चीन पर चौतरफा हमला: संयुक्त राष्ट्र के सदस्यों ने तिब्बत पर सुनाई जमकर खरी-खोटी, बौखलाया ड्रैगन
तिब्बत, शिनजियांग, हांगकांग और मंगोलिया में मानवाधिकार के उल्लंघन के लिए चीन प्रसिद्ध है और इसको लेकर गंभीर चिंता जताई गई है।
न्यूयॉर्क, सितंबर 28: तिब्बत पर हमला करने के बाद उसे कब्जाने वाले चीन को लेकर संयुक्त राष्ट्र में कड़ी आवाज उठाई गई है और चीन को साफ शब्दों में कहा गया है कि वो तिब्बत में मानवाधिकार का सम्मान करे। जिसके बाद चीन का बुरी तरह से बौखलाना तय है, क्योंकि चीन तिब्बत को एक स्वायत्त क्षेत्र मानता है और तिब्बत में काफी तेजी के साथ उसकी नागरिकता स्थिति में परिवर्तन कर रहा है।

चीन को संयुक्त राष्ट्र में फटकार
केंद्रीय तिब्बत प्रशासन (सीटीए) ने मंगलवार को कहा कि, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद के 48वें सत्र में विश्व निकाय के सदस्य देशों के एक ग्रुप ने कहा है कि चीन को तिब्बत में मानवाधिकार का सम्मान करना चाहिए। इस ग्रुप ने चीन से आह्वान किया है कि वो तिब्बत के लोगों को मानवाधिकार को इज्जत दे। तिब्बत को लेकर 26 सदस्य देशों ने एक साथ आवाज उठाई है और चीन द्वारा तिब्बत के लोगों की प्रताड़ना को लेकर चीन की सख्त आलोचना की है। डेनमार्क, जर्मनी, नीदरलैंड, स्वीडन, स्विटजरलैंड, अमेरिका और यूरोपीय संघ (ईयू) के प्रतिनिधियों ने तिब्बत में चीन द्वारा किए जा रहे मानवाधिकार हनन पर गंभीर चिंता जताई है।

तिब्बत को लेकर चीन की आलोचना
संयुक्त राष्ट्र में 26 देशों के एक ग्रुप ने चीन से तिब्बत, शिनजियांग और हांगकांग में मानवाधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया है। मानवाधिकार की स्थिति पर एक बयान देते हुए संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद से आह्वान किया गया कि वो जल्द जल्द लोगों के मानवाधिकर उल्लंघन पर ध्यान दे। इस दौरान अमेरिका ने आर्थिक शोषण, नस्लवाद और सांस्कृतिक विरासत के विनाश सहित मानवाधिकारों के हनन के लिए चीन की कड़ी निंदा की। आपको बता दें कि, तिब्बत में धार्मिक, भाषाई और सांस्कृतिक परंपराओं पर चीन के गंभीर प्रतिबंधों को लेकर अमेरिका चिंतित रहता है।

चीन पर चौतरफा वार
फ्रांस ने 26 सदस्य देशों की ओर से यूरोपीय संघ की तरफ से भी चीन के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में बयान दिया है, जिसमें चीन से अल्पसंख्यकों से संबंधित व्यक्तियों के अधिकारों सहित मानवाधिकारों का सम्मान करने और उनकी रक्षा करने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय कानून के तहत अपने दायित्वों का पालन करने के लिए कहा गया है। फ्रांस ने विशेष तौर पर तिब्बत, शिनजियांग और मंगोलिया का जिक्र किया है। वहीं, डेनमार्क ने तिब्बत में मानवाधिकारों के उल्लंघन की रिपोर्टों के बारे में अपनी "गहरी चिंता" व्यक्त की है। वहीं, डेनमार्क ने मांग की है कि, संयुक्त राष्ट्र के उच्चायुक्त और स्वतंत्र पर्यवेक्षकों को इन क्षेत्रों में जाना चाहिए और वहां की मानवाधिकार स्थिति को करीब से देखना चाहिए। वहीं, जर्मन प्रतिनिधि ने कहा कि वह तिब्बत में व्यवस्थित मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में "गंभीर रूप से चिंतित" है।

तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता दे चीन
नीदरलैंड ने चीन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन के बारे में गंभीर चिंताओं को जताया है, जिसमें मीडिया की स्वतंत्रता और तिब्बत में धार्मिक स्वतंत्रता पर लगाए गये प्रतिबंधों को फौरन हटाने की मांग की है। वहीं, स्विट्जरलैंड ने चीन द्वारा अल्पसंख्यकों को मनमाने ढंग से हिरासत में रखने की निंदा की है और चीन से तिब्बती लोगों के अधिकारों का सम्मान करने का आह्वान किया है। इसी तरह, स्वीडन के प्रतिनिधि ने तिब्बत सहित अल्पसंख्यकों, मानवाधिकार रक्षकों और मीडिया कर्मियों से संबंधित व्यक्तियों को निशाना बनाकर चीन द्वारा मानवाधिकारों के उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की। ब्रिटेन, फिनलैंड और नॉर्वे के प्रतिनिधियों ने भी चीन द्वारा मानवाधिकारों के व्यवस्थित उल्लंघन पर चिंता व्यक्त की है।
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