African Union in G20: अफ्रीकन यूनियन को G20 की सदस्यता दिलाने में कैसे मिली कामयाबी, जानिए पूरी कहानी
African Union in G20: भारत की कोशिशों का नतीजा है, कि अफ्रीकन यूनियन आज जी20 का हिस्सा बन गया है और चीन क्रेडिट लेने के लिए हाथ मसल रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज जी20 शिखर सम्मेलन के उद्घाटन भाषण में अफ्रीकन यूनियन को नया सदस्य बनाने की घोषणा की, लिहाजा जानना जरूरी हो जाता है, कि आखिर मोदी सरकार ने अफ्रीकन यूनियन को शामिल करने के लिए जी20 को कैसे मनाया?
दरअसल, इस साल जून में अफ्रीकी संघ को G20 के सदस्य के रूप में शामिल करने का भारत का कदम, अब रंग लाया है। 55 देशों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस समूह को शनिवार को जी20 के नए सदस्य के रूप में शामिल किया गया।

अफ्रीकी यूनियन को कैसे मिली सदस्यता?
अफ्रीकन यूनियन को जी20 में शामिल करने विचार इस साल जून में सामने आया था, जब पीएम मोदी ने G20 नेताओं को पत्र लिखकर इसका प्रस्ताव दिया था, कि अफ्रीकी संघ को "उनके अनुरोध के अनुसार G20 के आगामी दिल्ली शिखर सम्मेलन में पूर्ण सदस्यता दी जाए।"
सूत्रों ने कहा, कि यह विचार इस साल जनवरी में भारत के 'वॉयस ऑफ द ग्लोबल साउथ' शिखर सम्मेलन के बाद सामने आया था, जिसमें अफ्रीकी महाद्वीप के 55 देशों में से अधिकांश ने भाग लिया था।
ये चर्चा इथियोपिया के राष्ट्रपति अदीस अबाबा में आगे बढ़ाई, जहां अफ्रीकी संघ का मुख्यालय है। अब तक G20 में पूरे अफ़्रीकी महाद्वीप से केवल एक ही देश था, दक्षिण अफ़्रीका।
कई अफ्रीकी नेताओं ने तर्क दिया था, कि यूरोप का प्रतिनिधित्व पांच देशों के साथ-साथ यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा किया जाता है, और अफ्रीकी संघ भी यूरोपीय संघ की तरह ही समान प्रतिनिधित्व का हकदार है।
लिहाजा, भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्ताव की बहुत जल्द, अमेरिकी और फ्रांसीसी राष्ट्रपतियों ने उनके समर्थन की पुष्टि की।
अधिकारियों ने कहा, कि यह कदम "न्यायसंगत, निष्पक्ष, अधिक समावेशी और प्रतिनिधि वैश्विक वास्तुकला और शासन" की दिशा में एक "सही कदम" था।
सूत्र ने कहा, कि "भारत की जी20 अध्यक्षता के हिस्से के रूप में, भारत ने विशेष रूप से जी20 एजेंडे में अफ्रीकी देशों की प्राथमिकताओं को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया है।"
यह कदम अफ्रीका के साथ नई दिल्ली के जुड़ाव की तीव्रता का प्रतिबिंब है, जिसे अक्टूबर 2015 में तीसरे भारत-अफ्रीका फोरम शिखर सम्मेलन के लिए 40 से अधिक राष्ट्राध्यक्षों और शासनाध्यक्षों के आने से प्रोत्साहन मिला।
अफ्रीका आउटरीच पहल के तहत, भारत ने मंत्री स्तर पर सभी अफ्रीकी देशों का दौरा किया है। प्रधानमंत्री मोदी खुद पिछले नौ वर्षों में अफ्रीका के कम से कम 10 देशों का दौरा कर चुके हैं।
जबकि, अफ्रीका तक भारत की स्ट्रक्चर्ड पहुंच 2008 में शुरू हुई थी, लेकिन तब तक चीन ने इस मोर्चे को चुरा लिया था, क्योंकि उसने पहली बार 2000 में अफ्रीका में अपनी पहुंच बनाई थी, जब जियांग जेमिन राष्ट्रपति थे।
फोरम ऑन चाइना अफ्रीका कोऑपरेशन (FOCAC) प्रक्रिया तब शुरू हुई, जब उस वर्ष बीजिंग में पहली मंत्रिस्तरीय बैठक आयोजित की गई थी, और तब से अफ्रीकी महाद्वीप में बढ़ते चीनी हितों के प्रदर्शन के रूप में एक लंबा सफर तय किया है।
लेकिन, G20 समूह में अफ्रीकी संघ को शामिल करने के इस कदम के साथ, भारत ने खुद को विकासशील और अविकसित देशों के नेता के रूप में पेश किया है। यह यूएनएससी की स्थायी सदस्यता के लिए भारत की आकांक्षा के अनुरूप भी है, जिसके लिए दिल्ली, अफ्रीका से समर्थन हासिल करने की इच्छुक है, जिसके पास 55 वोट हैं।












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