Indian Army: साइबर युद्ध में दुश्मनों की क्षमता को देखते हुए CCOSWs को संचालित करने का फैसला
भारतीय सेना दुश्मनों की तैयारी देखकर खुद को साइबर युद्ध के लिए तैयार कर रही है। इसके लिए कमांड साइबर फॉर्मेशन एंड सपोर्ट विंग्स को फिर से चालू किया जा रहा है.।

साइबर युद्ध में दुश्मनों की क्षमता और परंपरागत युद्ध क लिए ग्रेजोन की आवश्यकताओं को देखते हुए आर्मी के कमांडरों के कॉन्फ्रेंस में कमांड साइबर फॉर्मेशन एंड सपोर्ट विंग्स को संचिलात करने का फैसला किया गया है। CCOSWs को अभी भी तैयार किया जा रहा है। लेकिन, दुनिया भर में जो हालात बन रहे है, उसे देखते हुए इस तरह का निर्णय लिया गया है।
साइबर सुरक्षा के विषयों में सहायता देगा
भारतीय सेना के आधिकारिक सूत्रों की ओर से यह खबर दी गई गै। कमांड साइबर फॉर्मेशन एंड सपोर्ट विंग्स साइबर सिक्योरिटी से जुड़े विषयों में सहायता देगा। इससे भारतीय सेना की साइबर सुरक्षा और मजबतू होगी और उसकी ताकत बढ़ाने में और मदद मिलेगी।
इस तरह से भारतीय सेना ने अपने नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए एक पूर्ण रूप से जिम्मेदारी साइबर ऑपरेशन सेल को सुनिश्चित किया है।
जवानों के कल्याण की दिशा में भी कदम
सेना के कमांडरों के कॉन्फ्रंस में यह भी तय किया गया कि जवानों के कल्याण के लिए और मुश्किल हालातों की वजह से जिन जवानों की शहादत हुई है, उनके दिव्यांग बच्चों के कल्याण के लिए भी कार्य किए जाएं। सैन्य अधिकारी के मुताबिक ऐसे बच्चों का भत्ता दोगुना किया जाएगा।
पिछले हफ्ते हुई थी कमांडरों की कांफ्रेंस
सेना में उन्नत तकनीकों जैसे कि मिनी, टैक्टिकल, स्वार्म और लॉजिस्टिक ड्रोन, एंटी-ड्रोन उपकरण आदि के शामिल किए जाने की वजह से आर्मी के कमांडरों ने फैसला किया है कि इनके प्रमुख डायरेक्टरों को नामांकिति किया जाए। इसकी वजह से फोर्स को अपनी ताकत बढ़ाने में मदद मिलेगी। सैन्य कमांडरों का यह कॉन्फ्रेंस पिछले हफ्ते 17 अप्रैल को किया गया था।
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अत्याधुनिकता बढ़ने के साथ-साथ नेटवर्क से जुड़ाव भी बढ़ता जा रहा है। इसलिए आवश्यक है कि सैन्य नेटवर्क पूरी तरह से सुरक्षित हो और अपनी ही टीम के हाथों में हो। भारतीय सेना में अभी बहुत ही अत्याधुनिक उपकरण शामिल किए जा रहे हैं। जिसमें कई तरह के ड्रोन, इलेक्ट्रोनिक वारफेयर और एंटी-ड्रोन उपकरणों की भरपार है। ऐसे में नेटवर्क की पुख्ता सुरक्षा समय की मांग है।
In view of expansion of cyber warfare capabilities of adversaries & requirements of greyzone as well as conventional warfare, Army Commanders’ Conference decided to operationalise the Command Cyber Operations and Support Wings (CCOSWs) which are being raised. These organisations… pic.twitter.com/1ZVeOM0xhq
— ANI (@ANI) April 27, 2023












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