ताइवान पर आरपार के मूड में अमेरिका, अब दो मिसाइल गाइडेड सैन्य जहाजों को भेजा, पैर पटक रहा चीन
दो अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोत ताइवान जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जल के माध्यम से गुजरे हैं।
ताइपे, 28 अगस्तः दो अमेरिकी नौसेना के दो युद्धपोत ताइवान जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जल के माध्यम से गुजरे हैं। तीन अमेरिकी अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया है कि यूएस हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी की ताइवान यात्रा के बाद अमेरिका के चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद से इस तरह का पहला ऑपरेशन है। जापान में यूएस 7वें फ्लीट ने एक बयान में कहा कि गाइडेड-मिसाइल जहाज यूएसएस एंटियेटम और यूएसएस चांसलर्सविले की यात्रा जारी है और अब तक विदेशी सैन्य बलों द्वारा कोई हस्तक्षेप नहीं किया गया है।
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जहाजों के गुजरने पर चीन जताता है नाराजगी
पेलोसी की यात्रा के विरोध में चीन ने ताइवान को घेरकर सबसे बड़ा सैन्य अभ्यास किया था। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों की नौसेनाएं नियमित रूप से ताइवान जलडमरूमध्य से होकर गुजरी हैं। बीजिंग द्वारा इन तरह की कार्रवाइयों को 'उकसाने वाला' करार दिया जाता रहा है क्योंकि वह ताइवान पर अपना दावा करता है।

नैन्सी पेलोसी की यात्रा से माहौल गरम
नैन्सी पेलोसी की यात्रा ने बीजिंग को नाराज कर दिया और इसे चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने के अमेरिकी प्रयास के रूप में देखा। अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर शनिवार को कहा कि अमेरिकी नौसेना के क्रूजर चांसलरसविले और एंटीएटम ऑपरेशन को अंजाम दे रहे थे जो अभी भी चल रहा था। इस तरह के अभियानों को पूरा होने में आमतौर पर आठ से 12 घंटे लगते हैं और चीनी सेना उन पर कड़ी निगरानी रखती है।

दो गाइडेड मिसाइल कर रहे यात्रा
वॉशिंगटन ने कहा कि दो गाइडेड-मिसाइल क्रूजर, यूएसएस एंटियेटम और यूएसएस चांसलर्सविले, अंतरराष्ट्रीय जल के माध्यम से नेविगेशन की स्वतंत्रता का प्रदर्शन कर रहे हैं। अमेरिकी नौसेना ने एक बयान जारी कर कहा कि ताइवान जलडमरूमध्य के माध्यम से होकर गुजरना 'अमेरिका की एक स्वतंत्र औ खुले इंडो-पैसिफिक के प्रति प्रतिबद्धता' का प्रदर्शन करता है। एक के बाद एक अमेरिकी अधिकारियों और राजनेताओं की ताइवान यात्रा ने चीन और अमेरिका के बीच एक नए सिरे से तनाव को जन्म दिया है।

ताइवान पर चीन जताता है अधिकार
चीन के जनवादी गणराज्य की स्थापना करने वाले कम्युनिस्टों के साथ गृह युद्ध हारने के बाद 1949 में चीन गणराज्य की पराजित सरकार के ताइवान भाग जाने के बाद से संकीर्ण ताइवान जलडमरूमध्य सैन्य तनाव का लगातार स्रोत रहा है। ताइवान को अपने नियंत्रण में लाने के लिए चीन ने कभी भी बल प्रयोग से इंकार नहीं किया है। ताइवान की सरकार का कहना है कि पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना ने कभी भी द्वीप पर शासन नहीं किया है और इसलिए इस पर दावा करने का कोई अधिकार नहीं है, और केवल 23 मिलियन लोग ही अपना भविष्य तय कर सकते हैं।












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