Twisha Sharma की मौत से कैसे मचा बवाल? बॉलीवुड की इन 5 फिल्मों में दिखाया गया है 'दहेज प्रथा' का असली रंग
Bollywood Movies On Dowry System: भारत आज दुनिया की तेजी से आगे बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है। तकनीक, शिक्षा और विकास के क्षेत्र में देश लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहा है लेकिन दूसरी तरफ दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मुद्दे आज भी समाज पर काले धब्बे की तरह मौजूद हैं। हर दिन सामने आने वाले मामले ये सोचने पर मजबूर कर देते हैं कि आधुनिकता के बावजूद महिलाओं की सुरक्षा और सम्मान के मामले में समाज आखिर कब बदलेगा।
ट्विशा शर्मा की मौत ने लोगों को किया परेशान
हाल ही में मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से सामने आए ट्विशा शर्मा (Twisha Sharma) केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस घटना ने एक बार फिर दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर मुद्दों को राष्ट्रीय बहस के केंद्र में ला दिया है।

क्या है ट्विशा शर्मा मर्डर केस?
-भोपाल का ट्विशा शर्मा केस इन दिनों देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। 33 साल की एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा गत 12 मई 2026 को अपने ससुराल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गईं। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह दम घुटना बताया गया लेकिन शरीर पर चोटों के कई निशान मिलने के बाद मामला और गंभीर हो गया।
-ट्विशा शर्मा के परिवार ने आरोप लगाया है कि दहेज प्रताड़ना के चलते उनकी बेटी को ससुराल वालों ने ही मार दिया है। वहीं ट्विशा की सास का कहना है कि उनकी बहू ने खुद अपनी जान ले ली है। मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम गठित की गई है। पति समर्थ सिंह समेत परिवार के कुछ सदस्य जांच के दायरे में हैं।
आखिर क्यों नहीं रुक रहे दहेज और घरेलू हिंसा के मामले?
-अब सवाल ये है कि 21वीं सदी में पहुंचने के बावजूद दहेज और घरेलू हिंसा जैसे अपराध क्यों खत्म नहीं हो पा रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिर्फ कानून का नहीं बल्कि सामाजिक सोच का भी मामला है।
-आज भी कई परिवार दहेज को परंपरा और सामाजिक प्रतिष्ठा से जोड़कर देखते हैं। शादी को रिश्ते से ज्यादा लेन-देन का माध्यम बना दिया गया है। इसका सबसे ज्यादा असर लड़कियों और उनके परिवारों पर पड़ता है।
-महिलाओं की आर्थिक निर्भरता, सामाजिक दबाव और समझौता कर लो जैसी मानसिकता भी कई बार पीड़िताओं को आवाज उठाने से रोक देती है। यही वजह है कि घरेलू हिंसा के कई मामले लंबे समय तक दबे रह जाते हैं।
समाज के इस कड़वे सच को फिल्मों ने भी दिखाया
हिंदी सिनेमा ने समय-समय पर समाज के गंभीर मुद्दों को बड़े पर्दे पर दिखाने की कोशिश की है। दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा, महिलाओं के अधिकार और मानसिक उत्पीड़न जैसे विषयों पर बनी कई फिल्मों ने लोगों को सोचने पर मजबूर किया है। इन फिल्मों ने सिर्फ मनोरंजन नहीं किया बल्कि समाज को आईना दिखाने का काम भी किया है।
दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा पर आधारित बॉलीवुड की ये 5 फिल्में
राजा की आएगी बारात
फिल्म 'राजा की आएगी बारात' में रानी मुखर्जी ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो अन्याय और अत्याचार के खिलाफ मजबूती से खड़ी होती है। फिल्म में महिलाओं के सम्मान, सामाजिक न्याय और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों को दिखाया गया था।
मेहंदी
'मेहंदी' एक ऐसी फिल्म थी, जिसने दहेज उत्पीड़न और ससुराल में होने वाली प्रताड़ना को बेहद भावुक तरीके से पर्दे पर उतारा। फिल्म में दिखाया गया है कि किस तरह एक लड़की शादी के बाद लगातार हिंसा और लालच का शिकार बनती है।
थप्पड़
फिल्म 'थप्पड़' में तापसी पन्नू ने एक ऐसी महिला की कहानी दिखाई है, जो पति द्वारा मारे गए एक थप्पड़ के बाद पूरे रिश्ते पर सवाल खड़े कर देती है। फिल्म ने ये संदेश दिया गया है कि किसी भी रिश्ते में सम्मान सबसे जरूरी है।
डार्लिंग्स
फिल्म 'डार्लिंग्स' में आलिया भट्ट और शेफाली शाह ने घरेलू हिंसा और मानसिक प्रताड़ना जैसे गंभीर मुद्दों को अलग अंदाज में पेश किया है। फिल्म ने ये दिखाया है कि लगातार हिंसा झेलने वाली महिलाएं किस मानसिक स्थिति से गुजरती हैं।
अग्नि साक्षी
'अग्नि साक्षी' में नाना पाटेकर, जैकी श्रॉफ और मनीषा कोइराला ने घरेलू हिंसा और मानसिक उत्पीड़न की भयावह तस्वीर पेश की थी। ये फिल्म उस डर और दर्द को सामने लाती है, जिससे कई महिलाएं वास्तविक जीवन में गुजरती हैं।
फिल्मों से जागरूकता बढ़ी, पर मानसिकता बदलना अभी बाकी
बॉलीवुड की इन फिल्मों ने समाज में जागरूकता बढ़ाने का काम जरूर किया है लेकिन वास्तविक बदलाव अभी भी अधूरा है। ट्विशा शर्मा जैसे मामले ये याद दिलाते हैं कि सिर्फ कानून बनाना काफी नहीं बल्कि समाज की सोच बदलना भी उतना ही जरूरी है। जब तक बेटियों को बराबरी, सम्मान और सुरक्षा नहीं मिलेगी तब तक विकास के तमाम दावे अधूरे ही माने जाएंगे।













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