथ उसके रिश्ते और बिगड़ गये हैं। वहीं, अमेरिका ने कई एडवांस टेक्नोलॉजी को लेकर चीन के खिलाफ प्रतिबंध लगा दिए हैं, जिसमें चीन की राज्य के नेतृत्व वाली औद्योगिक नीतियां शामिल हैं।
रॉयटर्स ने बताया है, कि इस बैठक का साफ साफ एजेंडा ये जानना है, कि ग्लोबल वित्तीय फर्म चीन में निवेश करने में किन चुनौतियों का सामना कर रही हैं। यह बैठक विदेशी निवेशकों के बीच विश्वास बढ़ाने के लिए बीजिंग की उत्सुकता को दर्शाती है।
बैठक में कौन कौन होंगे शामिल?
सूत्रों ने कहा, कि बड़े विदेशी और घरेलू फंड मैनेजर जैसे निजी इक्विटी (पीई) फर्म, जिन्हें सामान्य साझेदार (जीपी) के रूप में जाना जाता है, और उनके निवेशक या सॉवरेन वेल्थ फंड और पेंशन फंड सहित सीमित साझेदार (एलपी) के बैठक में शामिल होने की उम्मीद है।
सूत्रों और दस्तावेजों के अनुसार, उन्हें चीन में अपने व्यवसायों के सामने आने वाली चुनौतियों का समाधान करने और अर्थव्यवस्था पर अपना दृष्टिकोण साझा करने में मदद करने के लिए सुझाव देने के लिए भी प्रोत्साहित किया जाएगा।
सूत्रों ने कहा, कि जो वैश्विक फंड की बैठक में भाग लेंगे, वे संभवतः चीन स्थित अपने वरिष्ठ कर्मचारियों को ही बैठक में भेजेंगे।
तीनों स्रोतों ने नाम न छापने की शर्त पर बात की, क्योंकि वे मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं थे।
आपको बता दें, कि सख्त कोविड उपायों के कारण, चीन की अर्थव्यवस्था 2022 में सिर्फ 3% बढ़ी है, जो दशकों में सबसे खराब प्रदर्शनों में से एक है। इस साल की शुरुआत में प्रतिबंध अचानक हटा दिए जाने के बाद इसमें फिर से तेजी आई, लेकिन ये गति काफी सुस्त है और अमेरिका के साथ तनाव ने वैश्विक निवेशकों के मन में चीन में निवेश करने को लेकर डर भरा है।

कंपनियों के देश से निकलने से डरा चीन
चीन ने ये बैठक ऐसे समय में बुलाई है, जब कुछ पीई कंपनियां और उनके निवेशक और तकनीकी कंपनियां चीन से अपने कारोबार को समेटने पर विचार कर रहे हैं। जिसने पीई निवेशकों की वापसी की संभावनाओं पर एक लंबी छाया डाली है और चीन में निवेश के अवसर कम हो गए हैं। अलग-अलग सूत्रों ने रॉयटर्स को यह जानकारी दी है।
कनाडा के नंबर 3 पेंशन फंड - ओंटारियो टीचर्स पेंशन प्लान (ओटीपीपी) ने जनवरी में कहा था, कि वह चीन में निजी संपत्तियों में भविष्य में डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट को रोक रहा है।
दो सूत्रों के अनुसार, देश के सिक्योरिटीज रेग्युलेटर, चीन सिक्योरिटीज रेगुलेटरी कमीशन (सीएसआरसी) के उपाध्यक्ष फैंग जिंगहाई इस बैठक में उपस्थित लोगों को संबोधित करेंगे।
हालांकि, सीएसआरसी ने शुक्रवार को रॉयटर्स के सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
बैठक का आयोजन चीन के फंड नियामक एसेट मैनेजमेंट एसोसिएशन ऑफ चाइना (एएमएसी) ने किया है। एएमएसी ने भी रॉयटर्स के सवालों का तुरंत जवाब नहीं दिया।
महीनों के निराशाजनक आर्थिक आंकड़ों के कारण एमएससीआई का चीन शेयर सूचकांक इस वर्ष 2% नीचे आ गया है, जबकि वैश्विर शेयरों में 15% की बढ़त हुई है, वहीं युआन 8 महीने के निचले स्तर पर मंडरा रहा है, जिससे कुछ निवेशकों को अपनी चीन की रणनीतियों को बंद करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।












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