अमेरिका में रैपिड कोरोना वायरस टेस्ट को मिली मंजूरी, 45 मिनट में चल जाएगा वायरस का पता
वाशिंगटन। दुनियाभर में शनिवार को नोवेल कोरोना वायरस से मरने वालों की संख्या 12 हजार पार कर जाने से चिंता बढ़ गई है। इस बीच अमेरिका में फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने कोरोना वायरस के पहले रैपिड टेस्ट को मंजूरी दे दी है। जिसमें महज 45 मिनट का ही समय लगेगा। इस बात की जानकारी कैलिफोर्निया स्थित मॉलिक्यूलर डायगनॉस्टिक कंपनी सिफाइड ने दी है। ये वही कंपनी है, जो इस टेस्ट की डेवलेपर है।

सिफाइड ने एक बयान जारी कर कहा कि उसे आपातकालीन समय में एफडीए से टेस्ट को लेकर मंजूरी मिल गई है। जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से अस्पतालों में और इमरजेंसी रूम्स में किया जाएगा। कंपनी की योजना अगले हफ्ते से इसे अस्पतालों में भेजने की है। वर्तमान में टेस्ट के लिए नमूनों को एक केंद्रीकृत लैब में भेजा जाता है, जहां परिणाम आने में कई दिन लग जाते हैं। अमेरिका में कोरोना के मरीजों को हर संभव इलाज पहुंचाने के लिए सरकार कई तरह के कदम उठा रही है।
इससे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दो दवाईयों की घोषणा की थी। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, 'हाइड्रोक्जिक्लोरोक्वीन और एजिथ्रोमाइसिन साथ में लिया जाए, इनके पास मेडिसिन के इतिहास में सबसे बड़ा गेम चेंजर बनने का मौका है। एफडीए ने ऊंचाइयों को छुआ है- आपका आभार।' उन्होंने कहा कि दोनों दवाई साथ में अच्छा असर करती हैं। राष्ट्रपति ट्रंप ने आगे लिखा, 'उम्मीद है दोनों को तत्काल इस्तेमाल में लाया जाएगा।'
ट्रंप का दावा है कि दोनों दवाई मेडिसिन के क्षेत्र में गेम चेंजर साबित होंगी। बता दें अमेरिका में भी कोरोना वायरस का कहर बना हुआ है। ताजा आंकड़े देखें, तो यहां अभी तक 340 लोगों की मौत हो गई है। जबकि संक्रमित लोगों की संख्या 26,686 है। वहीं वायरस से ठीक होने वाले मरीजों की संख्या महज 176 है। अगर लोगों की रिपोर्ट में कम समय लगता है तो इससे काफी हद तक बीमारी को काबू पाने में मदद मिलेगी।
इसके अलावा दक्षिण कोरिया की बात करें तो इस देश ने भी कम समय में जांच रिपोर्ट आने के लिए एक किट का निर्माण किया है। जिससे 10 मिनट में कोरोना का टेस्ट हो जाएगा। यह हर सप्ताह तीन लाख किट निर्यात करने पर विचार कर रहा है। गौरतलब है कि दक्षिण कोरिया ने कोरोना को रोकने के लिए ज्यादा से ज्यादा लोगों का कोरोना टेस्ट किया ताकि लोगों में इसका फैलाव न हो। यही कारण है कि इसने अपने देश में कोरोना के मामले पर एक तरह से काबू पा लिया है।












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