Alien News: शनि और बृहस्पति ग्रहों के चंद्रमाओं पर मिल सकते हैं एलियंस, वैज्ञानिकों को मिले अहम सुराग
Alien News: एलियंस वाकई हैं या नहीं, इसको लेकर दुनियाभर के वैज्ञानिक और एक्सपर्ट्स अभी भी अलग अलग तरहों से विश्लेषण करते रहते हैं, लेकिन अभी तक किसी के हाथ में पुख्ता सबूत नहीं लगे हैं, जिससे पता चल सके, कि एलियंस वाकई होते हैं।
लेकिन, अब कुछ एक्सपर्ट्स ने वैज्ञानिक विश्लेषण के आधार पर कहा है, कि सुदूर ग्रहों के दो बर्फीले चंद्रमाओं पर विदेशी जीवन मौजूद हो सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, बृहस्पति और शनि ग्रह के दो चंद्रमाओं पर विशिष्ट नई विशेषताओं की वजह से अब विदेशी जीवन के संभावित स्थल के तौर पर घोषित किया गया है। यानि, संभावना जताई गई है, कि बृहस्पति और शनि ग्रह के चंद्रमाओं पर एलियंस मौजूद हो सकते हैं।

बृहस्पति और शनि की चंद्रमाओं पर एलियंस?
बृहस्पति के पास वाला उपग्रह, जिसे जोवियन कहा जाता है, और शनि के विशाल चंद्रमा टाइटन दोनों में "स्ट्राइक-स्लिप दोष" कहा गया है, जिसका मतलब ये हुआ, कि चंद्रमा की फॉल्ट्स वाल्स क्षैतिज तरीके से "एक-दूसरे से आगे निकल गई हैं।"
ये संभावना इसलिए जताई गई है, क्योंकि पृथ्वी में भी इनमें से एक है, जिसे सैन एंड्रियास भ्रंश कहा जाता है। और मनोआ में हवाई विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों के मुताबिक, अब यह माना गया है, कि जोवियन और टाइटन पर विदेशी जीवन हो सकता है।
यूएच मानोआ स्कूल ऑफ ओशन एंड अर्थ साइंस एंड टेक्नोलॉजी में हवाई इंस्टीट्यूट ऑफ जियोफिजिक्स एंड प्लैनेटोलॉजी के नए अध्ययन के प्रमुख लेखक लिलियन बर्कहार्ड ने कहा, कि "हम बर्फीले चंद्रमाओं पर कतरनी विरूपण (shear deformation) का अध्ययन करने में रुचि रखते हैं, क्योंकि इस प्रकार के फॉल्ट लाइंस कतरनी हीटिंग प्रक्रियाओं के माध्यम से सतह और उपसतह सामग्री के आदान-प्रदान की सुविधा प्रदान कर सकता है, जिससे संभावित रूप से जीवन के उद्भव के लिए अनुकूल वातावरण तैयार हो सकता है।
लिलियन बर्कहार्ड ने कहा, कि "जबकि हमारे पूर्व शोध से संकेत मिलता है, कि टाइटन पर कुछ क्षेत्र वर्तमान में ज्वारीय तनाव के कारण विरूपण से गुजर सकते हैं, सेल्क क्रेटर क्षेत्र को कतरनी फॉल्ट लाइंस के लिए बहुत उच्च छिद्र द्रव दबाव और घर्षण के कम क्रस्टल गुणांक की आवश्यकता होगी, जो असंभव लगता है।"
जब एलियंस लाइफ की बात आती है, तो जोवियन लंबे समय से विशेषज्ञों की गहन जांच का विषय रहा है। 2019 में, जोवियन जेट स्ट्रीम पर घूमते हुए एक रहस्यमय ब्लैक होल ने नासा के सबसे प्रतिभाशाली दिमागों को भी हैरान कर दिया था।

अंतरिक्ष एजेंसी ने ऑनलाइन लिखा है, कि "बृहस्पति पर वह काला धब्बा क्या है? कोई निश्चित नहीं है।"
आगे लिखा गया है, कि "बृहस्पति के चारों तरफ नासा के जूनो उपग्रह के पास होने के दौरान, रोबोटिक अंतरिक्ष यान ने एक असामान्य रूप से काले बादल की छवि को अनौपचारिक रूप से एबिस करार दिया। आसपास के बादलों के पैटर्न से पता चलता है, कि रसातल एक भंवर के केंद्र में है। चूंकि बृहस्पति के वायुमंडल पर अंधेरे विशेषताएं प्रकाश सुविधाओं की तुलना में अधिक गहराई तक फैली हुई हैं, इसलिए रसातल वास्तव में गहरा छेद हो सकता है, लेकिन अधिक सबूत के बिना यह अनुमान ही बना हुआ है।"
रसातल, जिसके बारे में अभी भी माना जाता है कि वह घुमड़ते बादलों और अन्य घूमने वाले तूफान सिस्टम के एक समूह से घिरा हुआ है, जिनमें से कुछ के शीर्ष पर हल्के रंग के, उच्च ऊंचाई वाले बादल हैं। कोई नहीं जानता कि यह क्या है, या वहां पर एलियन जीवन है या नहीं, लेकिन अगले पांच वर्षों में बृहस्पति के इस चंद्रमा पर जांच के लिए मिशन की योजना बनाई गई है।"
लिहाजा, अब जांच के बाद ही पता चल पाएगा, कि बृहस्पति और शनि के उपग्रहों पर एलियंस रहते हैं या नहीं, लेकिन नई स्टडी ने वैज्ञानिकों के मन में एक उत्साह का मौका जरूर दिया है।












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