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Women's Day: सूखे फूलों से महिलाओं के जीवन में रंग भरने वाली 'ड्राई फ्लोरल वूमेन' कौन हैं?

Women's Day: छत्तीसगढ़ को प्रकृति ने बेशुमार सौंदर्य से नवाजा है। एक तरफ खूबसूरत वॉटर फॉल, घने जंगल और पहाड़ियां हैं वहीं दूसरी ओर इस राज्य में खनिज पदार्थों की भरमार भी है। ये एक आदिवासी बहुल राज्य है और जहां की आदिवासी संस्कृति और कला का अपना महत्व है।

छत्तीसगढ़ के रायपुर की अनुराधा साहू सुखे फूल पत्तों से अनोखी कलाकृतियां बनाती है जिसे 'ड्राई फ्लोरल क्राफ्ट' कहते हैं। वे बड़ी खूबसूरती से प्रकृति की रचना को प्राकृतिक तरीके से सजाती हैं।

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उनकी कला सूखे फूल-पत्तों जैसे प्राकृतिक रूप से तैयार होती हैं और कई सुंदर कलाकृतियों को जन्म देती है। ये कलाकृति नारी मन की कोमलता और उसके शांत हृदय की रचना है

देश-विदेशों में कला को मिली पहचान

अनुराधा साहू पिछले 45 सालों से अपनी कला का प्रदर्शन कर रही हैं देश विदेशों में इसे मंच दे रही हैं। Oneindia hindi से बात करते हुए अनुराधा कहती हैं, "ये कला मेरे जीवन का धर्म है और इसे मंच देना मेरा कर्म है। जंगल में ऐसी कई चीजें हैं जिनका कोई मूल्य नहीं है लेकिन फिर भी उनका अस्तित्व है। ये फूल पत्ते और जंगली खरपतवार हर जगह पाए जाते हैं लेकिन इनकी असली पहचान एक कलाकर ही कर सकता है।"

अनुराधा साहू को ड्राई फ्लोरल पेंट के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल से 2005 में राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। ये भारत की पहली ऐसी महिला हैं जिन्हें 5 देशों से क्राफ्ट में पेंटेड मिला है। इस पर वो कहती हैं, "मैं बहुत भाग्यशाली हूं कि मुझे अपनी कला के प्रदर्शन लिए बहुत सारे मंच मिले हैं। मैंने सिंगापुर,जर्मनी, जापान, संयुक्त राष्ट्र अमेरिका जैसे कई देशों में प्रदर्शनी लगाई है। मेरे लिए ये सौभाग्य की बात है कि मुझे इन 5 देशों में क्रॉफट का पेंटेड मिला है।"

महिलाओं को कर रही प्रशिक्षित

अनुराधा साहू 'Auro Arts' नाम से एक संस्था चलाती हैं जहां वो स्थानीय महिलाओं को ड्राई फ्लोरल पेंट की ट्रेनिंग देती हैं। अपनी संस्था के बारे मे अनुराधा कहती हैं, "Auro Arts प्रकृति की रचना का सम्मान करने का सही तरीका है। हम उन महिलाओं को हुनर सिखा रहे हैं जिनको इसकी सही पहचान है। हम इन महिलाओं के आंतरिक हुनर को सूखे फूल पत्तों से एक नाजुक डिजाइन में बदल देते हैं। ये महिलाएं अधिक पढ़ी लिखी नहीं है लेकिन इनके भीतर एक ऐसी क्षमता है जिससे वो अपने हुनर,परिवार और समुदाय को साथ ले कर चलती हैं।"

महिलाओं के प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग के सवाल पर अनुराधा कहती हैं, "हमें सरकार की तरफ से पूरा सहयोग मिलता है। छत्तीसगढ़ मिनिस्ट्री ऑफ टैक्सटाइल की ओर से इनके प्रशिक्षण के लिए फंड मिलता है। IIM रायपुर और NIT रायपुर जैसे इंस्टिट्यूड ड्राई फ्लोरल क्रॉफ्ट में महिलाओं और लड़कियों के प्रशिक्षण के लिए तीन महीने का कोर्स भी चलाता है जहां इन्हें तकनीकि ट्रेनिंग दी जाती है।"

अनुराधा का मानना है कि प्रकृति से जुड़े रहने का इससे आसान और सही तरीका कोई नहीं है। वो कहती हैं, सूखे फूलों से दबाकर उभरी कला महज क्राफ्ट नहीं बल्कि जीवन के वास्तविकता है। यह नेचर का स्पेशल पॉवर है जो सेल्फ मोटिवेशन और सेल्फ पॉवर को जीवित रखता है।

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