Indian Army की आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार शामिल हुईं 5 महिला अधिकारी, दुश्मनों पर बरसाएंगी तोप के गोले
Indian Army की आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार शामिल पांच महिला आधिकारियों को शामिल किया गया है।

देश की बेटियों ने हर क्षेत्र में भारत का मान बढ़ाया है। अब जोखिम से जोखिम भरे क्षेत्र में महिलाएं परचम लहरा कर ये बता चुकी है कि 'कोमल हैं कमजोर नहीं शक्ति का नाम ही नारी है'। भारत की बेटियों ने शनिवार को एक और नया इतिहास दर्ज कर पूरे देश को गौरान्वित किया है।
दरअसल, भारतीय सेन ने आर्टिलरी रेजिमेंट में पहली बार पांच महिला ऑफीसर को शामिल किया है। शनिवार को महिला अधिकारियों के पहले बैच को भारतीय सेना की आर्टिलरी रेजिमेंट में कमीशन किया गया। ऑफीसर ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए), चेन्नई में सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूरा करने के बाद पांच महिला अधिकारी 29 अप्रैल को आर्टिलरी रेजिमेंट में शामिल किया गया है।
चुनौती से भरी परिस्थितयों से गुजरना होगा
बता दें इंडियन आर्मी का आर्टिलरी रेजिमेंट जहां इन पांच महिला अधिकारियों को पहली बाद एंट्री मिली है उन्हें पुरुष अधिकारियों के बराबर अवसर मिलेंगे और चुनौतियों को सामना करना होगा। इन महिला अधिकारियों को अर्टिलरी यूनिट में चुनौती से भरी परिस्थितयों से गुजरना होगा। अधिक जोखिम भरा कार्य है इसलिए अभी तक आर्मी की इस रेजिमेंंट में शामिल नहीं किया जाता था। लेकिन अब शामिल करके भारतीय सेना ने मिशाल कायम की है।
जानें कितना अहम होती है अर्टिलरी रेजिमेंट, क्या करती है काम?
याद रहे आर्टिलरी रेजीमेंट इंडियन आर्मी की सबसे बड़ी ब्रांच है। इस रेजिमेंट का काम जमीनी अभियानों जैसे युद्ध या परिस्तियों के समय पर सेना को मारक क्षमता देना है। ये यूनिट दो हिस्सों में है जिसमें एक में घातक हथियार जैसे कि मिसाइल, रॉकेट्स, मोर्टार, तोप, बंदूक आदि शामिल हैं और दूसरे हिस्से में ड्रोन, रडार, सर्विलांस सिस्टम होता है। यानी अब ये पांच महिला अधिकारी देश के दुश्मनों पर तोप के गोले बरसाने के लिए बिलकुल तैयार हैं।
देश को गौरान्वित किया
आर्मी की पासिंग आउट परेड के समापन में जब इन महिला अधिकारियों की कमीशनिंग की गई और इन्होंने देश की की रक्षा की शपथ लेने के बाद अपना रैंक प्रतीक चिन्ह लेते ही देश की हर शख्स को गौरान्वित कर दिया।
जानें कौन हैं वो देश की वो पांच बहादुर बेटियां
भारत की जिन पांच बेटियों को शनिवार को पहली बार आर्टिलरी यानी तोखाखाने की रेजिमेंट में शामिल हुई हैं, उनमें लेफ्टिनेंट महल सैनी को SATA रेजिमेंट में, लेफ्टिनेंट साक्षी दुबे और लेफ्टिनेंट अदिति यादव को फील्ड रेजिमेंट में, लेफ्टिनेंट पवित्र मुदगिल को एक मीडियम रेजिमेंट में और लेफ्टिनेंट आकांक्षा को रॉकेट रेजिमें में कमीशन किया गया है।
लेफ्टिनेंट अदिति यादव
लेफ्टिनेंट अदिति यादव ने कहा मेरे पिता भारतीय सेना में सेवारत हैं, और महिला उम्मीदवारों के लिए आर्टिलरी के उद्घाटन ने मुझे स्वाभाविक रूप से आकर्षित किया। मैं उन सभी महिलाओं को एक संदेश देना चाहूंगी जो भारतीय सेना में शामिल होना चाहती हैं, यह सबसे अच्छा विकल्प है, इसमें कोई संदेह नहीं है, बस ज्वाइन करें।
लेफ्टिनेंट साक्षी बूबे
लेफ्टिनेंट साक्षी बूबे ने कहा मेरे पिता ने बचपन से ही मुझे सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित किया। और तोपखाना महिला उम्मीदवारों के लिए एक अवसर के रूप में आया। वहां मौजूद सभी महिलाओं के लिए संदेश, सेना में शामिल होने से आपको खुद को तलाशने में मदद मिलेगी।
कारगिल युद्ध में अर्टिलरी रेजिमेंट ने दुश्मनों की नाक में मचा दिया दम
बता दें आर्मी के अर्टिलरी रेजिमेंट ने 1999 में भातर-पाकिस्तान के बीच हुए कारगिल युद्ध के दौरान 2,50,000 गोले और रॉकेट दाग कर दुश्मनों के छक्के छुड़ाए थे। कारिगिल युद्ध में 300 से अधिक तोपों, मोर्टार और रॉकेट लॉन्चरों ने हर दिन पांच हजार बम बरसाए थे। आर्टिलरी बैटरी हर मिनट फायर किया गया था।












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