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जानिए सिंधु से गोपीचंद ने क्यों कहा था-' अकेले कमरे में चिल्लाया करो वरना...'

नई दिल्ली, 02 अगस्त। आज चारों ओर सिर्फ एक ही नाम गूंज रहा है और वो है भारत की शटलर क्वीन पीवी सिंधु का, टोक्यो ओलंपिक में कांस्य पदक जीतने वाली देश की इस बेटी की सफलता पर पूरे देश को अभिमान है। जिस वक्त रविवार को जीत के बाद पोडियम पर खड़े होकर सिंधु ने अपना मेडल गले में डाला, उस वक्त 136 करोड़ की आबादी वाले भारत देश के हर नागरिक की आखें खुशी से छलछला उठीं। सिंधु ने रविवार को जिस तरह से खेल खेला, वो अपने आप में अनुपम है, उसे शब्दों में बयां कर पाना काफी मुश्किल है।

हार से नहीं हारीं बल्कि सफलता का रचा इतिहास

हार से नहीं हारीं बल्कि सफलता का रचा इतिहास

एक दिन पहले ही तगड़ा मैच हारने वाली पीवी सिंधु को कल देखकर एक बार भी नहीं लगा कि वो किसी दुख या दवाब में हैं। शनिवार का दिन भले ही उनका नहीं था लेकिन रविवार को उन्होंने अपने खेल से ये साबित कर दिया कि कोशिश करने वालों की कभी भी हार नहीं होती है। सिंधु की लगन, समर्पण और मेहनत ने ही उन्हें वहां पहुंचाया है, जहां वो आज हैं।

देश के लिए दो बार जीता पदक

देश के लिए दो बार जीता पदक

आपको बता दें कि टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल के लिए खेले गए मुकाबले में पीवी ने चीन की ही बिंग जियाओ को सीधे गेम में 21-13, 21-15 से मात दी। इस जीत के साथ ही सिंधु भारत की पहली महिला खिलाड़ी बन गई हैं, जिन्होंने लगातार दो ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीता है। इससे पहले वो रियो ओलंपिक में रजत पदक अपने नाम कर चुकी हैं।

आठ साल की उम्र में पकड़ा था रैकेट

आठ साल की उम्र में पकड़ा था रैकेट

मात्र आठ साल की उम्र में रैकेट पकड़ने वाली पीवी सिंधु का जन्म 5 जुलाई 1995 में हैदराबाद के एक सामान्य परिवार में हुआ था लेकिन घर का माहौल असाधारण था। उनके पिता पीवी रमन्ना और मां पी विजया नेशनल दोनों वॉलीबॉल के राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रह चुके हैं, ऐसे में घर में एक स्पोर्टसमैन वाला सकारात्मक माहौल हमेशा से उन्हें मिला, जिसने उन्हें परिपक्क होने में मदद की। आपको बता दें कि सिंधु के पिता को अर्जुन अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।

'कमरे में घंटों चिल्लाया करो सिंधु'

'कमरे में घंटों चिल्लाया करो सिंधु'

इसमें कोई शक नहीं है कि सिंधु की इस सफलता के पीछे उनकी दिन-रात की कड़ी मेहनत और उनके पहले कोच पुलेला गोपीचंद का मार्गदर्शन रहा है। उनके करीबी बताते हैं कि सिंधु नेचर से काफी शांत हैं इसलिए गोपीचंद ने उनसे कहा था कि 'अगर आगे बढ़ना है तो एग्रेसिव बनो, अकेले कमरे में घंटों चिल्लाया करो, वो भी अपनी पूरी ताकत के साथ क्योंकि अगर आक्रामक नहीं बनोगी तो आगे बढ़ने का सपना भूल जाओ।' मालूम हो कि रियो ओलंपिक में रजत पदक जीतने के बाद सिंधु ने इस बात का खुलासा खुद एक इंटरव्यू में किया था।

चॉकलेट, बिरयानी और जूस से तौबा

चॉकलेट, बिरयानी और जूस से तौबा

उन्हें फिट रखने के लिए गोपीचंद ने उन्हें जो डाईट प्लान दिया था वो अभी अपने आप में काफी हार्ड था। जब सिंधु गोपीचंद की अकेडमी में खेला करती थीं तो गोपीचंद ने उनके चॉकलेट,हैदराबादी बिरयानी और बाहर के जूस पर पाबंदी लगा रखी थी। यहां तक कि वो उन्हें बाहर का पानी भी नहीं पीने देते थे। उन्हें मीठा खाने से भी रोका गया था। गोपीचंद का कहना था कि सिंधु बहुत इमोशनल है इसलिए उन्होंने खेल से पहले सिंधु के इंटरव्यू वगैरह पर पाबंदी लगा रखी थी।

कोरियाई कोच पार्क ताए-सैंग

बता दें कि सिंधु को सुपरस्‍टार बनाने पुलेला गोपीचंद उनके पहले कोच थे। इसके बाद सिंधु के दूसरे कोच थे इंडोनेशिया के मुलयो हंडोयो। जबकि सिंधु की तीसरी कोच साउथ कोरिया के किम जी ह्यूं थीं, लेकिन अभी मौजूदा दौर में सिंधु के कोच कोरियाई पार्क ताए-सैंग हैं।

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