तो अमेरिका को आंख दिखाने के लिए चीन ने बताया पाक को आतंक का पीड़ित!
बीजिंग। पिछले कुछ दिनों से अंतराष्ट्रीय स्तर पर ऐसे समीकरण बन रहे हैं जिनकी उम्मीद शायद पहले नहीं की गई थी। आईएसआईएस की वजह से फ्रांस, अमेरिका और ब्रिटेन अब रूस से नजदीकियां बढ़ाने लगे हैं तो वहीं एशिया में भी नए समीकरण बन रहे हैं।

चीन और पाकिस्तान दोनों के रिश्ते तो कई दशकों से काफी करीबी रहे हैं लेकिन अब इन रिश्तों में नया रंग आया है। चीन जो खुद अब आतंकवाद की आहट महसूस कर रहा है, उसने पाकिस्तान को आतंकवाद का पीड़ित बताया है। साथ ही साफ कर दिया है कि चीन पाक की मदद करता रहेगा।
पाक को बताया आतंक से पीड़ित
चीन ने मंगलवार को पाक को ‘आतंकवाद का शिकार' बताया है। चीन ने साफ कर दिया है कि वह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में पड़ोसी देश की मदद करता रहेगा। यहां पर यह बात गौर करने वाली है कि चीन ने भारत के साथ भी बड़े स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ जारी लड़ाई में मदद की बात कही है।
इस मदद में भारत का अतंराष्ट्रीय स्तर पर सहयोग शामिल है। चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्रालय में विदेश मामलों के कार्यालय के महानिदेशक रीयर एडमिरल गुआन यूफेई ने कहा कि पाकिस्तान भी आतंकवाद का शिकार है। पिछले कुछ साल में पाकिस्तान आतंकवाद के साथ लड़ रहा है जिसमें उसने काफी नुकसान झेला है।
वह चीन के सेंट्रल मिल्रिटी कमीशन के उपाध्यक्ष जनरल फान चांगलोंग की अध्यक्षता वाले 26 सदस्यीय चीनी सैन्य प्रतिनिधिमंडल की यात्रा के दौरान मीडिया से रूबरू थे। इस प्रतिनिधिमंडल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर समेत अन्य लोगों से मुलाकात की है।
तो यह है पूरा माजरा
चीन ने अमेरिका पर भी निशाना साधा है। पिछले दिनों अमेरिका की एक वॉरशिप ने साउथ चाइना सी का दौरा किया था। इस वॉरशिप को लेकर दोनों देशों के बीच काफी तनाव भी पैदा हुआ था। अमेरिका की मीडिया ने तो यहां तक कह डाला था कि दोनों देश थर्ड वर्ल्ड वॉर के मुहाने पर पहुंच चुके हैं।
अमेरिका के साथ चीन की तनातनी के बीच भारत और अमेरिका के बीच नजदीकियां भी काफी अहम हैं। ऐसे में शायद चीन को एशिया में पाकिस्तान, जो कि उसका पुराना सहयोगी है, के साथ सहयोग बढ़ाने की जरूरत है। वहीं चीन के कई इंफ्रास्ट्रक्वचर प्रोजेक्ट्स भी पाकिस्तान में जारी हैं जो उसकी अर्थव्यवस्था के लिए काफी अहम हैं।
जिनपिंग ने बताया था 'भाई'
अप्रैल में जब राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पाक का दौरा किया था तो उन्होंने कहा था कि उन्हें लगता है वह पाकिस्तान नहीं बल्कि अपने छोटे भाई के घर आ रहे हैं। उनके इस बयान के कई मायने निकाले गए थे।
आने वाले समय में यह देखना काफी अहम होगा कि क्या चीन अफगानिस्तान में अपने हितों को साधने के लिए पाक की मदद करता रहेगा या फिर भारत और अंतराष्ट्रीय स्तर पर आतंकवाद के खिलाफ प्रतिबद्धता जताते हुए पाक को आइना भी दिखाएगा?












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