ईरान-पाकिस्तान ट्रेड डील से बौखलाया अमेरिका, प्रतिबंध लगाने की धमकी.. कब तक टिकेगा शहबाज का वादा?

US On Iran-Pakistan: ईरान के राष्ट्रपति का तीन दिनों का पाकिस्तान दौरा खत्म हो गया है और वो वापस तेहरान लौट गये हैं, लेकिन ईरानी राष्ट्रपति के पाकिस्तान दौरे के दौरान हुए समझौतों को लेकर अमेरिका ने पाकिस्तान को सख्त चेतावनी दी है।

संयुक्त राज्य अमेरिका ने मंगलवार को पाकिस्तान को ईरान के साथ किसी भी व्यापारिक समझौते पर विचार करने पर बड़े पैमाने पर प्रतिबंध लगाने की चेतावनी दी है। अमेरिकी विदेश विभाग के उप प्रवक्ता वेदांत पटेल ने कहा, "मुझे मोटे तौर पर यह कहने दीजिए, कि हम ईरान के साथ व्यापारिक सौदों पर विचार करने वाले किसी भी व्यक्ति को प्रतिबंधों के संभावित जोखिम के बारे में जागरूक रहने की सलाह देते हैं।"

US warns sanctions on pakistan

पाकिस्तान को अमेरिका की चेतावनी

दरअसल, ईरान के राष्ट्रपति का तीन दिनों का पाकिस्तान दौरा आज ही खत्म हुआ है और इस दौरान उन्होंने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी के साथ कई राजनेताओं से मुलाकात की है।

पाकिस्तानी नेताओं के साथ बैठक के दौरान, ईरानी राष्ट्रपति रायसी ने ईरान और पाकिस्तान के बीच मौजूदा व्यापार मात्रा पर नाराजगी जताई है।

प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से मुलाकात के दौरान दोनों नेताओं ने, दोनों देशों के बीच व्यापार की मात्रा बढ़ाकर 10 अरब डॉलर करने पर सहमति जताई। रायसी ने जोर देकर कहा, कि मौजूदा मात्रा "स्वीकार्य नहीं" है। डॉन ने रायसी के हवाले से कहा है, कि "हम उच्च स्तर पर संबंधों को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। ईरान और पाकिस्तान के बीच आर्थिक और व्यापार की मात्रा स्वीकार्य नहीं है। हमने अपने दोनों देशों के बीच व्यापार की मात्रा को 10 अरब डॉलर तक बढ़ाने के लिए पहले कदम के रूप में फैसला लिया है।"

अमेरिका ने पाकिस्तान को क्यों चेतावनी दी?

पाकिस्तान और ईरान के बीच संभावित व्यापार पर सवाल का जवाब देते हुए, पेंटागन ने कहा है, कि "ईरान के साथ व्यापार समझौते पर विचार करने वाले किसी भी व्यक्ति को संयुक्त राज्य अमेरिका से प्रतिबंधों के संभावित जोखिम के बारे में पता होना चाहिए"। हालांकि, अमेरिकी अधिकारी ने ये भी कहा, "लेकिन, अंत में पाकिस्तान सरकार अपनी विदेश नीति के बारे में बात कर सकती है।"

आपको बता दें, कि अमेरिका ने 1979 में तेहरान के परमाणु कार्यक्रम के जवाब में उस पर कई प्रतिबंध लगाए थे। इसके अलावा, पेंटागन ने ईरान को हिजबुल्लाह, हमास और फिलिस्तीन इस्लामिक जिहाद के समर्थन के लिए भी दंडित किया, जिन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवादी संगठन मानता है।

लेकिन, ईरान और पाकिस्तान ने जून 2009 में गैस पाइपलाइन बनाने के लिए अरबों डॉलर के समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। जिसके बाद ईरान ने साल 2011 तक अपनी तरफ से 900 किलोमीटर लंबी पाइपलाइन बिछाने का काम पूरा कर लिया, लेकिन पाकिस्तान ने अमेरिकी प्रतिबंधों की डर से अभी तक पाइपलाइन प्रोजेक्ट पर काम भी शुरू नहीं किया है। पाकिस्तान को 80 किलोमीटर पाइपलाइन बिछानी है।

पाकिस्तान इस पाइपलाइन प्रोजेक्ट की डेडलाइन का उल्लंघन कर चुका है, जिसके जवाब में साल 2021 में ईरान ने पाकिस्तान को इंटरनेशनल कोर्ट में घसीटने की चेतावनी दी थी। अगर पाकिस्तान प्रोजेक्ट पूरा नहीं कर सकता है, को उसे 18 अरब डॉलर का जुर्माना भरना पड़ सकता है और ईरान जुर्माना भरने की चेतावनी भी पाकिस्तान को दे चुका है, लिहाजा अब अमेरिका और ईरान के बीच पाकिस्तान फंस गया है।

18 अरब डॉलर के जुर्माना से बचने के लिए पाकिस्तान ने इस साल सितंबर तक गैस पाइपलाइन प्रोजेक्ट को पूरा करने का वादा किया है, लेकिन इस बात की संभावना नहीं के बराबर है, कि पाकिस्तान प्रोजेक्ट का काम पूरा करेगा। पाकिस्तान कई बार ईरान के सामने अमेरिकी प्रतिबंधों का जिक्र कर चुका है।

लेकिन, इस बार ईरानी राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी के दौरे के दौरान पाकिस्तान ने ये दिखाने की कोशिश की है, कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र है और वो अमेरिका की धमकियों की परवाह नहीं करता है। लेकिन, एक्सपर्ट्स का मानना है, कि इस चेतावनी के बाद ही पाकिस्तान फौरन अमेरिका के आगे घुटने टेक देगा।

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पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम को झटका

इस हफ्ते की शुरूआत में अमेरिका ने पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए कंपोनेंट्स की आपूर्ति करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिए थे, जिनमें तीन चीनी कंपनियां भी शामिल थीं।

अमेरिका ने प्रतिबंध लगान के बाद कहा, कि "प्रतिबंध इसलिए लगाए गए, क्योंकि ये ऐसी संस्थाएं थीं, जो सामूहिक विनाश के हथियारों के प्रसारक थीं। ये बेलारूस में पीआरसी (पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना) में स्थित संस्थाएं थीं, और हमने देखा है कि उन्होंने पाकिस्तान के बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम के लिए उपकरणों की आपूर्ति की थी।"

माना जा रहा है, कि ईरानी राष्ट्रपति की यात्रा से ठीक पहले चीनी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाकर अमेरिका ने पाकिस्तान को सावधान कर दिया था, बावजूद पाकिस्तान में इब्राहिम रायसी का भव्य स्वागत किया गया। जो अमेरिका को पसंद नहीं आया है। लिहाजा, सवाल ये उठता है, कि आखिर पाकिस्तान, अब ईरान से कारोबार को लेकर कितना आगे बढ़ पाएगा और अगर नहीं, तो क्या पाकिस्तान 18 अरब डॉलर का जुर्माना दे पाएगा?

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