2023 में घुटनों पर आई चीन की अर्थव्यवस्था, 2024 में में होगी धाराशाई.. जानिए नये साल में ड्रैगन भविष्य?
Chinese Economy 2024 Prediction: चीन उम्मीद कर रहा था, कि साल 2023 में उसकी अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार आएगा और चीन एक बार फिर से दुनिया की अर्थव्यवस्था की गाड़ी की ड्राइविंग सीट पर बैठ जाएगा, लेकिन चीन की उम्मीदें 2023 में पूरी तरह से धाराशाई हो गईं।
चीन की अर्थव्यवस्था 2023 में उस एक प्वाइंट पर जाकर रूक गई, जहां अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) को ये कहना पड़ा, कि चीन की अर्थव्यवस्खा 'खिंच' रही है। साल 2023 में चीन की अर्थव्यवस्था कई समस्याओं, जैसे उच्च युवा बेरोजगारी, कमजोर खर्च, प्रॉपर्टी क्राइसिस जैसे संकटों में फंस गई।

लिहाजा, अर्थशास्त्रियों का मानना है, कि इन संकटों के बाद भी अगर चीन की इकोनॉमी 5 प्रतिशत के लक्ष्य तक पहुंच जाएगी, तो ये चीन के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। लेकिन, सीएनएन की एक रिपोर्ट में संभावना जताई जा रही है, कि साल 2024 चीन की इकोनॉमी के लिए और भी ज्यादा अशुभ रहने वाली है, जिसका असर चीन के ऊपर दशकों तक पड़ने वाला है।
चीन के लिए अशुभ रहेगा साल नया साल
सेंटर-राइट थिंक टैंक, अमेरिकन एंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ साथी डेरेक सिज़र्स ने कहा, कि "चीनी अर्थव्यवस्था के लिए 2024 की चुनौती ये होगी, कि उसकी जीडीपी में वृद्धि नहीं होने वाली है और यह संभवतः 4.5% से थोड़ी ऊपर तक रहेगी ।" उन्होंने कहा, कि "चुनौती यह होगी, कि चीन के लिए यहां से एकमात्र रास्ता नीचे की तरफ है।"
इकोनॉमिस्ट का मानना है, कि बाजारों में किए जाने वाले बड़े सुधार के बिना, चीन उस जाल में फंस सकता है, जिसे 'मिडिल इनकम ट्रैप' कहा जाता है। उन्होंने इस धारणा का जिक्र करते हुए चेतावनी दी, कि उभरती अर्थव्यवस्थाएं गरीबी से तेजी से बाहर निकलती हैं और हाई इनकम की स्थिति तक पहुंचने से पहले ही फंस जाती हैं।
चीन की अर्थव्यवस्था कैसे बढ़ती गई?
1978 में चीन पहली बार दुनिया के लिए खुला और फिर धीरे धीरे यह पृथ्वी पर सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बन गया। साल 1991 से लेकर 2011 के बीच चीन की इकोनॉमी में सालाना 10.5% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। 2012 के बाद, जब शी जिनपिंग राष्ट्रपति बने, तो फिर चीन की इकोनॉमी का विस्तार धीमा होता चला गया, लेकिन 2021 तक के दशक में, यह अभी भी औसतन 6.7% था।
चीन की जनसंख्या में गिरावट होने के साथ देश का रियल एस्टेट सेक्टर बुरी तरह से गिरा और साल 2022 की दूसरी छमाही के बाद से चीन की इकोनॉमी में गिरावट आना शुरू हो गया।
आईएमएफ ने अनुमान लगाया है, कि साल 2023 में चीन का विकास दर 5.4 प्रतिशत तक पहुंच जाएगी और आईएमएफ ने अनुमान लगाया है, कि कमजोर उत्पादकता से लेकर बढ़ती आबादी तक की बाधाओं के बीच, चीन की इकोनॉमी साल 2028 तक धीरे-धीरे घटकर 3.5% हो जाएगी।
चीन की अर्थव्यवस्था में क्या बदलाव आया है?
चीनी अर्थव्यवस्था, जो चुनौतियों से जूझ रही है, रातोरात इस स्थिति में नहीं पहुंची।
इकोनॉमिस्ट सीज़र्स ने कहा, कि राष्ट्रपति हू जिंताओ के पिछले प्रशासन ने विकास को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक वित्तीय संकट के दौरान 2009 में अर्थव्यवस्था में तरलता भर दी थी। 2012 में सत्ता में आने के बाद शी जिनपिंग की सरकार उधार पर लगाम लगाने में अनिच्छुक थी, जिससे संरचनात्मक समस्याएं पैदा हुईं।
रोडियम ग्रुप में चीन बाजार अनुसंधान के निदेशक लोगन राइट ने सहमति व्यक्त करते हुए कहा, कि "चीन की अर्थव्यवस्था में मंदी संरचनात्मक है, जो पिछले दशक में ऋण और निवेश में अभूतपूर्व विस्तार के अंत के कारण हुई है।"
उन्होंने कहा, देश की वित्तीय प्रणाली पिछले वर्षों की तरह क्रेडिट वृद्धि के समान स्तर उत्पन्न करने में सक्षम नहीं होगी, इसलिए बीजिंग ने अपनी अर्थव्यवस्था के ऊपर से पिछले सालों की तरह उसपर से नियंत्रण खो दिया है।
जिस चीजों ने पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था को बदतर बना दिया, वह है, बीजिंग की सख्त लॉकडाउन नीति। कोविड संकट के दौरान ज़ीरो कोविड पॉलिसी ने चीन के मैन्युफैक्टरिंग सेक्टर को बुरी तरह से प्रभावित किया, लिहाजा चीन की अर्थव्यवस्था में रिकवरी होने के बजाए, वो और गिरती चली गई।
इन नीतियों का नतीजा इस साल मंदी के रूप में देखा जा सकता है। सुस्त घरेलू मांग के कारण 2023 के अधिकांश समय में उपभोक्ता कीमतें कमजोर रही हैं, और देश में महंगाई माइनस में चली गई, जिससे सामानों की कीमतें इतनी ज्यादा गिर गईं, को कंपनियों के लिए अपने प्रोडक्ट्स की कीमतें निकालना भी दूभर हो गया।
क्या चीन का जापान जैसा होगा हाल?
जैसे-जैसे चीन की वृद्धि धीमी हो रही है, कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसकी तुलना जापान से करनी शुरू कर दी है, जिसने 1990 के दशक की शुरुआत में रियल एस्टेट बुलबुला फूटने के बाद स्थिर विकास और अपस्फीति के दो "खोए हुए दशकों" का अनुभव किया है।
लेकिन इकोनॉमिस्ट सीज़र्स का मानना है, कि फिलहाल चीन का हाल ऐसा नहीं होने वाला है, हां, लंबे वक्त में ऐसा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
हालांकि, लंबी अवधि में, सबसे बड़ी आर्थिक समस्या जनसांख्यिकी हो सकती है। पिछले साल, चीन की जनसंख्या गिरकर 1.411 अरब हो गई, जो 1961 के बाद पहली गिरावट है।
क्या शी जिनपिंग कोई नया रास्ता चुन सकते हैं?
चीनी मीडिया ने बताया है, कि सरकार अगले साल का आर्थिक लक्ष्य फिर से लगभग 5% निर्धारित कर सकती है, जो स्वतंत्र पूर्वानुमानों की तुलना में महत्वाकांक्षी लगता है। आधिकारिक लक्ष्य की घोषणा मार्च में की जाएगी, जब चीन अपनी वार्षिक विधायी बैठकें आयोजित करेगा।
लेकिन इन कदमों से संरचनात्मक समस्याओं को ठीक करने में मदद मिलने की संभावना नहीं है।
कैपिटल इकोनॉमिक्स में चाइना इकोनॉमिक्स के प्रमुख जूलियन इवांस-प्रिचर्ड ने कहा, "नीति निर्माताओं का मानना है कि थोड़े से प्रोत्साहन और भावनाओं में बदलाव के साथ, अर्थव्यवस्था मजबूत रास्ते पर वापस आ सकती है।"
उन्होंने कहा कि अधिकारी भी उम्मीद कर रहे हैं कि महत्वाकांक्षी विकास लक्ष्य निर्धारित करने से आत्मविश्वास बढ़ाने में मदद मिल सकती है, लेकिन इसके लिए सबसे बड़ी शर्त ये है, कि चीन को अपने वुल्फ वॉरियर डिप्लोमेसी में बदलाव लाना होगा और अपनी आक्रामकता की आवाज को खामोश रखना होगा।
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