मणिपुर: क्या बीजेपी तोड़ पाएगी इबोबी का वर्चस्व
होबम रंजना और पुष्पा देवी- दोनों के मुद्दे अलग-अलग - दोनों अलग-अलग क्षेत्रों से हैं और दोनों के जातीय आधार भी अलग हैं। एक मैतेई हैं जिनकी तादाद मणिपुर में सबसे ज़्यादा है।
नई दिल्ली। शनिवार को 38 सीटों पर हुआ मतदान खत्म भी नहीं हुआ था, अलग-अलग दावे और जोड़-घटाव लगने शुरू हो गए थे। बुलेट मोटरसाइकिल पर बैठे होमश्वर शर्मा दावा करते हैं कि बीजेपी को कम से कम 40 सीटें हासिल होंगी। पास खड़ी औरत पंजा दिखाकर कहती हैं कि जीत तो उनकी पार्टी की ही होगी।
पक्की सड़क से नीचे उतरकर तेलीपट्टी मंदिर के पास जो पोलिंग बूथ था वहां मतदान ख़त्म हो जाने के बाद मर्द, औरत, बूढ़े, जवान सब जमा थे। औरतें रंगीन शोख लिबास में गप्पे मारतीं और ठहाके लगाती हुई तो पास खड़े सुरक्षाबल के नौजवान गाड़ियों और दीवारों से पीठ लगाकर थोड़ा सुस्ता रहे थे। मगर पास-पास खड़े लोगों के लिए वोट, वोटिंग और मुद्दे एक-दूसरे से दूर थे।
होबम रंजना और पुष्पा देवी- दोनों के मुद्दे अलग-अलग - दोनों अलग-अलग क्षेत्रों से हैं और दोनों के जातीय आधार भी अलग हैं। एक मैतेई हैं जिनकी तादाद मणिपुर में सबसे ज़्यादा है। वर्तमान मुख्यमंत्री इबोबी सिंह भी इसी समुदाय से हैं।दूसरी पुष्पा देवी खुद को तेली बताती हैं। होबम रंजना कहती हैं कि क्षेत्र के पुराने विधायक ने विकास का कोई काम नहीं किया है।
पुष्पा देवी के चारों तरफ और कई औरतें, मर्द और बच्चियां खड़े हो जाते हैं। वो कहने लगती हैं, "हम लोग यहां पुश्तों से रह रहे हैं, लेकिन हमें यहां कीड़ों की तरह समझा जाता है।" वो चाहती हैं कि जैसे पूरे मुल्क में बीजेपी ने कई जगहों पर सरकार बनाई है तो मणिपुर में भी वैसा ही हो।
सूबे में 2002 में राष्ट्रपति शासन के खत्म होने के बाद से कांग्रेस पार्टी सत्ता में मौजूद है इसलिए विकास का मुद्दा तो बड़ा है ही, बदलाव की बात भी कही जा रही है। कई पोलिंग बूथ पर जब मैंने बात की तो लोगों ने चेंज की बात कही। कांग्रेस की इबोबी सिंह सरकार के सात नए ज़िले बनाने के फ़ैसले को भी भाजपा ने मुद्दा बनाने की कोशिश की, लेकिन उससे पार्टी के लिए ख़ुद ही मुसीबत खड़ी हो गई है।
नगा समूह यूनाइटेड नगा कांउसिल ने नवंबर से ही नगा इलाकों से गुज़रने वाली सड़कों पर नाकेबंदी कर रखी है जिसका असर आम लोगों और अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। कांग्रेस कह रही है कि ये नाकेबंदी मोदी सरकार और नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल आफ नगालैंड (आई-एम) की सांठ-गांठ से हो रही है। मोदी सरकार ने एनएससीएन (आई-एम) के साथ शांति समझौता किया था।
बीजेपी ने चुनावी घोषणा पत्र की जगह जो विज़न डोक्यूमेंट निकाला है उसमें मणिपुर से किसी भी क्षेत्र को अलग न करने का वादा सबसे पहला है। एनएससीएन ग्रेटर नगालैंड बनाने के लिए दूसरे राज्यों के कई इलाक़ों पर दावा करती रही है। पार्टी इस मामले पर बैकफुट पर दिख रही है।
हाल के एक चुनावी घोषणाक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को कहना पड़ा कि राज्य की अखंडता पर कोई ख़तरा नहीं आएगा। सूबाई इकाई के बीजेपी अध्यक्ष के भाबनंद सिंह कहते हैं, "जब प्रधानमंत्री ने ख़ुद कहा है तो लोगों को तो भरोसा होना चाहिए।"
मणिपुर में बाक़ी बची सीटों पर आठ मार्च को मतदान होगा। तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके इबोबी सिंह थौबाल से मैदान में हैं। उनके खिलाफ़ इरोम हैं जिनकी नई पार्टी राजनीति के पुराने खिलाड़ी के लिए कोई ख़तरा नहीं बताई जा रही। लेकिन शायद ये बात इबोबी सिंह सरकार के लिए फिलहाल कहना जल्दी होगी।












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