Indore : मरने के बाद भी जी गया प्रदीप, अब सैनिक के शरीर में धड़केगा दिल

इंदौर से ब्रेन डेथ मरीज के शरीर के अलग-अलग अंगों को विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया, जहां मरीज का ह्रदय पुणे के सैनिक अस्पताल भेजा गया, जहां एक सैनिक को यह ह्रदय लगाया जाएगा।

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    जिंदगी बचाने का सार्थक प्रयास,बनाया गया 48वां ग्रीन कॉरीडोर

    प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में अंगदान को लेकर एक बार फिर ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिसमें ब्रेन डेथ व्यक्ति के 5 अंगों को विभिन्न अस्पताल के लिए भेजा गया। धार्मिक नगरी उज्जैन के रहने वाले व्यवसायिक का एक्सीडेंट हो गया था, जिन्हें उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था, लेकिन स्थिति देखते हुए उन्हें इंदौर के अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान डॉक्टरों ने उन्हें ब्रेन डेथ घोषित कर दिया। वहीं इसके बाद अंगदान को लेकर कार्य कर रही संस्था के सदस्यों ने ब्रेन डेथ मरीज के परिजनों को अंगदान के लिए प्रेरित किया। इस आधार पर परिजनों ने प्रदीप के अंग ह्रदय, किडनी, आंखें और लीवर दान करने की सहमति प्रदान की है।

    कुछ इस तरह हुई प्रोसेस

    परिजनों से मिली सहमति के बाद शरीर के अलग-अलग अंगों को विभिन्न अस्पतालों में भेजा गया, जहां मरीज का ह्रदय पुणे के सैनिक अस्पताल भेजा गया, जहां एक सैनिक को यह ह्रदय लगाया जाएगा। इसके लिए पुणे से एक वायुसेना का विमान इंदौर पहुंचा था। वहीं मृतक के परिजनों का मानना है कि, जो अंग दान हुए हैं, उससे हमारा भाई जीवित रहेगा। मृतक की बहन का मानना है कि, हमें खुशी हो रही है कि, हमारे भाई का ह्रदय एक सैनिक को लगाए जा रहा है, जब शव उज्जैन भेजा जा रहा था तो जिला प्रशासन ने उनके शव को गार्ड ऑफ ऑनर दिया, और सर सम्मान उनके शव को उज्जैन भेजा गया। इस दौरान इंदौर के संभागायुक्त डॉ. पवन कुमार शर्मा, मेडिकल हॉस्पिटल के डीन और सांसद संजय लालवानी मौजूद रहे।

    इससे पहले भी हुआ है अंगदान

    इंदौर की रहने वाली महिला को ब्रेन संबंधित उपचार के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन डेथ घोषित किया था, जिसके बाद दो बार हुए परीक्षण के बाद डॉक्टरों ने ब्रेन स्टेम डेथ परीक्षण किया था। वहीं इसके बाद परिजनों की सहमति से अंगदान का निर्णय लिया गया था, जिसके बाद अपोलो अस्पताल चेन्नई को लंग्स, ग्लोबल हॉस्पिटल मुंबई को हाथ, चोइथराम हॉस्पिटल, सीएचएल हॉस्पिटल और मुंबई हॉस्पिटल के मरीजों को लिवर, किडनी दिया गया था। इसके लिए 47 वां ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया था।

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