बांग्लादेश में अबकी बार इस्लामिक 'तालिबानी' या फिर शेख हसीना की सरकार? चुनाव से पहले भारत की करीबी नजर
Bangladesh Election: बांग्लादेश, दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा मुस्लिम देश, एक चौराहे पर खड़ा है, जहां अगला आम चुनाव 7 जनवरी को होने वाला है, लेकिन यहूदी विरोधी, पश्चिम विरोधी कट्टरपंथी इस्लामवादी और जिहादी समूह खुले तौर पर चेतावनी पैदा कर रहे हैं।
ये चुनाव तय करेगा, कि बांग्लादेश पश्चिम एशिया में एक उदारवादी देश बनकर सामने आएगा, या फिर उन इस्लामवादियों के हाथों में चला जाएगा, जो तालिबान जैसा शासन चाहते हैं।

इसके बावजूद, कि हाल के वर्षों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी), जिसे कई अमेरिकी अदालतों द्वारा 'टियर-III आतंकवादी संगठन' कहा गया है, और उसके वैचारिक सहयोगी जैसे जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) को देश में समर्थन मिलना तेज हो गया है, और हैरानी की बात ये है, कि ख़लीफ़ा शासन का समर्थन करने वाले हिफ़ाज़त-ए-इस्लाम (HeI) को बाइडेन प्रशासन से समर्थन भी मिल रहा है।
बाइडेन प्रशासन की हालिया कार्रवाइयों के बांग्लादेश पर गंभीर परिणाम हो सकते हैं और अमेरिका की इस हरकत की वजह से बांग्लादेश एक नव-तालिबान राज्य में बदल सकता है।
बाइडेन प्रशासन बांग्लादेश में गंभीर गलती कर रहा है और भारत के पड़ोस को अशांति में धकेलने की कोशिश कर रहा है। बाइडेन प्रशासन चाहता है, कि उदारदावी सरकार चलाने वालीं शेख हसीना की पार्टी चुनाव हारे और बेगम खालिदा जिया की बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) सत्ता में आए, जो पाकिस्तान समर्थक है।
बाइडेन प्रशासन बांग्लादेश में अमेरिकी विरोधी, यहूदी विरोधी और पश्चिमी विरोधी भावनाओं के लंबे इतिहास वाली इस्लामी ताकतों का समर्थन कर रहा है, जहां ये इस्लामी कट्टरपंथियों ने गैर-मुस्लिमों के खिलाफ जमकर नफरती काम किए हैं।
बांग्लादेश की ये मजहबी ताकते अमेरीका को धमकी देते रहे हैं, कि "हम भी तालिबान बन जाएंगे।"
बांग्लादेश की इस्लामिक ताकतों को जानिए
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) की गठबंधन सरकार के 2001-2006 के शासन के दौरान, बांग्लादेश में कई घटनाएं हुईं, जहां प्रदर्शनकारियों ने अमेरिकी झंडे जलाए। राजनीतिक विकास, अंतर्राष्ट्रीय घटनाओं और सार्वजनिक भावनाओं सहित विभिन्न कारकों ने अक्सर इन विरोध प्रदर्शनों को ट्रिगर किया।
बाइडेन प्रशासन की परेशान करने वाली कूटनीति ने संयुक्त राज्य अमेरिका और बांग्लादेश के बीच लंबे समय से चले आ रहे संबंधों को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं, जिससे दोनों देशों के बीच सहयोग का 51 साल का इतिहास संभावित रूप से खतरे में पड़ गया है।

चूंकि अमेरिका ने 1971 में पाकिस्तानी कब्जे वाली ताकतों पर जीत के बाद नव स्वतंत्र बांग्लादेश को मान्यता दी थी, इसलिए रिश्ते को सौहार्दपूर्ण सहयोग और महत्वपूर्ण विकास साझेदारी द्वारा चिह्नित किया गया था।
हाल के वर्षों में, बाइडेन प्रशासन ने लोकतंत्र को बनाए रखने का दावा किया है। फिर भी, इसने बांग्लादेश की सत्तारूढ़ धर्मनिरपेक्ष अवामी लीग सरकार के प्रति शत्रुता दिखाई है, जबकि अति-इस्लामवादी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी (जेईआई) सहित उसके जिहादी सहयोगियों के साथ सहयोग किया है। बाइडेन प्रशासन का यह नजरिया, खतरनाक रूप से बांग्लादेश को नव-तालिबान राज्य या यहां तक कि खिलाफत की याद दिलाने वाले भविष्य की ओर धकेल रहा है।
बांग्लादेशी इस्लामवादी हमास-हिज़बुल्लाह कनेक्शन
इसके अलावा, बीएनपी और उसके इस्लामवादी सहयोगियों का अमेरिकी विरोधी, यहूदी विरोधी और पश्चिमी विरोधी भावनाओं को बढ़ावा देने का इतिहास रहा है।
बीएनपी-जमात गठबंधन सरकार के 2001-2006 के शासनकाल के दौरान, बांग्लादेश में एक ब्रिज का निर्माण करवाया था और "सम्मान के निशान" के रूप में उस ब्रिज का नाम 'हिजबुल्लाह' रखा था, जो खुले तौर पर लेबनानी प्रतिरोध समूह, हिजबुल्लाह के लिए अपना समर्थन व्यक्त कर रहा था, जिसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका ने आतंकवादी संगठन के रूप में नामित किया है।
बीएनपी-जमात गठबंधन सरकार में संचार मंत्री रहे सलाहुद्दीन अहमद ने फ्रांसीसी समाचार एजेंसी एएफपी को बताया, कि "लेबनानी प्रतिरोध समूह के प्रति हमारे प्यार के कारण मैंने पुल का नाम हिजबुल्लाह रखा। हिजबुल्लाह एकमात्र समूह है, जो इजराइल से लड़ रहा है, और सम्मान के प्रतीक के रूप में पुल का नाम समूह के नाम पर रखा गया है।
तत्कालीन विदेश मंत्री मोर्शेद खान ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर इसे प्रायोजित करने का आरोप लगाते हुए इज़राइल के कार्यों को "राज्य आतंकवाद" और "धार्मिक आतंकवाद" करार दिया।
बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) और जमात-ए-इस्लामी, यहूदियों और इज़राइल को "दुश्मन" मानते हैं, और "दुनिया के नक्शे से यहूदी राज्य को खत्म करने" का समर्थन करते हैं। साथ ही, वे लेबनानी हिज़्बुल्लाह और फ़िलिस्तीनी हमास को "वैचारिक सहयोगी" के रूप में मान्यता देते हैं।
बावजूद इसके, बाइडेन प्रशासन ने शेख हसीना सरकार पर निष्पक्ष चुनाव नहीं करवाने पर कार्रवाई करने की धमकी दी है।
अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन और अमेरिकी विदेश विभाग के अधिकारी हाल के समय में बीएनपी, जेईआई और हिफज़ात-ए-इस्लाम (एचईआई) सहित इस्लामी समूहों के लिए सक्रिय समर्थन जताया है। ढाका में अमेरिकी राजदूत, पीटर डी. हास को उन व्यक्तियों के साथ मिलते हुए देखा गया है, जो अमेरिकी झंडे जलाते हैं।
लिहाजा, ये चुनाव तय करेगा, कि बांग्लादेश एक बार फिर से उसी कट्टरवादी इस्लामिक शासन को अपनाता है, या फिर शेख हसीना को फिर से चुनता है, जो इन कट्टर विचारधारा को कुचलने के लिए जानी जाती रही हैं।












Click it and Unblock the Notifications