भारत को लेकर बदल रहा नई ब्रिटिश सरकार का रवैया? FTA को लटकाने के मूड में लिज ट्रस सरकार!

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, जिन्होंने अप्रैल में भारतीय नेता नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, उन्होंने अक्टूबर के अंत में रोशनी के भारतीय त्योहार दिवाली तक मुक्त व्यापार समझौते करने की उम्मीद जताई थी।

INDIA-UK TRADE DEAL: ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन का भारत को लेकर काफी दोस्ताना रवैया था और उनके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के साथ भी काफी अच्छे संबंध थे। बतौर प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने भारत के साथ संबंधों को मजबूत करने पर काफी ध्यान दिया, लेकिन ब्रिटेन की नई सरकार की तरफ से भारत को लेकर जो बयानबाजी की जा रही है, उससे ऐसे संकेत मिल रहे हैं, कि प्रधानमंत्री लिज ट्रस की कैबिनेट भारत को लेकर अपने रवैये में बदलाव ला रहा है।

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बदले सुर!

फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बदले सुर!

ब्रिटेन की नई लिज ट्रस की सरकार ने कहा है, कि वह भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर तभी हस्ताक्षर करेगी, जब ये समझौता "ब्रिटेन के हितों को पूरा करता हो"। ब्रिटेन की सरकार की ये टिप्पणी इसलिए भी चौंकाने वाली है, क्योंकि पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भारत के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने को लेकर काफी दिलचस्पी दिखा रहे थे और उस दौरान दोनों पक्ष लगातार कोशिश कर रहे थे, कि दिवाली तक दोनों देशों के बीच ये समझौता हो जाए। लेकिन अब,ब्रिटिश सरकार के एक प्रवक्ता ने शुक्रवार को कहा कि, "हम स्पष्ट हैं कि हम फ्री ट्रेड एग्रीमेंट की रफ्तार बढ़ाने करे लिए उसकी क्वालिटी से समझौता नहीं करेंगे और एग्रीमेंट पर सिर्फ तभी हस्ताक्षर करेंगे, जब हमारे पास ब्रिटेन के हितों को पूरा करने वाला सौदा होगा।"

दिवाली तक रखा गया था लक्ष्य

दिवाली तक रखा गया था लक्ष्य

ब्रिटेन के पूर्व प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन, जिन्होंने अप्रैल में भारतीय नेता नरेंद्र मोदी से मुलाकात की थी, उन्होंने अक्टूबर के अंत में रोशनी के भारतीय त्योहार दिवाली तक मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर हस्ताक्षर करने का एक महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया था और भारत ने भी उम्मीद जताई थी, कि दोनों देश जल्द ही आखिरी समझौते पर पहुंचने वाले हैं। लेकिन, जैसे-जैसे समय सीमा नजदीक आ रही है, दोनों पक्षों ने संकेत दिया है कि इस समझौते को लेकर काम किया जाना बाकी है। ब्रिटेन की नई व्यापार सचिव बैडेनोच, जिन्हें पिछले हफ्ते ही प्रधानमंत्री लिज ट्रस ने नामित किया है, उन्होंने कहा है कि,"इस सौदे में वो सारी बातें नहीं हैं, जो सर्विस सेक्टर चाहता है और समय सीमा काफी नजदीक आ रहा है।"

भारत ने क्या कहा?

भारत ने क्या कहा?

वहीं, भारत के विदेश मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने यूट्यूब पर एक ब्रीफिंग में संवाददाताओं से कहा कि, "दोनों पक्षों में जल्द से जल्द एफटीए समाप्त करने के लिए रुचि है।" भारत ने कहा कि, "सभी निगोशिएशन का एक मकसद आपसी लेन-देन है और इसे दोनों पक्षों के लिए विन-विन कंडीशन बनाने की जरूरत है।" भारतीय विदेश मंत्रालय ने कहा कि, 'माइग्रेशन मोबिलिटी एक महत्वपूर्ण तत्व है और पहले इसको लेकर एक महत्वपूर्ण समझ थी, और हम इस बात की उम्मीद करेंगे, कि दोनों ही पक्ष उसका सम्मान करेंगे।'

गृहमंत्री ने भी उठाए सवाल

गृहमंत्री ने भी उठाए सवाल

वहीं, ब्रिटेन की गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने भी भारत को लेकर पिछले दिनों अलग अलग निगेटिव बयान दिए हैं और उन्होंने भी ट्रेड डील को लेकर कई आशंकाओं को उठाया है। उन्होंने आशंका जताते हुए कहा कि, इस ट्रेड डील से यूके में अप्रवासन बढ़ सकता है। भारतीय मूल की ब्रिटिश गृहमंत्री सुएला ब्रेवरमैन ने ब्रिटिश साप्ताहिक पत्रिका 'द स्पेक्टेटर' के लिए एक साक्षात्कार में यह टिप्पणी की। ब्रेवरमैन ने 'द स्पेक्टेटर' से कहा कि, "मुझे भारत के साथ एक खुली सीमा प्रवास नीति के बारे में चिंता है, क्योंकि मुझे नहीं लगता कि लोगों ने ब्रेक्सिट के लिए मतदान किया था।"

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