Indore news: पूर्व पीएम स्व. अटल बिहारी वाजपेई की पुण्यतिथि, BJP कार्यकर्ताओं ने अर्पित की पुष्पांजलि

इंदौर में पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व.श्री अटल बिहारी वाजपेई की पांचवी पुण्यतिथि पर जावरा कंपाउंड स्थित भाजपा कार्यालय पर पार्टी कार्यकर्ताओं ने पुष्पांजलि एवं श्रद्धासुमन अर्पित किए। स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी की पुण्यतिथि के अवसर पर कार्यालय पर कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें विख्यात कवियों ने अटल जी के जीवन पर कविताओं की प्रस्तुति दी।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री तुलसी सिलावट, सांसद शंकर लालवानी, वरिष्ठ भाजपा नेता एवं चुनाव प्रभारी बाबू सिंह रघुवंशी, संभाग प्रभारी राघवेंद्र गौतम, संभाग प्रभारी तेजबहादुर सिंह चौहान,वरिष्ठ नेता प्रमोद टंडन, वरिष्ठ नेता एवं पूर्व विधायक गोपीकृष्ण नेमा सहित बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

Indore

पत्रकार से नेता बने अटल जी

इस अवसर पर वरिष्ठ भाजपा नेता एवं चुनाव प्रभारी बाबू सिंह रघुवंशी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेई जी के जीवन पर प्रकाश डालते हुए बताया कि अटल बिहारी वाजपेयी एक अच्छे पत्रकार भी थे। असल में, अपने शुरुआती दौर में वे और बीजेपी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी दोनों पत्रकार थे। अटल बिहारी राजनीति में कैसे आए इसके पीछे एक प्रेरणादायक कहानी है।अटल बिहारी वाजपेयी ने राजनीतिक विज्ञान में स्नातकोत्तर किया और पत्रकारिता में अपना करियर शुरू किया। उन्होंने राष्ट्रधर्म, पाॅन्चजन्य और वीर अर्जुन जैसे अखबारों-पत्रिकाओं का संपादन किया। वे बचपन से ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ गए थे, और संगठन की विचारधारा के असर से ही उनमें देश के प्रति कुछ करने, सामाजिक कार्य करने की भावना मजबूत हुई। इसके लिए उन्हें पत्रकारिता एक बेहतर रास्ता समझ में आया और वे पत्रकार बन गए।

कुछ इस तरह बने नेता

रघुवंशी बताते हैं की, अटल जी अपने पत्रकारिता जीवन से काफी खुश थे। साल 1953 में भारतीय जनसंघ के नेता डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी कश्मीर को विशेष दर्जा देने का विरोध कर रहे थे। जम्मू-कश्मीर में लागू परमिट सिस्टम को विरोध करने मुखर्जी श्रीनगर चले गए। वे परमिट सिस्टम को तोड़कर श्रीनगर गए थे। इस घटना को कवर करने के लिए पत्रकार के रूप में वाजपेयी वहां थे। अटल जी ने इंटरव्यू में बताया, मुखर्जी को गिरफ्तार कर लिया था, लेकिन मैं वापस आ गया। इस घटना के कुछ दिनों बाद ही डॉ. मुखर्जी की बीमारी के कारण मृत्यु हो गई। इस घटना से वाजपेयी पूरी तरह से हिल गए। इसके बाद उन्होंने राजनीति में आने का निर्णय लिया।

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