बांग्लादेश में बैलेट पेपर से होंगे लोकसभा चुनाव, EVM हटाने की विपक्ष की मांग को सरकार ने स्वीकारा
भारत में भी अधिकांश विपक्षी दलों ने मतदान के लिए ईवीएम के इस्तेमाल को लेकर मुखर रूप से चिंता जताई है। हालांकि, बार-बार, भारत के चुनाव आयोग और केंद्र सरकार दोनों ने मांग को खारिज कर दिया है।

Bangladesh to cancel EVMs: इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन को लेकर सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि भारत के पड़ोसी बांग्लादेश में भी विवाद रहा है और अब बांग्लादेश की शेख हसीना सरकार ने इस साल के आम चुनाव में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं करने पर सहमति जता दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, शेख हसीना की सरकार ने, विपक्ष की ईवीएम हटाने और बैलेट पेपर के जरिए देश में लोकसभा का चुनाव करवाने के लिए मांग पर सहमति जता दी है।
भारत में ईवीएम पर होता है बवाल
माना जा रहा है, कि बांग्लादेश सरकार के इस फैसले के दक्षिण एशिया की राजनीति पर भी महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारत में पिछले कई सालों से ईवीएम हटाकर बैलेट पेपर से चुनाव कराने की मांग की जा रही है। भारत की कई विपक्षी पार्टियों ने ईवीएम के हैकिंग और छेड़छाड़ के आरोप लगाए हैं, लेकिन सरकार ने हर बार इन आरोपों को नकारा है। भारतीय चुनाव आयोग ने भी विपक्षी पार्टियों को ईवीएम हैक करने की चुनौती दी थी और उन्हें एक डेमो कार्यक्रम में भाग लेने के लिए बुलाया था, लेकिन उसमें विपक्षी पार्टियों ने हिस्सा ही नहीं लिया।

बांग्लादेश में बैलेट पेपर से चुनाव
बांग्लादेश के चुनाव आयोग (बीईसी) ने अगले (12वें) संसदीय चुनावों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों (ईवीएम) का उपयोग नहीं करने का फैसला किया है। बांग्लादेश में इस साल के अंत से चुनाव प्रचार शुरू हो जाएंगे और अगले साल जनवरी महीने में मतदान होंगे। बांग्लादेश के चुनाव आयोग ने ईवीएम रद्द करने का कोई कारण नहीं बताया है। हालांकि, बांग्लादेश में, सभी निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का उपयोग नहीं किया जाता है। हालांकि, बीईसी इस बार कम से कम 150 विधानसभा क्षेत्रों में ईवीएम से मतदान कराने की तैयारी कर रहा है।
विपक्षी पार्टियों ने किया था विरोध
बांग्लादेश की मुख्य विपक्षी पार्टी, बीएनपी सहित प्रमुख विपक्षी राजनीतिक दलों ने चुनाव में मशीनों के इस्तेमाल का कड़ा विरोध किया है। इसलिए, बांग्लादेश के सभी 300 संसदीय निर्वाचन क्षेत्रों में बैलेट पेपर और पारदर्शी मतपेटियों का उपयोग होगा। इसकी घोषणा बांग्लादेश चुनाव आयोग ने कर दी है। वहीं, बांग्लादेश के राजनीतिक पर्यवेक्षकों और विश्लेषकों ने ढाका में कहा, कि पुराने पेपर बैलट को वापस लाने से शेख हसीना की सरकार की 'लोकतांत्रिक मूल्यों को मजबूत करने' की छवि को निश्चित रूप से बढ़ावा मिलेगा।

सरकार ने चुनाव आयोग पर छोड़ा था फैसला
पिछले महीने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा था, कि "सरकार ने चुनाव में डिजिटल मशीन का इस्तेमाल करना इसलिए चुना था, क्योंकि सरकार को लगा था कि देश की जनता आधुनिक तरीके से चुनाव में भाग लेना चाहेगी। लेकिन, मशीनों की तटस्थता पर आपत्ति जताई गई है, लिहाजा हम यह चुनाव आयोग पर छोड़ रहे हैं, कि वो क्या फैसला लेंगे। हम चुनाव आयोग के फैसले को स्वीकार करेंगे।" और अब चुनाव आयोग ने बैलेट पेपर से चुनाव कराने का फैसला लिया है।

क्या पैसों की कमी भी है बड़ी वजह?
बीईसी सचिव जहांगीर आलम ने सोमवार को चुनाव आयुक्तों की बैठक के बाद ईवीएम को बंद करने के फैसले की घोषणा की। उन्होंने कहा, कि सरकार के पास नई मशीनें खरीदने और पुरानी मशीनों के नवीनीकरण के लिए धन की कमी भी इस फैसले के पीछे का एक प्रमुख कारण है। जहांगीर ने संवाददाताओं को यह भी बताया, कि जनवरी 2024 की शुरुआत में होने वाले आगामी चुनावों के दौरान सभी 300 निर्वाचन क्षेत्रों में पेपर मतपत्र और पारदर्शी मतपेटियों का उपयोग किया जाएगा।
पैसे के भुगतान के लिए तैयार नहीं थी सरकार
बांग्लादेशी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, 150 निर्वाचन क्षेत्रों में ईवीएम का उपयोग करने की चुनाव आयोग की पूर्व की योजनाओं पर जहांगीर ने कहा, कि 8,000 करोड़ रुपये की परियोजना तैयार की जा रही थी, लेकिन योजना आयोग ने इस परियोजना को आगे नहीं बढ़ने दिया। ईवीएम आपूर्तिकर्ता, बांग्लादेश मशीन टूल्स फैक्ट्री, ने कहा, कि 1.1 लाख ईवीएम को नवीनीकृत करने के लिए 1,260 करोड़ रुपये की आवश्यकता होगी। ये पैसे आयोग ने वित्त मंत्रालय से मांगे थे, लेकिन मंत्रालय ने उस राशि का भुगतान करने में असमर्थता जता दी। लिहाजा, ये भी एक बड़ी वजह बन गई।
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