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Jammu-Kashmir Assembly Chunav: जम्मू-कश्मीर में कब होंगे विधानसभा चुनाव, जानें CEC राजीव कुमार ने क्‍या कहा?

Jammu-Kashmir Assembly Election: चार जून को आने वाले लोकसभा चुनाव 2024 के नतीजों पर सभी राजनीत‍िक दलों की न‍िगाहें बनी हुई हैं। एग्‍ज‍िट पोल पहले से ही बीजेपी को एक बार फि‍र सत्‍ता पर काब‍िज होने का अनुमान लगा चुका है। इस बीच, अब जम्मू-कश्मीर में विधानसभा चुनाव को लेकर स‍ियासी पारा परवान चढ़ने लगा है।

चुनाव आयोग ने सोमवार को केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में व‍िधानसभा चुनाव कब होंगे, इसको लेकर बड़ा ऐलान कि‍या है। मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) राजीव कुमार ने कहा कि चुनाव आयोग बहुत जल्द केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया शुरू करेगा। कुमार ने लोकसभा चुनावों की मतगणना से पहले ब्रीफिंग में कहा क‍ि हम बहुत जल्द जम्मू और कश्मीर में चुनाव प्रक्रिया शुरू करेंगे, हम मतदाताओं के मतदान से बहुत उत्साहित हैं।

Jammu-Kashmir Assembly Chunav 2024

चुनाव पैनल प्रमुख ने कहा क‍ि जम्मू और कश्मीर में चार दशकों में सबसे अधिक 58.58 प्रतिशत और घाटी में 51.05 प्रतिशत मतदान हुआ। जम्मू और कश्मीर संसद के निचले सदन में जम्मू, उधमपुर, श्रीनगर, बारामूला और अनंतनाग-राजौरी से पांच सांसद भेजता है। जम्मू-कश्मीर ने 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पहला चुनाव देखा, जिसने तत्कालीन राज्य का विशेष दर्जा समाप्त कर दिया और इसे केंद्र शासित प्रदेश बना दिया।

क्‍यों एक साथ नहीं हुए लोकसभा और विधानसभा चुनाव?
सीईसी से जब पूछा गया कि जम्मू-कश्मीर में एक साथ लोकसभा और विधानसभा चुनाव क्यों नहीं कराए जा रहे हैं, तो कुमार ने कहा था, "जम्मू-कश्मीर में सभी दलों ने कहा कि विधानसभा चुनाव संसदीय चुनावों के साथ होने चाहिए, लेकिन पूरी प्रशासनिक मशीनरी ने कहा कि यह एक साथ नहीं हो सकता। हर विधानसभा क्षेत्र में 10-12 उम्मीदवार होंगे, जिसका मतलब है कि 1,000 से ज्‍यादा उम्मीदवार होंगे। हर उम्मीदवार को सुरक्षा बल मुहैया कराना होगा। यह इस समय संभव नहीं था। पिछले दिसंबर में सुप्रीम कोर्ट ने अनुच्छेद 370 को हटाने को संवैधानिक रूप से वैध ठहराया था, जबकि चुनाव आयोग को 30 सितंबर, 2024 तक केंद्र शासित प्रदेश में चुनाव कराने का निर्देश दिया था।

एक नजर में जम्मू-कश्मीर विधानसभा का इतिहास?

  • जम्मू-कश्मीर विधानसभा की स्थापना 1951 में हुई थी।
  • जम्मू-कश्मीर राज्य का खुद का संविधान था, जो 1957 में लागू हुआ। यह संविधान अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा देता था।
  • 2019 में, भारत सरकार ने अनुच्छेद 370 को हटाकर जम्मू-कश्मीर को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित कर दिया। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख।
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