ब्रिटेन संसद में गूंजेगी भारतीय किसानों की आवाज, किसान आंदोलन पर आज होगी बहस, फ्रीडम ऑफ प्रेस भी मुद्दा
ब्रिटेन की संसद में भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर बहस कराने का फैसला लिया गया है। ब्रिटिश संसद में भारत और फ्रीडम ऑफ प्रेस पर भी बहस होगी।
लंदन: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दोस्त और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ही उन्हें सबसे बड़ा झटका देने जा रहा है। ब्रिटेन की संसद में भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर बहस कराने का फैसला लिया गया है। भारत सरकार द्वारा लाए गये तीन कृषि सुधार कानूनों के विरोध में राजधानी दिल्ली में पिछले 100 दिनों से ज्यादा वक्त से किसानों का आंदोलन चल रहा है जिसको लेकर अब ब्रिटिश संसद में बहस की जाएगी।

ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन की गूंज
ब्रिटिश संसद में भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर बहस कराने की मांग काफी जोर-शोर से की जा रही थी। ब्रिटिश पार्लियामेंट पेटीशन कमेटी के पास एक लाख से ज्यादा लोगों ने ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन पर बहस कराने को लेकर अपना सिग्नेचर भेजा था जिसके बाद ब्रिटिश पार्लियामेंट पेटीशन कमेटी ने संसद के वेस्ट मिनिस्टर हॉल में भारत में चल रहे किसान आंदोलन पर बहस कराने का फैसला लिया है। ब्रिटिश समय के मुताबिक 8 मार्च शाम साढ़े चार बजे किसान आंदोलन पर बहस किया जाएगा। इस बहस में भारत में प्रेस की आजादी पर भी बहस कराने का फैसला लिया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक किसान आंदोलन और भारत में फ्रीडम ऑफ प्रेस को लेकर एक लाख 6 हजार लोगों ने ऑनलाइन रिक्वेस्ट भेजी थी। ब्रिटिश सांसद प्रीत कौर गिल ने भी ब्रिटिश संसद में बहस को लेकर सिग्नेचर किया है। उन्होंने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी है।
फ्रीडम ऑफ प्रेस पर भी बहस
कई अखबारों में रिपोर्ट छपी थी कि ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भी किसान आंदोलन पर बहस कराने को लेकर सिग्नेचर सौंपी थी लेकिन उनकी पार्टी ने इन खबरों का खंडन करते हुए कहा है कि प्रधानमंत्री की तरफ से ऐसा कुछ नहीं किया गया है। फ्रीडम ऑफ प्रेस पर बात करते हुए ब्रिटेन सरकार के प्रवक्ता ने कहा है कि किसी भी देश में प्रेस की आजादी बेहद जरूरी है और जर्नलिस्ट और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की स्वतंत्रता और सुरक्षा बेहद जरूरी है ताकि जर्नलिस्ट पूरी दुनिया में निडर और निष्पक्ष होकर काम कर सकें। लोकतांत्रित व्यवस्था में फ्रीडम ऑफ प्रेस बेहद जरूरी है। ब्रिटेन सरकार ने कहा है कि प्रेस की आजादी के लिए वो अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करेगी।
दरअसल, ब्रिटिश संसद में एक लाख से ज्यादा लोगों ने ऑनलाइन पेटीशन दायर करते हुए भारत सरकार के नई दिल्ली में चल रहे किसान आंदोलन के दौरान किसानों को पूरी सुरक्षा देने पर बहस कराने की मांग की थी। ब्रिटिश सरकार के वेबसाइट पर एक लाख से ज्यादा लोगों ने बहस की ऑनलाइन डिमांड की थी और ब्रिटिश संसद के नियमों के मुताबिक अगर किसी मुद्दे पर एक लाख से ज्यादा लोग बहस की मांग करते हैं तो उस मुद्दे पर बहस कराना अनिवार्य है। ब्रिटिश संसद के हाउस ऑफ कामंस ने कहा है कि ब्रिटिश सरकार लोगों की मांग पर बहस कराने पर विचार कर रही है।
भारत के अंदरूनी मामलों में दखल
इससे पहले भी स्वीडन की क्लाइमेट चेंज एक्टिविस्ट ग्रेटा थनबर्ग समेत कई अंतर्राष्ट्रीय कलाकारों और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने भारतीय किसान आंदोलन को लेकर आवाज उठाई थी। जिसे भारत सरकार ने भारत के अंदरूनी मामलों में दखल बताया था। भारत सरकार की तरफ से कहा गया था कि भारत सरकार किसानों के हित में 3 नये कृषि सुधार कानून लेकर आई है और सरकार किसानों को लेकर बहुत संवेदनशील है। ऐसे में अब ब्रिटिश संसद में किसान आंदोलन पर बहस क्या भारत के अंदरूनी मामलों में दखल है? इसे लेकर भारत सरकार की तरफ से अभी तक कोई बयान नहीं आया है।












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