अफ्रीका में उल्टी पड़ी ड्रैगन की चाल, चीनी कंपनियों के खिलाफ खड़े हुए स्थानीय नागरिक, लटके जिनपिंग

अफ्रीका में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत के बाद से चीनी सुरक्षा सेवाओं का बाजार काफी बढ़ गया है। लेकिन, अब स्थितियां बगदल रही हैं।

China in Africa: दुनिया को लेकर चीन का रवैया कितना खतरनाक है, इसके बारे में धीरे धीरे पूरी दुनिया जानने लगी है, लिहाजा अब ड्रैगन का खेल भी खत्म होने की तरफ बढ़ चला है। चीनी कंपनियों का शोषणकारी रवैया और अफ्रीका में उनका सुरक्षा तंत्र धीरे-धीरे स्थानीय लोगों को उनके खिलाफ ही करने लगा है। जियो पॉलिटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर अफ्रीकी देशों में चीन के खिलाफ स्थानीय नागरिक खड़े होने लगे हैं और चीनी कंपनियों को अब अफ्रीकी देशों में एक स्वतंत्र कंपनी नहीं, बल्कि चीनी सरकार के एक अहम हिस्से के रूप में देखा जाने लगा है।

अफ्रीकी देशों में चीन का विरोध

अफ्रीकी देशों में चीन का विरोध

अफ्रीकी देशों में काम करने वाली चीनी कंपनियों की एक अजीबोगरीब हरकत ये रहती है, कि वो चीन से सुरक्षा उपकरण और मानव संसाधनों का उपयोग करने पर जोर देता है। चीनी कंपनियां काफी कम तादाद में स्थानीय नागरिकों को नौकरी पर रखता है और स्थानीय लोगों को किसी प्रोजेक्ट में बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी जाती है। वहीं, चीनी कंपनियां सिर्फ चीनी एजेंसियों से विभिन्न निर्माण या अन्य परियोजना स्थलों पर कर्मियों और सुरक्षा उपकरणों की नियुक्ति का गठन करता है। कुछ अनुमानों के मुताबिक,चीनी परिचालनों की तीव्र वृद्धि ने अफ्रीका में दस हजार से अधिक चीनी कंपनियों के साथ लगभग दस लाख चीनी नागरिकों की तैनाती की है। केवल चीनी सुरक्षा कंपनियों को समुद्री मार्गों की सुरक्षा करते हुए इन संपत्तियों और नागरिकों की सुरक्षा का जिम्मा सौंपा गया है। ऐसा लगता है कि, इस प्रथा की जड़ें औपनिवेशिक युग में हैं, जब कंपनियां अपनी कॉलोनियों में तैनात करने के लिए निजी सेनाओं का समर्थन करती थीं।

अफ्रीक में अंदर तक पहुंचा चीन

अफ्रीक में अंदर तक पहुंचा चीन

जियो-पॉलिटिक की रिपोर्ट के मुताबिक, अफ्रीका में चीन के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव की शुरुआत के बाद से चीनी सुरक्षा सेवाओं का बाजार काफी बढ़ गया है। अफ्रीका में बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के लॉन्च से पहले अफ्रीका में काम कर रही कई चीनी कंपनियों के बारे में माना जाता था, कि वे सशस्त्र मिलिशिया का इस्तेमाल कर रही थीं। जबकि, ज्यादातर चीनी कंपनियां पारंपरिक सुरक्षा सेवाएं प्रदान करती हैं, उनमें से कई ने खुफिया जानकारी एकत्र करने और संभावित खतरों के खिलाफ निगरानी करने की क्षमता हासिल कर ली है। उनमें से कुछ को सशस्त्र बलों सहित स्थानीय संस्थानों के साथ मिलकर काम करते हुए भी देखा जाता है। हालांकि, उनके बढ़ते दबदबे और स्थानीय समस्याओं में बढ़ते हस्तक्षेप से मेजबान देशों में कई कानून और व्यवस्था की समस्याएं पैदा हो रही हैं। साल 2018 में जाम्बिया में दो चीनी सुरक्षा ठेकेदारों को एक स्थानीय सुरक्षा कंपनी को कथित तौर पर अवैध प्रशिक्षण और वर्दी और सैन्य उपकरण की आपूर्ति करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था।

किन देशों को परेशान कर रहा चीन

किन देशों को परेशान कर रहा चीन

माना जाता है कि तीन देश, कांगो, सूडान और दक्षिण सूडान चीनी एजेंसियों की गतिविधियों के कारण कानून और व्यवस्था के मुद्दों का सामना कर रहे हैं। यह समस्या अन्य देशों में भी फैल सकती है, क्योंकि कई चीनी कंपनियां माली, जिबूती, मिस्र, इथियोपिया, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया में सुरक्षा साझेदारी स्थापित करने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, चीनी सुरक्षा एजेंसियों ने अफ्रीकी देशों में काफी प्रभाव प्राप्त कर लिया है और अपने संस्थानों में कुछ पैठ बना ली है, लेकिन, स्थानीय आबादी के बीच उनकी स्वीकृति अभी भी नहीं हो पाई है। अफ्रीका के लोग चीनियों को शकर की निगाहों से देखते हैं। स्थानीय लोगों का उनका निरंतर शोषण और इन देशों के पर्यावरण और संस्कृति की अवहेलना चीनी निगमों की यात्रा में गंभीर बाधाएं हैं।

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