योल देश का पहला Cantt Board, जहां खत्म हुई छावनी परिषद प्रथा, Colonial Tag लगा

हिमाचल का योल देश का पहला कैंट बोर्ड होगा, जहां सैन्य क्षेत्र को मिलिट्री स्टेशन और कैंट को नगरपालिका परिषद में शामिल किया जाएगा।

Yale first to end cantt board

Yale first to end cantt board: हिमाचल के कांगड़ा जिले के योल छावनी परिषद ने सोमवार को अपना कैंट बोर्ड का टैग हटा दिया। रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों ने कहा कि छावनी परिषद के निर्माण की पुरानी प्रथा के हटाने और आवासीय क्षेत्र के नगर निकाय में शामिल होने के अपने फायदे हैं। ऐसा होने विकास के कार्य का जिम्मा नगर निकाय का होगा, जबकि सेना सैन्य विकास पर फोकस कर पाएगा।

सोमवार को रक्षा मंत्रालय ने पुष्टि की है कि हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में योल ने सोमवार को छावनी के रूप में अपना टैग हटा दिया। बता दें कि केंद्र छावनी प्रथा खत्म करने के लिए अधिसूचना जारी कर दी है। इस आशय का नोटिफिकेशन 27 अप्रैल, 2023 को सरकार द्वारा प्रकाशित किया गया। जिसके मुताबिक छावनी के भीतर सैन्य क्षेत्र को एक सैन्य स्टेशन में परिवर्तित कर दिया जाएगा और नागरिक क्षेत्र को नगरपालिका में मिला दिया जाएगा।

यह भी पढ़ें: साइबर युद्ध में दुश्मनों की क्षमता को देखते हुए CCOSWs को संचालित करने का फैसला

छावनी परिषद की प्रथा खत्म करने की अधिसूचना के बाद हिमाचल देश का पहला कैंट बोर्ड बना है, जिसने अपना टैग हटाया है। अधिकारियों ने कहा कि सरकार का ये निर्णय काफी लाभकारी सिद्ध होगा। रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा अधिकारी इस कदम की प्रशंसा कर रहे हैं।

एक रक्षा अधिकारी ने कहा, " अब तक नगरपालिका क्षेत्र में रहने वाले लोग ही राज्य सरकार की कल्याणकारी योजनाओं ले रहे थे। लेकिन नए नियम के मुताबिक सैन्य क्षेत्र के निवासी भी नगरपालिका के माध्यम से उन योजनाओं का लाभ उठा पाएंगे। जहां तक ​​सेना का संबंध है, उसे भी अब सैन्य विकास पर ध्यान केंद्रित करने का पूरा अवसर मिलेगा।"

Recommended Video

    CJI DY Chandrachud का फैसला कानून मंत्री Kiren Rijiju का दिल छू गया | Supreme Court | वनइंडिया हिंदी

    योल से कैंट बोर्ड का टैग हटने के बाद रक्षा अधिकारियों ने कहा, "छावनियों को हटाने का यह पहला कदम है, जिसका सभी ने स्वागत किया है। छावनियों को नगरपालिका माना जाता है और नगरपालिका चलाना राज्य का विषय है।"

    रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा छावनियों के नागरिक क्षेत्रों के विकास पर खर्च किया जा था। इसके अलावा छावनी में सिविल एरिया के विकास की वजह से A1 डिफेंस लैंड पर भी दबाव बना हुआ था। आजादी के समय 56 छावनियां थीं। 1947 के बाद 6 और कैंट बोर्ड बनाए गए। सबसे बाद में बना कैंट बोर्ड अजमेर है।

    यह भी पढ़ें: Indian Army की आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार शामिल हुईं 5 महिला अधिकारी, दुश्‍मनों पर बरसाएंगी तोप के गोले

    Notifications
    Settings
    Clear Notifications
    Notifications
    Use the toggle to switch on notifications
    • Block for 8 hours
    • Block for 12 hours
    • Block for 24 hours
    • Don't block
    Gender
    Select your Gender
    • Male
    • Female
    • Others
    Age
    Select your Age Range
    • Under 18
    • 18 to 25
    • 26 to 35
    • 36 to 45
    • 45 to 55
    • 55+