क्या भारत की वजह से हुई अलास्का वार्ता, डोनाल्ड ट्रंप को पुतिन ने फोन करके जताई 'महामुलाकात' की इच्छा?
Alaska Summit 2025: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच 15-16 अगस्त 2025 की मध्यरात्रि अलास्का में वार्ता सम्पन्न हो गई। वार्ता में रूस-यूक्रेन युद्ध सीजफायर पर कोई सहमति नहीं बनी। इस ऐतिहासिक अलास्का शिखर सम्मेलन 2025 के आयोजन की वजह यूक्रेन के साथ-साथ भारत भी बना है।
अलास्का में ट्रंप-पुतिन की 'महामुलाकात' से कुछ दिन पहले मीडिया से बातचीत में अमेरिका के वित्त मंत्री स्कॉट बेसंट ने कहा था कि अगर अलास्का वार्ता विफल रही तो भारत को भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है, क्योंकि वार्ता बेनतीजा रहने पर अमेरिका द्वारा भारत पर सेकेंडरी या अतिरिक्त शुल्क बढ़ाया जा सकता है। यही नहीं बल्कि वे यूरोपीय संघ से भी अपील करेंगे कि भारत पर सेकंडरी शुल्क लगाया जाए।

भारत पर अमेरिकी शुल्क से रूस वार्ता को राज़ी
वेबसाइट आजतक की एक खबर के अनुसार अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि 'भारत पर आयात शुल्क लगाने के उनके निर्णय की वजह से रूस वार्ता करने को तैयार हुआ। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के मुताबिक, भारत पर शुल्क लगाने के फैसले से रूस दबाव में आया और राष्ट्रपति पुतिन ने सीधे फोन कर मुलाकात की इच्छा जताई। भारत दुनिया में रूस का दूसरा सबसे बड़ा ग्राहक है, जिसे खोने की वजह से रूस बातचीत की टेबल पर आने को मजबूर हुआ है।'
अमेरिका ने भारत पर लगाया 50 प्रतिशत टैरिफ
अमेरिका ने भारत पर दो हिस्सों में कुल 50 प्रतिशत टैरिफ लगाया है। 25 प्रतिशत टैरिफ 7 अगस्त 2025 से प्रभावी हो चुका है। दूसरा 25 प्रतिशत टैरिफ रूस से तेल खरीदने की वजह से पेनल्टी के तौर पर लगाया है। यह 27 अगस्त 2025 से लागू होगा। अलास्का वार्ता के बाद ट्रंप ने कहा कि उन्हें अभी रूसी तेल खरीदने वाले देशों जैसे चीन पर नए टैरिफ लगाने पर विचार करने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन 'दो या तीन सप्ताह में' इस मुद्दे पर फिर से विचार कर सकते हैं।
रूस से तेल खरीदना जारी रखेगा भारत
इधर, अमेरिकी टैरिफ वार पर भारत ने भी अपना रुख साफ कर दिया है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने न केवल ट्रंप टैरिफ को अनुचित बताया और राष्ट्र हितों की रक्षा का संकल्प लिया बल्कि इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन के अध्यक्ष AS साहनी ने कहा कि भारत को रूस से तेल खरीदने से कोई दूसरा देश नहीं रोक सकता। आर्थिक आधार पर रूस से तेल की खरीदारी आगे भी जारी रहेगी।












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