अमेरिका के सेकंड हैंड F-16 ने चीनी JF-17 का किया 'शिकार', 5th जेनरेशन जेट के नाम पर मचा रहा था भौकाल
Chinese JF-17 vs F-16 Fighter: अर्जेंटीना ने चीन को बहुत बड़ा झटका देते हुए अमेरिकी मूल का सेकंड हैंड एफ-16 फाइटर जेट खरीदने का फैसला किया और रिपोर्ट है, कि उसने चीन के फिफ्थ जेनरेशन फाइटर जेट जेएफ-17 थंडर ब्लॉक-III की खरीद को खारिज कर दिया है।
जेएफ-17 थंडर ब्लॉक-III डील का फेल होना अफ्रीकी देशों में मिला चीन को बहुत बड़ा झटका है, क्योंकि अफ्रीकी देशों में डिफेंस कारोबार फैलाने के लिए अमेरिका के साथ साथ चीन और भारत जैसे देश भी लगातार कोशिश कर रहे हैं और अर्जेंटीना ने डेनमार्क से अमेरिकी सेकंड हैंड एफ-16 फाइटर खरीदने का फैसला किया है।

अमेरिका के लिए चीनी सौदे का फेल हो जाना सुकून भरी खबर है, क्योंकि अमेरिका हरगिज नहीं चाह रहा था, कि चीनी फाइटर जेट्स उसके बैकयार्ड में उड़ान भरे, जबकि बीजिंग भी विकासशील और वैश्विक दक्षिण देशों को सैन्य बिक्री हासिल करके खुद को पश्चिमी देशों के महंगे हथियारों के विकल्प के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा था और अपनी एयरस्पेस टेक्नोलॉजी को साबित करना चाहता था।
अर्जेंटीना में चीन को जबरदस्त झटका
अर्जेंटीना में चीन को लगे इस जबरदस्त झटके की रिपोर्ट डिफेंस प्लेटफॉर्म सोशल मीडिया यूजर माइली शेल्बी ने दी है और उन्होंने कहा है, कि अमेरिका के सेकंड हैंड फाइटर जेट को खुद अर्जेंटीना के राष्ट्रपति ने पसंद किया है। हालांकि, अर्जेंटीना के अधिकारियों ने इस रिपोर्ट पर फिलहाल ज्यादा जानकारी नहीं दी है और कहा है, कि पूरी जानकारी अप्रैल महीने के अंत तक जारी की जाएगी, लेकिन उन्होंने रिपोर्ट को खारिज भी नहीं किया है।
इससे पहले इस सौदे के बारे को लेकर तभी डील पक्की होने की उम्मीद बन गई थी, जब अमेरिका ने अक्टूबर 2023 में डेनमार्क को 24 एफ-16 फाइटर जेट अर्जेंटीना को बेचने की इजाजत दे थी और इतना ही नहीं, अर्जेंटीना के इस डिफेंस डील के लिए अमेरिका ने 40 मिलियन डॉलर का पैकेज भी अर्जेंटीना सरकार को जारी कर दिया था।
अमेरिका के लिए ये सौदा एक महान जियो-पॉलिटिकल ऑपरेशन था, जिसमें वॉशिंगटन का मुकाबला सीधे तौर पर चीन से था, क्योंकि अर्जेंटीना की पूर्व वामपंथी सरकार को चीन अपने जेएफ-17 फाइटर जेट खरीदने के लिए करीब करीब राजी कर चुका था।
अर्जेंटीना के नए राष्ट्रपति जेवियर माइली ने नवंबर 2023 में ही संकेत दे दिया था, कि वह अमेरिकी फाइटर जेट खरीदने के पक्ष में हैं। इतना ही नहीं, राष्ट्रपति बनने के बाद जेवियर माइली ने चीन के खिलाफ काफी कड़ी बयानबाजी की है, जिससे दोनों देशों के संबंध तनावपूर्ण हो गये हैं।
इसके अलावा, राष्ट्रपति जेवियर माइली के मुख्य विदेशी मामलों के सलाहकार, डायना मोंडिनो ने ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका सहित प्रमुख उभरते बाजारों के सहयोग के प्रति अर्जेंटीना के रुख में बदलाव की घोषणा भी की।

चीन के साथ अर्जेंटीना के आर्थिक संबंध महत्वपूर्ण रहे है और पूर्वी वामपंथी सरकार के दौरान अर्जेटीना में चीनी घुसपैठ काफी बढ़ चुकी थी। चीन, अर्जेंटीना के दूसरे सबसे बड़े व्यापारिक भागीदार और कृषि उत्पादों के लिए प्राथमिक निर्यात बाजार के रूप में रैंकिंग में है। साल 2008 के बाद से अर्जेंटीना की पूर्व वामपंथी सरकार ने चीन से 9 बार अलग अलग ऋण कॉन्ट्रैक्ट किए हैं और 8.1 अरब डॉलर का कर्ज लिया है। इसके अलावा, अर्जेंटीना के ज्यादातर डेवलपमेंटल प्रोजेक्ट्स में चीनी विकास बैक और निर्यात-आयात बैंक ऑफ चाइना का पैसा लगा हुआ है।
लेकिन, चीनी कर्ज ने देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर दिया है और देश में महंगाई दर 50 प्रतिशत से ज्यादा है। अर्जेंटीना IMF प्रोग्राम के सहारे चल रहा है और अर्जेटीना की करेंसी ध्वस्त हो चुकी है। जिसे ठीक करने के लिए अब नये राष्ट्रपति ने अर्जेटीना की करेंसी को डॉलर से बदलने का फैसला किया है। नई सरकार ने कई सख्त आर्थिक फैसले लिए हैं, ताकि देश की अर्थव्यवस्था ठीक की जाए।
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