2021 में गरीब देशों के 10 में से 9 लोगों को नहीं मिल पाएगी कोविड-19 वैक्सीन
नई दिल्ली। भारत समेत पूरी दुनिया कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप झेल रही है। इस संकट के उबरने और आम जिंदगी में वापस लौटने के लिए दुनयाभर के लोगों को कोरोना वायरस वैक्सीन का इंतजार है। इस बीच हाल ही में एक चौंकाने वाली रिपोर्ट सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक अमीर देश COVID-19 वैक्सीन की खुराक का बड़ी मात्रा में संग्रह कर रहे हैं जिस वजह से गरीब देशों में रहने वाले लोगों को अगले साल तक कोरोना वायरस महामारी से जूझना पड़ सकता है। कहा जा रहा है कि दर्जनों गरीब देशों में 10 में से 9 लोगों को कोरोना वैक्सीन मिलने की संभावना नहीं है।

अमीर देशों की वजह से गरीब देश रह जाएंगे पीछे
गौरतलब है कि कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ कई देश कोविड-19 वैक्सीन पर दिन-रात काम कर रहे हैं, कुछ देशों को इसमें सफलता भी मिली है। पीपुल्स वैक्सीन गठबंधन के मुताबिक अगले साल भी कई देशों में कोरोना का कहर जस का तस बना रहेगा। इसके पीछे का कारण अमीर देशों द्वारा वैक्सीन का संग्रह बताया गया है। ऑक्सफैम, एमनेस्टी इंटरनेशनल, और ग्लोबल जस्टिस नाउ जैसे संगठनों से बना पीपुल्स वैक्सीन गठबंधन ने चेतावनी दी है कि 70 गरीब देशों में 10 में से 9 लोगों को 2021 में भी कोरोना वायरस के खिलाफ टीकाकरण की संभावना नहीं है।

अमीर देशों ने वैक्सीन के 53 प्रतिशत हिस्से को खरीदा
गठबंधन ने कहा कि कई अमीर देशों ने जरूरत से ज्यादा कोविड-19 वैक्सीन की खुराक खरीदी और जमा की है। पीपुल्स वैक्सीन गठबंधन के मुताबिक दुनिया की 14% आबादी प्रतिनिधित्व करने वाले अमीर देशों ने कोरोना वायरस के खिलाफ सबसे कारगर वैक्सीन का 53 प्रतिशत हिस्सा खरीद लिया है। जिसके चलते गरीबों को कोरोना वायरस की दया पर छोड़ दिया गया है। गठबंधन ने आगे कहा कि इस परिस्थिति से निपटने के लिए कोविड-19 वैक्सीन निर्माता कंपनियों को विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से अपनी तकनीक को दूसरे देशों से भी शेयर करना चाहिए।

इन देशों को कोरोना की दया पर छोड़ दिया गया
ऐसा करने से अधिक से अधिक वैक्सीन का उत्पादन किया जा सकेगा। गठबंधन की सलाहकार मोहगा कमल-यानि ने अपने एक बयान में कहा कि देशों के बीच वैक्सीन को जमा करने और सुरक्षित रखने के लिए लड़ाई नहीं होनी चाहिए। दवा कंपनियों को भी इस महामारी काल में अपने प्रॉफिट से पहले लोगों के जीवन और आजीविका को महत्व देना चाहिए। मोहगा कमल-यानि के मुताबिक भूटान, इथियोपिया और हैती सहित दुनिया के 67 देश जो निम्न और निम्न मध्य आय वाले देश हैं, वहां के ज्यादातर लोगों को कोरोना वैक्सीन नहीं मिली है।

2021 तक दुनिया की 18 फीसदी आबादी को ही मिल पाएगी वैक्सीन
मोहगा कमल-यानि ने चिंता जाहिर करते हुए कहा कि ब्रिटेन में कोरोना के गंभीर मरीजों को फाइजर और बायोएनटेक द्वारा विकसित की गई कोरोना वैक्सीन का पहली खुराक दी गई, जबकि कई अन्य गरीब देशों के लोग पीछे रह गए। इसके अलावा ऑक्सफोर्ड और एस्ट्राजेनेका ने पहले ही अपने 64 फीसदी वैक्सीन को विकसित और विकासशील देशों को देने का वादा किया है। जिससे अगले साल यानी 2021 तक सिर्फ दुनिया की 18 फीसदी आबादी को ही वैक्सीन मिल पाएगी।
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