मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल, 8 हजार डॉक्टर काम बंद; OPD और सर्जरी सेवाएं प्रभावित
मध्य प्रदेश में जूनियर डॉक्टरों की अनिश्चितकालीन हड़ताल ने स्वास्थ्य सेवाओं को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। लंबित स्टाइपेंड संशोधन और एरियर की मांग को लेकर जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन (JDA) के नेतृत्व में प्रदेश के सभी सरकारी मेडिकल कॉलेजों में कार्यरत करीब 8 हजार रेजिडेंट डॉक्टर, सीनियर रेजिडेंट और इंटर्न सोमवार सुबह 9 बजे से हड़ताल पर चले गए हैं।
इस हड़ताल का सबसे ज्यादा असर ओपीडी (आउट पेशेंट डिपार्टमेंट) और रूटीन सर्जरी पर पड़ रहा है, जबकि इमरजेंसी सेवाएं जारी रखने का आश्वासन दिया गया है।

भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में स्त्री रोग विभाग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है। यहां पीपीटीसीटी काउंसलिंग एंड टेस्टिंग सेंटर, फर्टिलिटी क्लिनिक, एएनसी रूम और अन्य संबंधित व्यवस्थाएं ठप हो गई हैं। सामान्यतः सीनियर डॉक्टरों के साथ जूनियर डॉक्टर यहां की जिम्मेदारी संभालते हैं, लेकिन हड़ताल के कारण मरीजों को लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। कई मरीज सुबह से अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन इलाज नहीं हो पा रहा।
एक मरीज अनवर ने बताया, "सुबह से काफी परेशान हूं। पैरों में दर्द है और अन्य बीमारियों के कारण भटक रहा हूं।" वे आगे कुछ कह पाते, तब तक गार्ड ने रोक दिया। इसी तरह अन्य विभागों में भी मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं, लेकिन डॉक्टरों की अनुपस्थिति से जांच और परामर्श रुका हुआ है।
हड़ताल की वजह: अप्रैल 2025 से लंबित स्टाइपेंड संशोधन
JDA के अनुसार, मध्य प्रदेश शासन के 7 जून 2021 के आदेश के मुताबिक सीपीआई (कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स) आधारित स्टाइपेंड संशोधन 1 अप्रैल 2025 से लागू होना था। इस संशोधन से रेजिडेंट डॉक्टरों को बढ़ा हुआ स्टाइपेंड और अप्रैल 2025 से अब तक का एरियर मिलना था। कई बार लिखित निवेदन और मुलाकातों के बावजूद सरकार ने कोई ठोस निर्णय नहीं लिया, जिससे डॉक्टरों में गुस्सा बढ़ता गया।
JDA का साफ कहना है कि जब तक स्टाइपेंड संशोधन लागू नहीं होता और एरियर का भुगतान नहीं किया जाता, तब तक वे ओपीडी सेवाएं नहीं देंगे। ऑपरेशन थिएटर (OT) में भी केवल अति गंभीर (लाइफ-थ्रेटनिंग) मामलों में ही सेवा दी जाएगी। इसका मतलब है कि हर्निया, रोड इंप्लांट, गर्भाशय संबंधी सर्जरी जैसी सामान्य ऑपरेशन टल सकते हैं, जिसका सीधा असर उन मरीजों पर पड़ेगा जो महीनों से इंतजार कर रहे हैं।
प्रदेशभर में प्रभाव
- भोपाल: गांधी मेडिकल कॉलेज, हमीदिया अस्पताल में OPD और रूटीन कार्य ठप। इंदौर, जबलपुर,
- ग्वालियर: सरकारी मेडिकल कॉलेजों में भी हड़ताल का असर, मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों की शरण लेनी पड़ रही है।
- अन्य कॉलेज: रतलाम, रीवा, सागर आदि में भी सेवाएं प्रभावित।
JDA जबलपुर के प्रेसिडेंट डॉ. शुभम शर्मा ने बताया कि उप मुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल से दोपहर में मुलाकात निर्धारित है। इस बैठक के बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी। उन्होंने कहा, "हम शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रख रहे हैं। सरकार अगर जल्द निर्णय लेती है तो हड़ताल खत्म हो सकती है, अन्यथा यह अनिश्चितकालीन रहेगी।"
मरीजों की परेशानी और सरकार का रुख
हड़ताल से आम मरीज सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। कई गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में ही भर्ती किया जा रहा है, लेकिन OPD में आने वाले पुराने मरीजों को निराश होना पड़ रहा है। कुछ मरीजों ने बताया कि वे प्राइवेट क्लिनिक या अस्पताल जा रहे हैं, जहां खर्च बहुत ज्यादा है।
सरकार की ओर से अभी कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग इस मुद्दे पर गंभीरता से विचार कर रहा है। पिछले कुछ वर्षों में भी जूनियर डॉक्टरों की हड़तालें स्टाइपेंड, कार्यस्थिति और अन्य मांगों पर हो चुकी हैं, लेकिन इस बार CPI आधारित संशोधन का मुद्दा पुराना आदेश होने के कारण ज्यादा गंभीर है।
यह हड़ताल मध्य प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था के लिए चुनौती बनी हुई है। अगर मुलाकात सकारात्मक नहीं रही तो आने वाले दिनों में सेवाएं और प्रभावित हो सकती हैं। JDA ने अपील की है कि मरीज इमरजेंसी में ही आएं, जबकि गैर-जरूरी मामलों में थोड़ा इंतजार करें।












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