इजराइल के खिलाफ 'चतुर सियार' बन रहा है ईरान! जानिए गाजा में लोगों को मरवाकर क्या करना चाहता है हासिल?
Iran on Israel-Hamas War: ईरान ने इज़राइल को चेतावनी दी है, कि अगर उसने गाजा पट्टी पर बमबारी बंद नहीं की, तो उसे "कई मोर्चों" पर गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।
इस चेतावनी को व्यापक रूप से ईरान द्वारा अपने सहयोगियों और प्रॉक्सी आतंकवादी संगठनों के जरिए संघर्ष में प्रवेश करने के इरादे की घोषणा के रूप में समझा जा रहा है। हिज्बुल्लाह आतंकवादी समूह, जो पहले से ही लेबनान के साथ इजरायली सीमा पर झड़पों में लगा हुआ है, वो और उसके अलावा सीरिया में असद शासन, दोनों ईरान के साथ मजबूती के साथ खड़े हैं।
ईरान की बढ़ती खतरनाक बयानबाजी को देखते हुए, वाशिंगटन और तेल अवीव इस बात पर विचार-विमर्श कर रहे हैं, कि अगर तेहरान युद्ध में शामिल होता है, या अपने प्रॉक्सी संगठनों को युद्ध में शामिल होने का आदेश देता है, तो फिर ईरान को कैसे जवाब दिया जा सकता है?

ईरान पर इज़राइल की स्थिति समझौताहीन रही है, यानि ईरान को लेकर इजराइल ने कोई समझौता नहीं किया है। अतीत में, इसने ईरानी परमाणु सुविधाओं पर सर्जिकल स्ट्राइक्स की वकालत की है और इजराइल के ऊपर, ईरानी परमाणु वैज्ञानिकों की हत्या के भी आरोप लगे हैं।
लेकिन, गाजा युद्ध में ईरान के संभावित प्रवेश से दोनों दुश्मनों के बीच शत्रुता में एक नया अध्याय खुल गया है और अब ये युद्ध, सीधे ईरान के दरवाजे पर पहुंचने की आशंका बन गई है।
लेकिन, सवाल ये उठ रहे हैं, कि क्या वाकई ईरान, इजराइल के खिलाफ युद्ध में शामिल होगा, या फिर वो चतुर सियार बनकर युद्ध को भड़काकर फायदा उठाएगा?
सैन्य और राजनीतिक प्रभाव
इजराइल को सीधी चेतावनी देन के बावजूद, ईरान कठोर इज़राइली प्रतिक्रिया के डर से सीधे संघर्ष में प्रवेश करने से डर रहा है। ईरान जानता है, कि अगर इजराइल हमला करेगा, तो वो वो हमसा कैसा होगा!
लिहाजा, ईरान अपनी वैचारिक बयानबाजी और राजनीतिक गेम के बीच, एक कठिन संतुलन बनाकर चल रहा है, लेकिन एक्सपर्ट्स का कहना है, कि फिर भी ईरान आग से खेल रहा है। यह जिस संतुलन को बनाए रखना चाहता है, वह युद्ध के अप्रत्याशित कोहरे में आसानी से बाधित हो सकता है।
तेहरान की आधिकारिक लाइन अतिवादी है। वह इज़राइल को अस्तित्व के अधिकार को नकारता है और इजराइल को वो एक राज्य के रूप में नहीं, बल्कि एक ज़ायोनी इकाई के रूप में संदर्भित करता है। ईरान की आधिकारिक घोषणाएं इसराइल विरोधी बयानों से भरी पड़ी हैं।
जून में, तेहरान ने अपनी नई मिसाइल का अनावरण किया और दावा किया है, कि इसकी सीमा इज़राइल तक पहुंचने की है। मिसाइल की घोषणा करने वाले बैनरों पर फ़ारसी, हिब्रू और अरबी में "तेल अवीव के लिए 400 सेकंड" शब्द छपे हुए थे।

यह संदेश ईरान की सत्तारूढ़ शासन की विचारधारा का अभिन्न अंग है और उसके समर्थकों को उत्साहित करने वाले हैं।
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई और राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के तहत ईरान पर शासन करने वाले कट्टरपंथी गुट ने हमेशा से इजरायल विरोधी और अमेरिका विरोधी जहर उगला है, लिहाजा अब ईरान का कट्टरपंथी खेमा, ईरान सरकार से इजरायल को नष्ट करने के वादे पर अमल करने का आह्वान कर रहा है। सुप्रीम लीडर खामेनेई के मुखपत्र कहे जाने वाले कायहान डेली के प्रधान संपादक ने इजराइल के खिलाफ युद्ध की आधिकारिक घोषणा का आह्वान किया है।
लेकिन, ईरान के अधिकारी सुसाइड मिशन में नहीं जाना चाहते हैं। वे बहुत अच्छी तरह से जानते हैं, कि इज़राइल के साथ खुला टकराव, या उसके किसी प्रॉक्सी का इजराइल के साथ टकराव, उसके लिए बहुत महंगा साबित हो सकता है। टकराव की स्थिति में, इजराइल ना सिर्फ उसके प्रॉक्सी के ठिकानों पर, बल्कि ईरान के सैन्य सुविधा केन्द्रों पर भी हमले शुरू कर सकता है।
और पहसे से ही आर्थिक दुर्दशा में फंसा ईरान, किसी युद्ध को बर्दाश्त नहीं कर सकता है और युद्ध की स्थिति ईरान के इस्लामिक शासन की जड़े भी उखाड़ सकता है।

लेकिन, ईरानी जनता इजराइल के खिलाफ अपनी सरकार के वैचारिक उत्साह से निराश है और इसे भ्रष्टाचार, आर्थिक संकट और अपने नागरिकों को राहत प्रदान करने में सरकार की अक्षमता को छिपाने की एक चाल के रूप में देखती है।
महसा अमिनी की हत्या के बाद पूरे ईरान में व्यापक विरोध प्रदर्शनों ने पिछले साल इस्लामिक शासन के खिलाफ बढ़ती नाराजगी और गुस्से को सार्वजनिक कर दिया है। इसे देखते हुए, इज़राइल के साथ सैन्य टकराव के ईरान की इस्लामिक शासन के लिए अप्रत्याशित राजनीतिक परिणाम ला सकते हैं, लिहाजा वो भड़काऊ भाषण तो दे रहा है, लेकिन लड़ाई की आग लगवाकर खुद पीछे से हल्ला मचा रहा है।
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