Arab Nato: कतर हमले के बाद साथ आएंगे 57 मुस्लिम देश? इजरायल के खिलाफ बना रहा 'अरब नाटो'!
Arab Nato: दोहा में हुए इजरायली हमलों के बाद अरब और इस्लामिक देशों के बीच नाटो (NATO) जैसा सैन्य गठबंधन बनाने की चर्चा फिर से तेज हो गई है। इस हमले में हमास के कई शीर्ष नेता मारे गए, जिसके बाद अरब देशों में गुस्सा है और वे क्षेत्र की सुरक्षा को लेकर गंभीर हो गए हैं।
क्या थी दोहा की इमरजेंसी समिट?
दोहा में आयोजित आपातकालीन शिखर सम्मेलन में अरब और इस्लामिक देशों के शीर्ष नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजश्कियान, इराक़ के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया-अल सूदानी और फ़लस्तीन प्राधिकरण के राष्ट्रपति महमूद अब्बास भी मौजूद रहे। इस दौरान क्षेत्रीय सुरक्षा, इजरायल के हालिया हमलों और भविष्य की रणनीति पर चर्चा हुई।

मुस्लिम देश हो रहे इकठ्ठे
मिस्र ने इस बैठक में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखा - नाटो की तर्ज़ पर एक संयुक्त अरब सैन्य बल का गठन। मिस्र का सुझाव है कि इस बल की अध्यक्षता अरब लीग के 22 सदस्य देश बारी-बारी से करेंगे और इसकी शुरुआत मिस्र से होगी। प्रस्ताव में कहा गया है कि यह बल सेना, वायुसेना और विशेष कमांडो यूनिटों के बीच तालमेल स्थापित करेगा। इसके अलावा, प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक्स और सैन्य प्रणालियों को एकीकृत किया जाएगा।
20 हजार सैनिक देगा मिस्र
लेबनान के मीडिया आउटलेट 'अल अख़बार' की रिपोर्ट के अनुसार, मिस्र इस गठबंधन में 20,000 सैनिकों का योगदान देने को तैयार है। सहयोग के मामले में सऊदी अरब को दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बताया जा रहा है।
इजरायल से घबरा रहा तुर्किए
दोहा हमले के बाद तुर्किए ने भी अपनी चिंता जताई। तुर्किए के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता रियर एडमिरल ज़ेकी अक्तुर्क ने कहा कि इजरायल के अंधाधुंध हमले पूरे क्षेत्र को तबाह कर सकते हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर ऐसी कार्रवाइयां जारी रहीं तो पूरा क्षेत्र संघर्ष में झोंक दिया जाएगा।
इराक और सामूहिक जवाब की पैरवी
इराक़ के प्रधानमंत्री मोहम्मद शिया-अल सूदानी ने 'इस्लामिक सैन्य गठबंधन' बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि ग़ज़ा और क़तर में इजरायल के हालिया हमलों का सामूहिक जवाब देना ज़रूरी है। उन्होंने दोहा हमले को अंतर्राष्ट्रीय क़ानून का खुला उल्लंघन बताया और कहा कि मुस्लिम देशों को राजनीतिक, सुरक्षा और आर्थिक मोर्चे पर एकजुट होना चाहिए।
क़तर का सख्त रुख
क़तर ने इस हमले पर पहले ही तीखी प्रतिक्रिया दी थी। क़तर के प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतर्राष्ट्रीय समुदाय को दोहरे मापदंड खत्म कर इजरायल को उसके अपराधों के लिए सज़ा देनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि फ़लस्तीनियों को उनकी भूमि से खदेड़ने की इजरायल की योजना कभी सफल नहीं होगी।
क्या बन पाएगा 'अरब नाटो'?
विशेषज्ञ मानते हैं कि अरब देशों में नाटो जैसा सैन्य गठबंधन बनाना आसान नहीं है। जामिया मिल्लिया इस्लामिया के प्रोफेसर प्रेमानंद मिश्रा के मुताबिक, पहले भी ऐसा प्रयास किया गया था लेकिन सभी देशों के सुरक्षा हित अलग-अलग होने के कारण बात आगे नहीं बढ़ सकी। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सऊदी अरब और ईरान अपने मतभेद भुलाकर एक साथ आ पाएंगे।
पाकिस्तान ने फैलाया रायता
एक्सपर्ट्स कहना है कि अरब देशों के पास पहले से ही कई संगठन हैं, जैसे अरब लीग, ओआईसी और जीसीसी। इसके बावजूद, वास्तविक चुनौती अरब देशों के आपसी मतभेद हैं। उनका मानना है कि किसी भी गठबंधन के लिए इजरायल को नज़रअंदाज़ करना मुश्किल होगा। एक तरफ पाकिस्तान खुद को रहनुमा बताता है तो अरब तीर्थ की महत्ता बताकर खुद को खलीफा घोषित करने में लगा रहता है। इसी खींचतान की वजह से यह आजतक संभव नहीं हुआ।
कठिन है राह पनघट की
हालांकि मिस्र का प्रस्ताव क्षेत्र में एक नई सैन्य शक्ति संतुलन की दिशा में अहम कदम हो सकता है, लेकिन इसे अमल में लाना आसान नहीं है। पश्चिमी देशों, ख़ासकर अमेरिका और नाटो की भूमिका भी महत्वपूर्ण रहेगी। देखना होगा कि क्या अरब देश मिलकर एकजुट होकर इस योजना को आगे बढ़ा पाते हैं या यह प्रस्ताव भी पहले की तरह अधूरा रह जाएगा।
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