Women Reservation Bill: कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने महिला आरक्षण बिल पेश किया, गिनाई खास बातें
Women Reservation Bill: लोकसभा में 19 सितंबर 2029 (गुरुवार) को 128वां संविधान संशोधन विधेयक पेश किया गया। कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने लोकसभा में ऐतिहासिक 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) पेश किया है। इसका लक्ष्य लोकसभा व राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33% सीटें आरक्षित करना है।
केंद्रीय कानून मंत्री मेघवाल ने लोकसभा में महिला आरक्षण बिल पेश करने के साथ इसकी प्रमुख बातें सदन में रखी।

महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम) की प्रमुख बातें
महिला आरक्षण बिल कब होगा लागू?
केंद्रीय कानून मंत्री ने बताया यह कानून जनगणना और परिसीमन के बाद लागू होगा, जिससे सदन में महिला प्रतिनिधियों की संख्या में बड़ी वृद्धि की अपेक्षा है।
लोकसभा और राज्य सभा में महिलाओं के लिए कितनी बढ़ जाएंगी सीटें?
मंत्री ने बताया महिला आरक्षण अधिनियम के तहत, लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को एक-तिहाई (33%) सीटें मिलेंगी। वर्तमान लोकसभा की 543 में से लगभग 181 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी।
33 फीसदी महिला आरक्षण कब तक रहेगा प्रभावी?
यह आरक्षण 15 वर्षों तक प्रभावी रहेगा और इसकी समीक्षा की जा सकती है। आरक्षित सीटों को हर परिसीमन के बाद बदला जाएगा।
क्या 2029 के लोकसभा चुनाव से पहले होगा लागू?
कानून मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यह बिल परिसीमन प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही लागू होगा। नतीजतन, यह 2029 के लोकसभा चुनावों से पहले प्रभावी नहीं हो पाएगा। संभावना है कि यह 2029 के आम चुनावों या उससे पहले के कुछ राज्य विधानसभा चुनावों में लागू हो।
कानून मंत्री बोले- 40 साल की तपस्या का परिणाम है
केंद्रीय मंत्री ने इस विधेयक को "ऐतिहासिक लम्हा" बताया, जो "लगभग 40 वर्षों की तपस्या का परिणाम" है। उन्होंने डॉ. बीआर अंबेडकर के विचारों का हवाला देते हुए महिला प्रतिनिधित्व के लिए इस विधेयक के लंबे इतिहास और संवैधानिक महत्व है।
हालांकि कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने इस बिल के सैद्धांतिक समर्थन के बावजूद, इसके लागू होने के समय और प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं।














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