BrahMos Missile Deal: चीन के पड़ोसी को भारत बेचेगा Made in India ब्रह्मोस मिसाइल, ड्रैगन की उड़ी नींद

India Vietnam BrahMos Missile Deal: भारत की रक्षा ताकत और डिफेंस एक्सपोर्ट को बड़ी सफलता मिली है। भारत ने वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल बेचने की डील फाइनल कर ली है। यह ऐलान सिंगापुर में हुए शांगरी-ला डायलॉग के दौरान किया गया। इस डील के साथ वियतनाम, फिलीपींस के बाद ब्रह्मोस खरीदने वाला दूसरा विदेशी देश बन गया है।

वहीं इंडोनेशिया के साथ भी बातचीत आखिरी स्टेज में पहुंच चुकी है। अगर यह डील भी पूरी हो जाती है तो दक्षिण-पूर्व एशिया में भारत की रणनीतिक मौजूदगी और मजबूत होगी। इससे भारत के डिफेंस एक्सपोर्ट को भी बड़ा बूस्ट मिलने की उम्मीद है।

BrahMos Missile Deal

BrahMos missile export Vietnam: वियतनाम के साथ ब्रह्मोस डील पर लगी मुहर

सिंगापुर में आयोजित शांगरी-ला डायलॉग के दौरान भारत के रक्षा सचिव राजेश कुमार ने पुष्टि की कि वियतनाम के साथ ब्रह्मोस मिसाइल डील फाइनल हो चुकी है। दोनों देशों के बीच इस समझौते पर लंबे समय से बातचीत चल रही थी। हाल के महीनों में दोनों देशों ने रणनीतिक और आर्थिक रिश्तों को मजबूत करने पर जोर दिया था। अब इस डील के पूरा होने से भारत और वियतनाम के रक्षा सहयोग में एक नया अध्याय जुड़ गया है। इससे क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग को भी मजबूती मिलेगी।

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इंडोनेशिया भी बन सकता है अगला ग्राहक

भारत अब इंडोनेशिया को भी ब्रह्मोस मिसाइल बेचने के करीब पहुंच गया है। रक्षा सचिव के मुताबिक दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। कुछ तकनीकी और वित्तीय मुद्दों पर चर्चा जारी है, लेकिन जल्द ही इस पर भी सहमति बन सकती है। अगर डील पूरी होती है तो इंडोनेशिया ब्रह्मोस खरीदने वाला तीसरा देश बन जाएगा। इससे भारत का डिफेंस एक्सपोर्ट नेटवर्क और बड़ा होगा तथा इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में उसकी रणनीतिक स्थिति और मजबूत होगी।

कितनी है इस डील की कीमत?

रिपोर्ट्स के अनुसार भारत-वियतनाम ब्रह्मोस डील की कुल कीमत करीब 60 अरब रुपये बताई जा रही है। यह लगभग 629 से 700 मिलियन डॉलर के बीच हो सकती है। इस पैकेज में तटीय सुरक्षा के लिए मोबाइल बैटरियां, मिसाइलों का शुरुआती बैच, लॉजिस्टिक सपोर्ट और वियतनामी सैनिकों की ट्रेनिंग शामिल है। भविष्य में जरूरत के अनुसार इस डील का विस्तार भी किया जा सकता है। इसलिए आने वाले वर्षों में इसकी कुल वैल्यू और बढ़ने की संभावना है।

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राष्ट्रपति तो लाम की यात्रा के बाद बढ़ी रफ्तार

भारत और वियतनाम के बीच ब्रह्मोस को लेकर बातचीत कई वर्षों से चल रही थी। हाल ही में वियतनाम के राष्ट्रपति तो लाम की भारत यात्रा के दौरान इस मुद्दे पर विस्तार से चर्चा हुई थी। इसके बाद बातचीत में तेजी आई और आखिरकार डील फाइनल हो गई। वियतनाम पहले भी कई बार सार्वजनिक रूप से ब्रह्मोस खरीदने में रुचि दिखा चुका था। दोनों देशों के बीच बढ़ते रणनीतिक रिश्तों ने इस समझौते को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

फिलीपींस के बाद दूसरा देश बना वियतनाम

ब्रह्मोस मिसाइल खरीदने वाला पहला विदेशी देश फिलीपींस था, जिसने 2022 में भारत के साथ 375 मिलियन डॉलर की डील की थी। उस समझौते के तहत मिसाइलों की डिलीवरी भी पूरी की जा चुकी है। हाल ही में फिलीपींस में ब्रह्मोस का सिमुलेशन फायर टेस्ट भी सफल रहा था। अब वियतनाम दूसरा देश बन गया है जिसने इस मिसाइल पर भरोसा जताया है। इससे साफ है कि भारतीय डिफेंस टेक्नोलॉजी को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेजी से पहचान और स्वीकार्यता मिल रही है।

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