जन गण मन...जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में अब राष्ट्रगान अनिवार्य, क्यों लिया गया ये फैसला?
Jammu Kashmir Schools(National Anthem): जम्मू-कश्मीर के हर स्कूलों में सुबह की असेंबली में राष्ट्रगान को शामिल करना अनिवार्य कर दिया गया है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने केंद्र शासित प्रदेश के सभी स्कूलों को निर्देश दिया है कि सुबह की सभाओं के दौरान शिक्षकों और छात्रों को राष्ट्रगान गाना अब अनिवार्य है।
देश के एकमात्र मुस्लिम बहुल क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार के इस फैसले से घाटी में 'राष्ट्रवाद' का मुद्दा बहस का विषय बन गया है। घाटी में राष्ट्रगान अतीत में अक्सर विवाद का मुद्दा रहा है।

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जम्मू-कश्मीर स्कूल शिक्षा विभाग ने निर्देश में क्या कहा?
- स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक कुमार द्वारा बुधवार (12 जून) को एक परिपत्र में जम्मू-कश्मीर के स्कूलों में सुबह की सभाओं के संचालन के लिए नए दिशा-निर्देशों की एक सूची जारी की गई थी।
- नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक, सुबह की सभा यानी मार्निंग असेंबली की अवधि 20 मिनट से अधिक नहीं होनी चाहिए। मानक प्रोटोकॉल के अनुसार सुबह की सभा राष्ट्रगान के साथ शुरू होनी चाहिए।''
- निर्देश में यह भी कहा गया है कि इसके बाद छात्रों और शिक्षकों द्वारा 'महान व्यक्तित्वों/स्वतंत्रता सेनानियों'' पर एक चर्चा की जाएगी।
- निर्देश में इसके तहत आने वाले स्कूलों से आग्रह किया गया है कि वे सुबह की सभा में छात्रों की शैक्षणिक, एथलेटिक या अन्य उपलब्धियों के बारे में घोषणा करने के अलावा 'सप्ताह या महीने के लिए थीम भी पेश करें और फिर उसपर चर्चा करें।
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जम्मू-कश्मीर स्कूलों में राष्ट्रगान क्यों किया गया अनिवार्य?
- जम्मू-कश्मीर स्कूलों में राष्ट्रगान को अनिवार्य करने के पीछे सरकार का सबसे बड़ा मकसद ये है कि छात्र ''अपनी राष्ट्रीय पहचान पर गर्व महसूस करें।''
- परिपत्र में कहा गया है कि सुबह की सभाएं छात्रों में 'नैतिक अखंडता और मानसिक शांति को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती है। लेकिन जम्मू और कश्मीर के स्कूलों में ऐसी कई अहम बातें यानी समान रूप से नहीं निभाई जा रही है।''
- परिपत्र में कहा गया है कि स्कूलों को सुबह की सभाओं में प्रेरक भाषण भी शामिल किया जाएगा ताकि छात्रों को प्रेरित किया जा सके और दिन के लिए सकारात्मक माहौल बनाया जा सके। इससे छात्रों में ईमानदारी, सम्मान, जिम्मेदारी, कर्तव्य, नागरिकता और संवैधानिक मूल्यों को बढ़ावा मिलेगा। इससे छात्रों के चरित्र में भी विकास होगा।
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