ब्रिटेन में ड्राइवरों की कमी से देश में हलकान, पेट्रोल पंप सूखे, दुकानों में नहीं हैं सामान, आपातकालीन स्थिति

ब्रेक्सिट से निकलने के बाद ब्रिटेन के सामने कई चुनौतियां सामने आने वाली हैं, जिनमें से एक चुनौती ड्राइवर्स की कमी है।

लंदन, अक्टूबर 02: ब्रिटेन में पेट्रोल और गैस की किल्लत ने अब हालात के बेकाबू करने शुरू कर दिए हैं। पिछले एक हफ्ते से ब्रिटेन में पेट्रोल पंप पूरी तरह से खाली हैं, लोगों को गाड़ियों में डलवाने के लिए पेट्रोल नहीं मिल रहा है, जिसके बाद अब सरकार ने सेना उतारने का फैसला किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में सोमवार से गैस स्टेशनों और पेट्रोल पंप्स में गैस और पेट्रोल की सप्लाई सेना करने जा रही है।

तेल-गैस की भयानक किल्लत

तेल-गैस की भयानक किल्लत

ब्रिटिश सरकार ने शुक्रवार को कहा है कि, ट्रक ड्राइवरों की आपूर्ति श्रृंखला में भारी कमी के कारण 200 सैन्य टैंकर कर्मी, जिनमें से 100 ड्राइवर हैं, वो शनिवार और रविवार को तेल और पेट्रोल की सप्लाई करने की ट्रेनिंग लेंग और फिर सोमवार से देश के अलग अलग हिस्सों में तेल और पेट्रोलियम पदार्थों की डिलीवरी करनी शुरू कर देंगे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्री बेन वालेस ने कहा कि, "हम स्थिति को स्थिर करने की कोशिश कर रहे हैं और हमारे सैनिक किसी भी परिस्थिति में और किसी भी संकट की स्थिति से निपटने में सक्षम है। हम बहुत जल्द उद्योग से लेकर आम पेट्रोल पंपों में ईंधन पहुंचाने का काम शुरू कर रहे हैं।''

ब्रिटेन में भारी संकट

ब्रिटेन में भारी संकट

ब्रिटेन में इस वक्त स्थिति काफी खराब बताई जा रही है और ईंधन की वजह से कई उद्योगों को बंद करना पड़ा है और सरकार के साथ ट्रांसपोर्ट संगठन की बात अभी तक नहीं बनी है। वहीं, ब्रेक्सिट और कोविड-19 महामारी के मद्देनजर श्रमिकों की कमी ने अर्थव्यवस्था के कुछ क्षेत्रों में अव्यवस्था पैदा कर दी है। ईंधन और दवाओं की डिलीवरी को बाधित है और बताया जा रहा है कि एक लाख से ज्यादा सूअरों को खेतों में छोड़ दिया है। खुदरा विक्रेताओं ने कहा कि ब्रिटेन में 2 हजार से ज्यादा गैस स्टेशन पूरी तरह से सूख चुके हैं और लंदन और दक्षिणी इंग्लैंड में रॉयटर्स के पत्रकारों ने कहा कि दर्जनों पंप अभी भी बंद हैं।

दो तिहाई पेट्रोल पंप सूखे

दो तिहाई पेट्रोल पंप सूखे

ब्रिटिश मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में दो तिहाई से ज्यादा पेट्रोल पंप के पास अब पेट्रोल की एक बूंद भी मौजूद नहीं है और जिन पेट्रोल पंपों पर तोड़ा बहुत तेल है, वहां पर गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लगीं देखी जा रही है। वहीं, देश के कई हिस्सों में किराने की दुकान में सामानों की किल्लत शुरू हो गई है। सामानों को ढोने के लिए ट्रक ड्राइवर्स कहीं नजर नहीं आ रहे हैं। कई डिपार्टमेंटल स्टोर्स से लोग बगैर सामान खाली हाथ वापस लौट रहे हैं, वहीं कई इलाकों से खबर आई है कि लोग घबराहट की वजह से ज्यादा सामान खरीदकर घरों में भर रहे हैं।

ब्रिटेन में क्यों हुई स्थिति खराब?

ब्रिटेन में क्यों हुई स्थिति खराब?

सवाल ये है कि ब्रिटेन में ट्रक ड्राइवर्स की किल्लत अचानक काफी ज्यादा क्यों बढ़ चुकी है? आखिर ब्रिटेन में अचानक ये संकट क्यों पैदा हो गया है? आईये इसके पीछे की वजह समझते हैं। दरअसल, ब्रिटिश सरकार के ऑफिस फॉर नेशनल स्टेटिस्टिक्स के मुताबिक, पिछले एक साल में ब्रिटेन में भारी वाहनों के ड्राइवर्स की संख्या में भारी कमी आई है और 7 हजार से ज्यादा ड्राइवर्स कम हो गये हैं। वहीं, धीरे-धीरे ड्राइवर्स की ये कमी खतरनाक स्तर तक पहुंच चुकी है, जिसने अब ऐसी स्थिति कर दी है कि सामानों की सप्लाई ही नहीं हो पा रही है। ब्रिटेन में डिमांड और सप्लाई चेन को फिर से पटरी पर लाने के लिए कम से कम एक लाख ड्राइवर्स की फौरन जरूरत है।

ब्रिटिश सरकार की नीति का असर

ब्रिटिश सरकार की नीति का असर

रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रिटेन में लगातार लॉकडाउन ने ड्राइवर्स की जिंदगी पर काफी बुरा असर डाला है। वहीं, ब्रिटिश सरकार ने कोविड-19 रोकने के लिए ऐसे ऐसे नियम बना दिए कि ब्रिटेन में काम करने वाले विदेशी ड्राइवर्स लॉकडाउन खुलने के बाद वापस ब्रिटेन नहीं आ पा रहे हैं। वहीं, ज्यादातर विदेशी ड्राइवर्स ने ब्रिटेन ही छोड़ दिया है। वहीं, ब्रिटेन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2020 में पूरे साल ब्रिटेन में ड्राइविंग टेस्ट काफी कम हुए हैं, जिससे ट्रक चलाने वाले और भारी वाहनों के ड्राइवर्स की संख्या 30 हजार तक कम हो गई है। वहीं, यूरोपीय यूनियन से संबंध रखने वाले 20 हजार से ज्यादा ड्राइवरों ने भी ब्रिटेन के यूरोपीयन यूनियन से अलग होने के बाद ब्रिटेन छोड़ दिया। अब स्थिति ये है कि ब्रिटिश सरकार ने करीब पांच हजार विदेशी ड्राइवर्स को अस्थाई वीजा देकर आपातकालीन स्थिति में देश बुलाने की बात कही है।

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