चीन ने दलाई लामा को धमकाया, बोला-सिर्फ उनके भविष्य पर चर्चा होगी
नई दिल्ली, 10 नवंबर: चीन ने तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा को धमकाते हुए कहा है कि उनके साथ किसी तरह की बात होगी तो वह खुद उनके भविष्य के बारे में होगी और किसी भी चीज पर नहीं है। चीन ने दलाई लामा पर चीन के विभाजन और अलगाववादी गतिविधियों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए उनसे इसे बंद करने को कहा है। दरअसल, चीन की यह प्रतिक्रिया दलाई लामा के एक बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी चीन के राष्ट्रपति से मिलने की कोई योजना नहीं थी, लेकिन वह बुजुर्ग हो चुके हैं, इसलिए बचपन के मित्रों से जरूर मिलना चाहते हैं। उन्होंने यह भी कहा था कि वह भारत में शांतिपूर्वक रहना पसंद करते हैं। चीन को उनका यही बयान नागवार गुजरा है और उन्होंने उन्हें धमकाने की कोशिश की है।

चीन ने दलाई लामा को धमकाया
चीन ने बुधवार को कहा है कि वह तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा से सिर्फ और सिर्फ उनके भविष्य को लेकर चर्चा कर सकता है, लेकिन तिब्बत के बारे नहीं। चीन के विदेश मंत्रालय ने दलाई लामा से धमकी भरे अंदाज में कहा है कि 14वें दलाई लामा को चीन के विभाजन और उसके खिलाफ साजिश और हिंसा भड़काने की गतिविधियां बद कर देनी चाहिए। चीन सरकार ने एक ऑनलाइन फोरम पर दलाई लामा के बयान और उनसे बातचीत शुरू करने की इच्छा को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में ये प्रतिक्रिया दी है। उस फोरम पर दलाई लामा ने कहा था कि उनका चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलने की कोई खास योजना नहीं थी।

सिर्फ दलाई लामा के भविष्य पर हो सकती है चर्चा- चीन
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता वैंग वेंबिन ने तिब्बत की निर्वासित सरकार को 'बाहरी और अलगाववादी राजनीतिक समूह' कहकर संबोधित किया है। उन्होंने कहा है, 'तथाकथित तिब्बत की निर्वासित सरकार एक बाहरी और अलगवावादी राजनीतिक समूह है। यह चीन के संविधान और कानून के खिलाफ है, यह एक गैर-कानूनी संगठन है। दुनिया का कोई भी देश इसे मान्यता नहीं देता।' उनके मुताबिक चीन की सरकार 14वें दलाई लामा से चर्चा पर उसकी स्थिति स्पष्ट है और बातचीत के दरवाजे खुले हुए हैं। लेकिन, उन्होंने साफ कर दिया है कि 'मैं यह बात स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि जिस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है वह है खुद दलाई लामा का भविष्य, तिब्बत को लेकर कुछ भी नहीं।'

'भारत में ही रहना पसंद करेंगे, शांति से '
चीन सरकार के प्रवक्ता यहीं नहीं रुके और उन्होंने दलाई लामा को धमकी भरे अंदाज में कहा कि 'दलाई लामा को क्या करना चाहिए कि अलगवावादी गतिविधियों को रोकें और केंद्रीय सरकार और चीन की जनता का भरोसा जीतने के लिए ठोस कदम उठाएं।' दरअसल, टोक्यो में आयोजित एक ऑनलाइन फोरम में 86 वर्षीय दलाई लामा ने चीन के नेताओं की आलोचना करते हुए कह था कि वहां 'विभिन्न तरह की संस्कृतियों को नहीं समझते हैं' और वहां हान जातीय समूह का ही सबसे ज्यादा नियंत्रण भी है। रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक उन्होंने कहा कि उन्हें 'चीनी भाइयों और बहनों' से कोई दिक्कत नहीं है। इस एजेंसी के मुताबिक 'हालांकि दलाई लामा ने कहा कि उनकी चीन के नेता शी जिनपिंग से मिलने की कोई योजना नहीं थी, वे बोले कि अपने पुराने मित्रों से मिलने के लिए वह फिर से वहां जाना चाहेंगे क्योंकि 'मैं बूढ़ा हो रहा हूं', लेकिन ताइवान नहीं जाऊंगा क्योंकि चीन के साथ उसके संबंध ठीक नहीं हैं।' उन्होंने साफ कहा था कि 'वह भारत में ही रहना पसंद करेंगे, शांति से। '

चीन ने क्यों की दलाई लामा के भविष्य की बात ?
दरअसल, चीन ने जो दलाई लामा के भविष्य का शिगूफा छोड़ा है, उसके पीछे उनके उत्तराधिकारी का मुद्दा है। जिनपिंग की कमान वाली कम्युनिस्ट पार्टी चाइना की सरकार इस तिकड़म में है कि वह दलाई लामा के बाद अपनी पसंद का कोई 'मुखौटा' दलाई लामा बना दे। लेकिन, भारत में निर्वासित जीवन जीने को मजबूर तिब्बत की जनता सिर्फ उसी को दलाई लामा मानने को तैयार हैं, जो उनकी परंपराओं के मुताबिक हो और उसमें मौजूदा दलाई लामा की सहमति सबसे जरूरी है। 1959 में तिब्बत की जनता के खिलाफ चीन की कार्रवाई के चलते दलाई लामा 1959 में अरुणाचल प्रदेश के रास्ते भागकर भारत आ गए थे और तब से यहीं शरण लेकर रह रहे हैं। भारत ने उन्हें तब से राजनीतिक शरण दिया हुआ है और हिमाचल प्रदेश की धर्मशाला में तिब्बत की निर्वासित सरकार का मुख्यालय है।












Click it and Unblock the Notifications