Adani Group: विदेशी रिश्वतखोरी कानून पर ट्रंप की रोक, अब गौतम अडानी को मिलेगी छूट?
Adani Group: अमेरिकी न्याय विभाग (DoJ) ने भारत के प्रमुख औद्योगिक समूह अडानी ग्रुप पर 250 मिलियन डॉलर (करीब 2,000 करोड़ रुपये) की रिश्वतखोरी से जुड़े मामले में गंभीर आरोप लगाए हैं। इस कार्रवाई ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार, कूटनीति और राजनीति के गलियारों में हलचल मचा दी है।
इस मुद्दे को लेकर अमेरिका के छह सांसदों ने अपनी गंभीर चिंता जताई है। उनका कहना है कि यह कार्रवाई न केवल राजनीति से प्रेरित लगती है, बल्कि इससे भारत-अमेरिका के रणनीतिक संबंधों को भी नुकसान हो सकता है। अमेरिकी सांसदों का मानना है कि जब अमेरिका घरेलू भ्रष्टाचार के मामलों में नरमी बरत रहा है, तो एक भारतीय उद्योगपति को इतना कठोर निशाना क्यों बनाया जा रहा है?

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि अडानी ग्रुप भारत की अर्थव्यवस्था और वैश्विक ऊर्जा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। साथ ही, भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापार और कूटनीतिक संबंध स्थापित करने की कोशिशें भी जारी हैं। ऐसे में, यह मुकदमा कहीं दो देशों के बीच संबंधों में तनाव न बढ़ा दे।
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अमेरिकी सांसदों ने उठाए सवाल
अमेरिकी कांग्रेस के छह सांसदों- लांस गुडेन, पैट फैलन, माइक हरिडोपोलोस, ब्रैंडन गिल, विलियम आर. टिमंस और ब्रायन बैबिन ने इस मामले पर गहरी चिंता जताई है। उन्होंने अमेरिका की अटॉर्नी जनरल पामेला बॉन्डी को पत्र लिखकर इस जांच के औचित्य और समय पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि यह कदम भारत-अमेरिका के कूटनीतिक संबंधों को नुकसान पहुंचा सकता है।
क्या ये राजनीतिक साजिश है?
जो बाइडेन प्रशासन के कार्यकाल में अडानी ग्रुप के खिलाफ यह आरोप राजनीति से प्रेरित लग रहा है। जब अमेरिकी न्याय विभाग ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर एरिक एडम्स के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों को बिना किसी ठोस कारण के खारिज कर दिया, तब अडानी पर कड़ी कार्रवाई करना दोहरी नीति दिखाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि जब घरेलू अमेरिकी नेताओं को सुरक्षा दी जाती है, तो एक भारतीय उद्योगपति पर इतनी कड़ी कार्रवाई क्यों की जा रही है?
भ्रष्टाचार विरोधी कानून में दोहरा मापदंड?
पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने Foreign Corrupt Practices Act (FCPA) के सख्त नियमों को रोकने का आदेश दिया था, ताकि अमेरिकी कंपनियां वैश्विक प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें। ट्रंप ने खुद कहा था कि यह कानून व्यवसाय के लिए नुकसानदायक साबित हो रहा है। जब अमेरिका अपने बिजनेस को वैश्विक स्तर पर फायदा पहुंचाने के लिए कानूनों में ढील दे सकता है, तो भारतीय कंपनियों को कठोर नियमों का सामना क्यों करना पड़ रहा है?
भारत-अमेरिका संबंधों पर असर
विशेषज्ञों का मानना है कि अडानी ग्रुप के खिलाफ यह कार्रवाई भारत और अमेरिका के रिश्तों में खटास ला सकती है। वर्तमान समय में भारत, चीन के प्रभाव को संतुलित करने के लिए अमेरिका का अहम रणनीतिक सहयोगी है। ऐसे में एक प्रमुख भारतीय उद्योगपति को निशाना बनाना अमेरिका की नीति पर सवाल उठाता है।
अमेरिकी सांसदों ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा है कि "इस तरह की कार्रवाई भारत जैसे महत्वपूर्ण साझेदार के साथ रिश्तों को नुकसान पहुंचा सकती है।"
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