क्या कैकेयी हठ एक दिन खत्म कर देगा कांग्रेस को?
नई दिल्ली, 28 अप्रैल। कांग्रेस को सिर्फ गांधी परिवार ही चला सकता है। पहले ये बात चापलूसी में कही गयी। अब जिद बन गयी है। कांग्रेस भले रसातल में चली जाए लेकिन कमान गांधी परिवार ही संभालेगा। यह कैकेयी हठ एक दिन कांग्रेस को खत्म कर देगा। पिछले महीने पांच राज्यों के चुनाव में कांग्रेस का सफाया हो गया तो क्या हुआ ? पिछले दो लोकसभा चुनाव में कांग्रेस हार गयी तो क्या हुआ ?

पिछले दस साल में कांग्रेस नब्बे फीसदी चुनाव हार गयी तो क्या हुआ ? अध्यक्ष तो सोनिया या राहुल ही रहेंगे। अब गांधी परिवार ही कांग्रेस की किस्मत है। किस्मत जैसी भी है, वही मंजूर। कांग्रेस कोई नया प्रयोग नहीं करना चाहती। ऐसे में उसे कौन बचाएगा ? कोई बचा पाएगा भी या नहीं ?

प्रशांत की ऊंची उड़ान ही बन गयी रास्ते का रोड़ा
पार्टी की बेहतरी के लिए जिसने भी गांधी परिवार को पद छोड़ने की सलाह दी, उसको दरकिनार कर दिया गया। गुलाम नबी आजाद, आनंद शर्मा सरीखे नेताओं का हस्र देखने के बाद भी प्रशांत किशोर ने गैर गांधी नेता को कांग्रेस अध्यक्ष बनाने का सुझाव दिया था। न ऐसा कभी होना था। न हुआ। प्रशांत किशोर को ही बेआबरू होकर कांग्रेस के कूचे से निकलना पड़ा। राजनीति के 'महापंडित' प्रशांत किशोर की दूसरी बार बेइज्जती हुई। उन्होंने ये बात कैसे सोच ली कि उनकी सलाह पर सोनिया गांधी अंतरिम अध्यक्ष का पद छोड़ देंगी ? उन्होंने ये कैसे सोच लिया कि उन्हें कांग्रेस में नम्बर दो की हैसियत मिल जाएगी ? ऊंची उड़ान ही उनके रास्ते का रोड़ा बन गयी। कांग्रेस भी भला प्रशांत पर कैसे भरोसा कर सकती थी। पिछले साल जब उनकी कांग्रेस से डील टूट गयी थी तब उन्होंने सोनिया- राहुल के खिलाफ क्या क्या नहीं कहा था। ग्रैंड ओल्ड पार्टी कह कर कांग्रेस का भी मजाक था उड़ाया था। इतनी आग उगलने के बाद प्रशांत किशोर दूसरी बार कांग्रेस के गलियारे में चक्कर काट रहे थे। बात भरोसे की थी। दोनों एक दूसरे की कसौटी पर खरे नहीं उतरे।

गांधी परिवार क्यों जमा है अध्यक्ष पद पर ?
सोनिया गांधी या राहुल गांधी हमेशा अपने भविष्य को लेकर फिकारमंद रहते हैं। उन्हें प्रतीत होता है कि वे राजनीति में तभी सुरक्षित और प्रासंगिक रहेंगे जब कांग्रेस का अध्यक्ष पद उनके पास रहेगा। सत्ता रहे या न रहे, कांग्रेस का सुरक्षा कवच उन्हें बचाए रखेगा। यह तभी होगा जब वे पार्टी के सर्वशक्तिमान नेता बने रहें। कोई उन्हें सलाह दे यह बिल्कुल मंजूर नहीं। वे पार्टी का भला तो चाहते हैं लेकिन उसका श्रेय किसी और को नहीं देना चाहते। अगर कांग्रेस मजबूत हो गयी और उसका श्रेय किसी और को मिल गया तो सोनिया-राहुल की क्या पूछ रह जाएगी ? अगर प्रशांत किशोर के फारमूले से कांग्रेस का कायाकल्प हो जाता तो वे पार्टी में एक नया शक्ति केन्द्र बन जाता। आगे चल कर वे सोनिया-राहुल के लिए चुनौती भी बनते। कांग्रेस की परम्परा में यह स्वीकार नहीं थी। इसलिए कांग्रेस, प्रशांत किशोर को खास तरजीह देने से मुकर गयी। प्रशांत किशोर चाहते थे कि वे अपने दायित्व के लिए सिर्फ सोनिया गांधी के प्रति जवाबदेह हों। ये बात राहुल गांधी को भी पसंद नहीं थी। कहा जाता है कि इसी वजह से वे प्रशांत किशोर के साथ बैठक में सिर्फ एक बार शामिल हुए थे। गांधी परिवार को किसी दूसरे पर भरोसा नहीं। नरसिम्हा राव और सीताराम केसरी जब कांग्रेस अध्यक्ष बने थे तब सोनिया समर्थकों ने उनके साथ अपमानजनक व्यवहार किया था। ऐसे में वे भला प्रशांत किशोर को कैसे असीमित अधिकार दे सकते थे।

कैसे बचेगी कांग्रेस ?
डील टूटने के बाद प्रशांत किशोर ने तंज कसा है कि कांग्रेस को मेरी नहीं बल्कि अच्छे लीडरशिप की जरूरत है। जाते जाते भी उन्होंने सोनिया गांधी पर एक वार कर दिया। जब प्रशांत किशोर ने नेतृत्व बदलने की शर्त रखी थी तब उन्होंने विकल्प के रूप में एक नाम प्रियंका गांधी का भी सुझाया था। उनका कहना था कि कांग्रेस अध्यक्ष और प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार दो अलग अलग लोगों को बनाया जाना चाहिए। लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस बात से सहमत नहीं थे। वे राहुल गांधी को ही अध्यक्ष और पीएम इन वेटिंग बनाये जाने के पक्ष में थे। तो क्या कांग्रेस अभी भी राहुल गांधी के भरोसे ही चुनावी वैतरणी पार करना चाहती है ? राहुल गांधी ने पंजाब में जो फैसला लिया उसका नतीजा क्या हुआ ? अमरिंदर सिंह और सिद्धू के विवाद ने पंजाब में कांग्रेस का बेड़ा गर्क कर दिया। एक और राज्य की सत्ता कांग्रेस के हाथ से फिसल गयी। राहुल गांधी रन बना नहीं रहे और उनके समर्थक कह रहे हैं कि कप्तान वही रहेंगे ? भला ये कैसी जिद है ? एक परिवार की भलाई के लिए क्या कांग्रेस अपना वजूद खत्म कर लेगी ?
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