जब Pakistan है दुनिया का सबसे खतरनाक देश, तो बाइडेन ने उसे क्यों दिए F-16 पैकेज?
सिर्फ एफ-16 फाइटर जेट डील ही नहीं, जिस पाकिस्तान को अमेरिका 'खतरनाक' कह रहा है, उसी पाकिस्तान को अमेरिका ने पिछले दिनों आईएमएफ से राहत पैकेज दिलवाया है।
Joe Biden on Pakistan: पिछले दो महीने में अमेरिका के साथ प्यार की पींगे पढ़ने वाले पाकिस्तान को आज उस वक्त करारा झटका लगा है, जब अमेरिकी राष्ट्रपति ने पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक देश करार दे दिया। जो बाइडेन का बयान पाकिस्तान में बनाए गये परमाणु हथियारों को लेकर था और उनका मतलब इस बात को लेकर था, कि पाकिस्तान बिना सामंजस्य के परमाणु हथियारों का निर्माण कर रहा है। लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि जब अमेरिकी राष्ट्रपति एक तरफ पाकिस्तान को दुनिया का सबसे खतरनाक देश बताते हैं, तो फिर वो पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट्स की मरम्मत और अपग्रेडेशन के लिए 450 मिलियन डॉलर का पैकेज क्यों दे देते हैं।

बाइडेन के बयान में विरोधाभास
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडेन ने पाकिस्तान को 'सबसे खतरनाक देश' भले ही बताया है, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति का ये बयान अपने आप में विरोधाभासी भी है। ऐसा इसलिए, क्योंकि अमेरिका ने हाल-फिलहाल ही पाकिस्तान को एफ-16 फाइटर जेट्स की मरम्मत और आधुनिकीकरण के लिए 450 मिलियन डॉलर देने की घोषणा की है, जिसपर भारत की तरफ से सख्त ऐतराज भी जताया गया है। बाइडेन का बयान हैरान करने वाला इसलिए भी है, क्योंकि उन्होंने अमेरिका ने पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले को पलटकर पाकिस्तान को एफ-16 पैकेज दिया है, जिसे ट्रंप ने रोक दिया था। डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान को 'धोखेबाज' कहकर उसे हर तरह की सैन्य सहायता देने पर रोक लगा दी थी, लेकिन जो बाइडेन ने सैन्य पैकेज देना फिर से शुरू किया है। भारत के रक्षा विशेषज्ञ भी यही सवाल उठा रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञ सुशांत शरीन ने आजतक से बात करते हुए कहा कि, 'हालांकि, भारत पर उसका कोई फर्क नहीं पड़ता है, लेकिन एक तरफ पाकिस्तान को खतरनाक बताना और दूसरी तरफ उसे एफ-16 पैकेज देना, बाइडेन प्रशासन का मिक्स्ड रिएक्शन पॉलिटिक्स को बताता है।'

पाकिस्तान पर मेहरबान अमेरिका
सिर्फ एफ-16 फाइटर जेट डील ही नहीं, जिस पाकिस्तान को अमेरिका 'खतरनाक' कह रहा है, उसी पाकिस्तान को अमेरिका ने पिछले दिनों आईएमएफ से राहत पैकेज दिलवाया है। लिहाजा, अमेरिका का ये दूसरा दोहरा रवैया है। अगस्त में अचानक आईएमएफ और पाकिस्तान के बीच 1.6 अरब डॉलर के लोन को लेकर समझौता हो जाता है और आईएमएफ पाकिस्तान को राहत पैकेज देने के लिए तैयार हो जाता है, जिसके लिए पकिस्तान के आर्मी चीफ ने अमेरिका से अनुरोध किया था, जबकि कई एक्सपर्ट चाहते थे, कि अमेरिका पाकिस्तान के साथ आतंकवाद खत्म करने का प्रेशर बनाए और फिर उसे आईएमएफ से राहत दे। लेकिन, अमेरिका ने ऐसा नहीं किया। इतना ही नहीं, जब पाकिस्तान के सैन्य प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा इसी महीने अमेरिका के आधिकारिक दौरे पर गये, तो अमेरिकी रक्षा मंत्री उन्हें रिसीव करने के लिए बाहर तक आए थे, तो फिर सवाल ये उठता है, कि आखिर इस 'खतरनाक' देश को रोकने के लिए अमेरिका ने क्या किए हैं?

FATF से पाकिस्तान आएगा बाहर?
अमेरिका के डबल गेम को आप एक और उदाहरण से समझ सकते हैं। जिस पाकिस्तान को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने दुनिया के लिए खतरनाक बताया है, वो पाकिस्तान उसी अमेरिका की मदद से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट से बाहर आने वाला है, जबकि आतंकवादियों को संरक्षण देने के लिए उसे ब्लैक लिस्ट किया जाना चाहिए। टेरर फंडिग के लिए अमेरिका पिछले 4 सालों से एफएटीएफ की ग्रे लिस्ट में है और माना जा रहा है, कि 18 अक्टूबर से 21 अक्टूबर के बीच फ्रांस की राजधानी पेरिस में होने वाले एफएटीएफ की बैठक में पाकिस्तान को ग्रे-लिस्ट से बाहर निकाला जा सकता है। तो फिर सवाल ये हैं, कि आखिर जिस पाकिस्तान को जो बाइडेन दुनिया का सबसे खतरनाक देश बता रहे हैं, उसकी मदद हर जगह वो क्यों कर रहे हैं। और अगर मदद कर भी रहे हैं, तो जो वजहें पाकिस्तान को खतरनात बनाती हैं, उन्हें रोकने के लिए अमेरिका ने कितने कदम उठाए हैं।

मूर्ख नहीं बनाए अमेरिका- भारत
अमेरिका की इन्हीं हरकतों की वजह से पिछले दिनों भारतीय विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने वॉशिंगटन में कहा था, कि 'हमें मूर्ख बनाने की कोशिश नहीं की जाए।' उन्होंने तो साफ तौर पर कहा था, कि F-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल किसके खिलाफ होगा, उसे लेकर किसी को 'मूर्ख नहीं समझा जाए'। जिसके जवाब में अमेरिका की तरफ से जो प्रतिक्रिया दी गई, उसमें कहा गया, कि अमेरिका के लिए भारत और पाकिस्तान, दोनों देशों से अलग अलग संबंध हैं और भारत और पाकिस्तान को लेकर अमेरिका की अपनी अलग अलग प्राथमिकताएं हैं। लेकिन, सवाल ये उठते हैं, कि जो मुल्क दुनिया का सबसे खतरनाक है, उसके साथ भला किस तरह की प्राथमिकताएं अमेरिका के पास हैं। भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों का मानना है, कि अमेरिका और प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी (पाकिस्तान) के बीच लेन-देन संबंध फिर से शुरू हो गए हैं। और पाकिस्तान अपनी विदेश नीति में अचानक यू-टर्न लेने, अचानक से किसी टॉप आतंकवादी को बेनकाब करने या बलि का बकरा बनाने, जैसे अयमान अल जवाहिरी को मारा गया और अपने अल्पकालिक लाभ के लिए अमेरिका और चीन, डबल गेम खेलने में माहिर है और पाकिस्तान के पास ये क्षमता बेजोड़ है। तो फिर सवाल ये उठते हैं, कि क्या पाकिस्तान की ही तरह अमेरिका भी डबल गेम नहीं खेल रहा है?

अमेरिका का प्लान-बी है पाकिस्तान
कई एक्सपर्ट्स मानते हैं, कि अमेरिका ये तो मानता है, कि पाकिस्तान खतरनाक है, लेकिन उसके बाद भी अमेरिका के लिए पाकिस्तान प्लान-बी है। यह बिल्कुल स्पष्ट है, कि पाकिस्तान भारत के खिलाफ हवा से हवा में मार करने वाली मिसाइलों सहित एफ-16 फाइटर जेट का इस्तेमाल करेगा, ना कि किसी तीसरे देश के खिलाफ, फिर भी अमेरिका ने पाकिस्तान को पैकेज देकर यकीनन भारत के लिए बड़ा खतरा पैदा कर दिया है। इसके साथ ही, अमेरिका पाकिस्तान को फिर से अपना हथियार बेचना चाहता है और अगर अमेरिका पाकिस्तान को हथियार बेचता है, तो फिर अमेरिका को टेक्नोलॉजी ट्रांसफर करने का टेंशन नहीं रहेगा, लेकिन भारत के साथ ये स्थिति नहीं है। भारत अगर कोई हथियार खरीदता है, तो अब भारत की पहली शर्त ही टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और हार्डवेयर प्लेटफॉर्म का निर्माण भारत में करना होता है। लेकिन, पाकिस्तान की ऐसी कोई शर्त नहीं होती है। लिहाजा, इसमें कोई शक नहीं, कि डबल गेम खेलने में अमेरिका से बड़ा 'वीर' कोई नहीं है।












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