Bangladesh Violence: जान बचाने को तालाब में कूदा, हिंदू कारोबारी पर बर्बर हमले की पत्नी ने सुनाई आपबीती
Bangladesh Violence: सऊदी बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हाल ही में ढाका से दूर एक ग्रामीण इलाके में हिंदू समुदाय के सदस्य और दवा व्यापारी खोकोन चंद्र दास पर हुए हमले ने देश-विदेश में चिंता पैदा की है। यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब अल्पसंख्यकों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं पहले से ही चर्चा में हैं।
पीड़ित परिवार का आरोप है कि यह हमला सुनियोजित था, जबकि स्थानीय प्रशासन जांच की बात कह रहा है। खोकोन दास की पत्नी सीमा दास न्याय की मांग कर रही हैं और मामले में दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की अपील की गई है।

बेरहमी की सारी हदें पार
खोकोन चंद्र दास बुधवार रात अपनी दुकान बंद कर घर लौट रहे थे, तभी घात लगाकर बैठे हमलावरों ने उन पर हमला बोल दिया। अपराधियों ने क्रूरता दिखाते हुए उनके चेहरे और सिर पर पेट्रोल छिड़ककर आग लगा दी। मौत को सामने देख खोकोन पास के तालाब में कूद गए, जिससे उनकी जान तो बच गई लेकिन वे बुरी तरह झुलस गए। वर्तमान में वे ढाका मेडिकल कॉलेज में जीवन और मौत की जंग लड़ रहे हैं, जहाँ उन्हें बचाने के लिए भारी मात्रा में खून की जरूरत है।
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पहचान वाले ही निकले दुश्मन?
पीड़ित की पत्नी सीमा दास के दावों ने इस घटना को और अधिक डरावना बना दिया है। उनके अनुसार, हमलावरों में से दो व्यक्ति उनके पति के परिचित थे। यह बात इस ओर इशारा करती है कि कट्टरपंथ अब पड़ोसियों के दिलों में भी घर कर चुका है। सीमा का कहना है कि उनका कभी किसी से कोई विवाद नहीं रहा, फिर भी उनके पति को निशाना बनाया गया। यह दर्शाता है कि वहां हिंदुओं को बिना किसी ठोस कारण के महज उनकी पहचान की वजह से निशाना बनाया जा रहा है।
सुरक्षा के दावों और हकीकत में अंतर
मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार लगातार अल्पसंख्यकों की सुरक्षा के दावे कर रही है, लेकिन जमीनी हकीकत इसके ठीक उलट है। खोकोन दास जैसे साधारण नागरिक पर हुआ यह हमला सरकार के सुरक्षा चक्र की पोल खोलता है। अस्पताल में मदद के लिए पहुंचे कुछ स्थानीय लोग इसे सांप्रदायिक घटना मानने से इनकार कर रहे हैं, लेकिन लगातार एक ही समुदाय को निशाना बनाए जाने का पैटर्न कुछ और ही कहानी बयां करता है। जांच के नाम पर केवल खानापूर्ति की आशंका बनी हुई है।
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अंतरराष्ट्रीय चिंता और भारत का रुख
बांग्लादेश में बिगड़ते हालात पर भारत सरकार ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। भारत ने इसे लगातार जारी दुश्मनी करार देते हुए अपनी गहरी चिंता जताई है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन भी हिंदुओं पर हो रहे इन हमलों को लेकर अलर्ट पर हैं। खोकोन दास की घटना ने एक बार फिर दुनिया का ध्यान बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के अस्तित्व पर मंडराते खतरे की ओर खींचा है। अब सवाल यह है कि क्या भविष्य में इन परिवारों को कभी वह शांति और सुरक्षा मिल पाएगी जिसकी वे मांग कर रहे हैं।
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