क्या बच्चों के लिए सितंबर तक आ जाएगी देसी वैक्सीन, तीसरी लहर की आशंका के बीच कैसे जगी उम्मीद ? जानिए

हैदराबाद, 24 मई: कोरोना की संभावित तीसरी लहर में बच्चों पर मंडरा रहे खतरे के मद्दनेजर लोगों में एक अनजाने डर की भावना बनी हुई है तो सरकारें भी अपने स्तर पर तैयारियां कर रही हैं। इस बीच दुनियाभर के कई वैज्ञानिक बच्चों को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करने का भरोसा भी दिला चुके हैं, क्योंकि अबतक उनमें ज्यादातर हल्के लक्षण वाले या एसिम्पटोमेटिक ही दिखाई पड़े हैं। आंकड़े बताते हैं कि कुल मामलों में अस्पतालों में दाखिल कराने के केस 4 फीसदी से भी कम ही देखा जा रहा है। लेकिन, दूसरी लहर में उत्तराखंड और राजस्थान में कोरोना ने बच्चों को भी काफी संख्या में संक्रमित किया है, इसलिए तीसरी लहर को लेकर चिंता पूरी तरह से गैर-वाजिब भी नहीं है। ऐसे में एक बड़ी उम्मीद ये दिखाई दे रही है कि देश को सितंबर तक बच्चों की वैक्सीन मिल सकती है और वह भी स्वदेशी।

महाराष्ट्र में बच्चों को फ्लू का टीका

महाराष्ट्र में बच्चों को फ्लू का टीका

बच्चों को कोविड की संभावित तीसरी लहर से बचाने के लिए महाराष्ट्र पहले से ही कदम उठा रहा है। इसकी वजह ये है कि वह कोविड से सबसे ज्यादा प्रभावित रहा है और दूसरी लहर ने भी वहीं से तबाही मचानी शुरू की है। महाराष्ट्र कोविड टास्कफोर्स और नई गठित की गई पीडियाट्रिक टास्कफोर्स ने राज्य सरकार से संयुक्त रूप से अपील की है कि प्रदेश में मानसून दस्तक दे, उससे पहले ही सभी बच्चों को इंफ्लूएंजा का टीका लगा दिया जाए। गौरतलब है कि कुछ महीने पहले से डॉक्टर यह सलाह दे रहे हैं कि बच्चों की कोविड वैक्सीन आने से पहले अगर उन्हें फ्लू वाली वैक्सीन दे दी जाए तो उन्हें कोरोना वायरस के खिलाफ थोड़ी सुरक्षा तो जरूर मिलने की उम्मीद है। अब डॉक्टरों के एक्सपर्ट पैनल ने राज्य के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे से कहा है कि इंफ्लूएंजा वैक्सीन लगाने से बच्चों में इस बीमारी को नियंत्रित करने में भी मदद मिलेगी और अस्पतालों पर से बोझ कम होगा और बेवजह की टेस्टिंग की नौबत नहीं आएगी। महाराष्ट्र कोविड टास्कफोर्स के चेयरमैन डॉक्टर संजय ओक ने सीएम से कहा है, 'हमारी राय ये है कि इंफ्लूएंजा वैक्सीन की सलाह बढ़चढ़ कर दी जानी चाहिए। क्योंकि, यह महंगी है तो इसे मध्यम और उच्च वर्ग के लोग ही ले सकेंगे। राज्य स्तर पर हम इसकी कीमत घटाने की सोच सकते हैं या हम कम से कम अगले 6 महीने में सभी बच्चों को दे सकते हैं।'

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    बच्चों को कोविड से सुरक्षा के लिए यूपी ने शुरू की नई पहल

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    उत्तर प्रदेश सरकार ने तीसरी लहर की आशंका के मद्देनजर अपने वैक्सीनेशन प्रोग्राम में तब्दीली करने का ऐलान किया है। उसने बच्चों को कोरोना वायरस से सुरक्षित रखने के लिए 12 साल से कम उम्र के बच्चों के पेरेंट्स को टीका लगाने में प्राथमिकता देने का फैसला किया है, ताकि बच्चे और उनके माता-पिता दोनों इस अनदेखे वायरस से बचे रह सकें। इसके लिए सरकार ने हर जिले में अभिभावक स्पेशल बूथ बनाने की बात कही है और अभिभावकों को बुलाकर उनका टीकाकरण कराने का अभियान छेड़ने की तैयारी शुरू की है।

    तीसरी लहर के समय को लेकर अलग-अलग अनुमान है

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    कुछ हफ्ते पहले देश के नामी वायरोलॉजिस्ट डॉक्टर वी रवि ने बच्चों पर तीसरी लहर में पड़ने वाले असर को लेकर बहुत बड़ी आशंका जाहिर की थी। उन्होंने सरकार को चेताया था कि इसमें बच्चे बहुत बड़ी तादाद में प्रभावित हो सकते हैं, इसलिए सरकार को अभी से इसकी पुख्ता तैयारी शुरू कर देने चाहिए। उनका अनुमान है कि तीसरी लहर इस साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच आ सकती है, इसलिए बच्चे इसकी चपेट में न आ पाएं, इसलिए अभी से पूरा बंदोबस्त कर लिया जाना चाहिए। यही वजह है कि पूरे देश में पीडियाट्रिक वार्ड को लेकर विशेष तैयारियां चल रही हैं। वहीं गुजरात सरकार को अपने अनुभवों से लगता है कि तीसरी लहर मानसून के बाद किसी भी वक्त उठ सकती है। उसका अनुमान इस बात पर आधारित है कि वहां मानसून के साथ त्योहारों का मौसम भी शुरू हो जाता है और लोगों की भीड़ बढ़ने लगती है।

    सितंबर तक आ सकती है बच्चों की देसी वैक्सीन

    सितंबर तक आ सकती है बच्चों की देसी वैक्सीन

    इतनी आशंकाओं और अनुमानों के बीच देसी दवा कंपनी भारत बायोटेक ने उम्मीदों से भरपूर एक बहुत बड़ी खबर दी है। हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक इंटरनेशनल आने वाले 1 जून से 2 से 18 साल के बच्चों के लिए कोविड-19 वैक्सीन कोवैक्सीन की क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की योजना बना चुकी है। भारत बायोटेक में बिजनेस डेवलपमेंट एंड इंटरनेशनल एडवोकेसी की हेड रेचेज एला ने बताया है कि कंपनी उम्मीद कर रही है कि सितंबर तक ट्रायल पूरी हो जाएगी और पीडियाट्रिक कोवैक्सिन लॉन्च करने की मंजूरी मिल जाएगी।

    नेजल वैक्सीन से भी बच्चों को लेकर अच्छी उम्मीद

    नेजल वैक्सीन से भी बच्चों को लेकर अच्छी उम्मीद

    राहत की बात है कि कोवैक्सीन भारत में नेजल वैक्सीन भी डेवलप कर रही है, जिसे दोनों नाकों में दो-दो बूंद डालना ही काफी होगा और इंजेक्शन की जरूरत नहीं पड़ेगी। दो दिन पहले ही डब्ल्यूएचओ की चीफ साइंटिस्ट सौम्या स्वामिनाथन ने बच्चों के लिए भारत में विकसित हो रही नेजल वैक्सीन को गेमचेंजर साबित होने की आशा जताई है। उन्होनें एक न्यूज चैनल से कहा है कि, 'भारत में जो कुछ नेजल वैक्सीन बन रही हैं, वो बच्चों के लिए गेमचेंजर साबित हो सकती हैं।' गौरतलब है कि इस वैक्सीन को नाक में डालने से कोरोना वायरस के खिलाफ रेसपिरेटरी ट्रैक में लोकल इम्यूनिटी मिल जाने की उम्मीद है। वैसे उनका कहना है कि उन्हें नहीं लगता कि नेजल वैक्सीन इस साल आ पाएगी।

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