मां-बाप की भारी डिमांड पर इस स्कूल ने बच्चों को पीटना शुरू किया, कैसे-किधर मारेंगे सारा नियम जान लीजिए

अमेरिका के दक्षिण-पश्तचिम मिसौरी के एक स्कूल जिले ने अपने छात्रों को जरूरत पड़ने पर शारीरिक दंड देने के लिए कॉरपोरल पनीसमेंट मतलब दैहिक सजा की नीति अपनायी है।

वाशिंगटन, 26 अगस्तः अमेरिका के दक्षिण-पश्तचिम मिसौरी के एक स्कूल जिले ने अपने छात्रों को जरूरत पड़ने पर शारीरिक दंड देने के लिए कॉरपोरल पनीसमेंट मतलब दैहिक सजा की नीति अपनायी है। स्कूल ने इसे पारिभाषित नहीं किया है कि बच्चों को जरूरत कब पड़ेगी? हालांकि स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों के माता-पिता भी चाहते हैं कि उनके बच्चों सजा देने के लिए सस्पेंड नहीं किया जाए, बल्कि उनकी डंडे से पिटाई की जाए।

बच्चों की पिटाई के दौरान गवाह रहेगा मौजूद

बच्चों की पिटाई के दौरान गवाह रहेगा मौजूद

स्कूल के अधिकारी के मुताबिक स्कूल में पहले की तरह एक बार फिर से बच्चों की पिटाई करने वाला नियम लागू हो चुका है। स्कूल का नाम कैशविले R-IV स्कूल है। स्कूल के नियम में कहा गया है कि इसका इस्तेमाल तब किया जाएगा, जब बच्चों को अनुशासित करने के सभी तरीके फेल हो जाएंगे। स्कूल ने अपने नियम में कहा है कि अन्य छात्रों की मौजूदगी में बच्चों की पिटाई नहीं होगी। हालांकि बच्चों की पिटाई अकेले में भी नहीं की जाएगी बल्कि बच्चों की पिटाई के दौरान वहां एक गवाह मौजूद रहेगा। ताकि पिटने वाले को यह अंदाजा हो कि वह बच्चों को गंभीर चोट नहीं दे सकता। इसके साथ ही बच्चों के पीटे जाने की जगह भी निश्चित कर दी गई है। बच्चों को केवल नितंबों पर बेंत से मारा जा सकता है।

कई सालों से अभिभावक कर रहे थे मांग

कई सालों से अभिभावक कर रहे थे मांग

सुपरिटेंडेंट मर्लिन जॉनसन ने दावा किया कि माता-पिता स्कूल प्रशासन से पूछ रहे थे कि आखिर उनके बच्चों की पिटाई क्यों नहीं हो रही है? मर्लिन ने कहा कि प्रशासन को दशकों पुराने पिटाई के नियम को फिर से लागू करने के लिए कई सारे अनुरोध मिल रहे थे। उन्होंने कहा, 'इसे लेकर अभिभावकों से बात की गई है। वे नए फैसले से बेहद खुश नजर आ रहे हैं। हमें ऐसे लोग भी मिले हैं, जिन्होंने नियम लागू करने पर हमें शुक्रिया कहा है।' हालांकि उन्हीं बच्चों को शारीरिक सजा दी जाएगी जिनके माता-पिता इसके लिए राजी होंगे। इसके लिए उन्हें एक फॉर्म जमा करना होगा और शिक्षक को बच्चों को पीटे जाने से पहले अभिवावकों को सूचित करना होगा।

अभिभावकों का मिल रहा समर्थन

अभिभावकों का मिल रहा समर्थन

स्कूल के नियम के मुताबिक बड़ी उम्र के छात्रों को सजा के तौर पर तीन बार बेंत से पीटा जाएगा, जबकि छोटे बच्चों की सिर्फ एक या दो बार बेंत से पिटाई होगी। नियम में कहा गया है कि शिक्षक, बच्चों की ज्यादा तेज पिटाई नहीं कर पाएंगे, लेकिन इस बात को स्पष्ट नहीं किया गया है कि इसे कैसे मापा जाएगा। इसके साथ ही बच्चों के चेहरे या सिर पर किसी भी हालत में चोट नहीं पहुंचाई जाएगी। सुपरिटेंडेंट मर्लिन जॉनसन ने कहा कि सोशल मीडिया पर कुछ लोग इसका विरोध करेंगे, लेकिन अधिक लोग इसका समर्थन करते हुए नजर आ रहे हैं।

अमेरिका में बच्चों की पिटाई संवैधानिक

अमेरिका में बच्चों की पिटाई संवैधानिक

अमेरिका में न्यू जर्सी पहला ऐसा राज्य था, जहां पर 1867 में बच्चों की पिटाई पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई थी। हालांकि, लगभग 100 साल बाद ये मामला 1977 में सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा, जहां कोर्ट ने 5-4 से कहा कि ये पूरी तरह से संवैधानिक है। हालांकि बच्चों को कैसे सजा देना है, इसका फैसला राज्य खुद करेंगे। यही वजह है कि अमेरिका के 19 राज्यों में शारीरिक रूप से दंड देना वैध है। स्कूलों में बच्चों की होने वाली पिटाई पर नजर रखने वाले शिक्षा विभाग के नागरिक अधिकार कार्यालय ने कहा कि देशभर में 69 हजार से अधिक बच्चों की पिटाई की गई है।

पिटाई नहीं है फायदेमंद

पिटाई नहीं है फायदेमंद

2106 में जारी एक रिपोर्ट के मुताबिक मिसौरी में एक साल में 5 हजार से अधिक छात्रों को स्कूली दंड मिला था। हालांकि इसमें काले बच्चों, विकलांग बच्चों, और लड़कों को अधिक पीटा गया। रिपोर्ट के मुताबिक बच्चों को शारीरिक दंड मिलना फायदेमंद नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक स्पैंकिंग बच्चों के लिए अच्छा है इसका अब तक कोई प्रमाण नहीं मिल पाया है।

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