दिल्ली के अपने महरौली फार्म हाउस में क्यों नहीं रहते राहुल गांधी ?
सांसदी रद्द होने के बाद राहुल गांधी कहां रहेंगे ? अभी तो वे अपनी मां सोनिया गांधी के साथ 10, जनपथ में रहते हैं। लेकिन चर्चा है कि वे शीला दीक्षित के घर में किरायेदार बन कर रहने वाले हैं। राहुल गांधी के पास महरौली में एक शानदार फार्म हाउस है जो उनकी दादी इंदिरा गांधी ने उन्हें वसीयत में दिया है। वे फिलहाल फार्म हाउस में क्यों नहीं रहते ? उन्होंने शीला दीक्षित का किरायेदार बनना क्यों पसंद किया ? राहुल गांधी की वजह से शीला दीक्षित के पुत्र संदीप दीक्षित को अपना घर खाली कर अपनी मौसी के घर जाना पड़ा।
हार के बाद इंदिरा गांधी फार्म हाउस में रहना चाहती थीं
1977 में जब इंदिरा गांधी चुनाव हार गयीं तो उन्हें भी सरकारी बंगला खाली करना पड़ा था। तब उन्होंने महरौली फार्म हाउस में रहने की सोची थी। लेकिन उस समय ये फार्म हाउस बन ही रहा था। तब उनके सहयोगी मोहम्मद युनूस ने अपना बंगला इंदिरा गांधी को रहने के लिए दे दिया था। 2018 में ये बात सामने आयी थी कि राहुल गांधी ने महरौली फार्म हाउस को 6 लाख 70 हजार रुपये महीना पर किराया लगा दिया था। जो व्यक्ति किरायेदार था उस पर आर्थिक गड़बड़ी के आरोप लगे थे। जब इंदिरा गांधी यहां रहने के लिए सोच सकती हैं तो राहुल गांधी यहां क्यों नहीं रह सकते ?

क्या राहुल गांधी हमेशा सच के लिए लड़ते हैं ?
राहुल गांधी की संसदी रद्द होने पर जब उन्हें सरकारी बंगला (12,तुगलक लेन) खाली करना पड़ा था तब उन्होंने कहा था, सच बोलने की कीमत चुकायी। राहुल गांधी को मोदी सरनेम मामले में कोर्ट ने दोषी ठहराया था। लेकिन उन्होंने इस बात को राजनीति से जोड़ दिया। क्या वे हमेशा सच के लिए आवाज उठाते हैं ? जिस भाजपा सरकार सरकार के राहुल गांधी कट्टर विरोधी हैं क्या उनके परिवार ने उससे कोई फायदा नहीं उठाया है ? उनकी बहन प्रियंका गांधी ने फिर क्यों वाजपेयी सरकार से सरकारी बंगले का किराया कम कराया था ?
प्रियंका ने वाजपेयी सरकार से लगायी थी गुहार
1997 में जनता दल के नेतृत्व में संयुक्त मोर्चा की सरकार थी। कांग्रेस ने इसे बाहर से समर्थन दिया था। एचडी देवगौड़ा प्रधानमंत्री थे। तत्कालीन केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों से प्रियंका गांधी को लुटियंस जोन में एक आलिशान सरकारी बंगला आवंटित किया था। उन्हें एसपीजी सुरक्षा के तहत ये बंगला दिया गया था। वे न तो सांसद थीं और न ही मंत्री, लेकिन उन्हें सरकारी बंगला आवंटित किया गया था। इस बंगले का किराया 54 हजार 421 रुपये प्रतिमाह था। 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार बनी। तब 2002 में प्रियंका गांधी ने वाजपेयी सरकार से गुहार लगायी कि 54 हजार 421 प्रतिमाह का किराया बहुत है और इतनी रकम देना उनकी क्षमता से बाहर है। इसलिए इसका किराया कम कर दिया जाय।
दरख्वास्त के बाद प्रियंका का किराया बहुत कम
बाजपेयी सरकार ने प्रियंका गांधी के दरख्वास्त पर स्पेशल लाइसेंस फी में संशोधन किया और किराया 8 हजार 888 रुपये कर दिया। बाद में प्रियंका गांधी को इस मामले में सफाई देनी पड़ी थी। जिसके पिता, दादी और नाना भारत के प्रधानमंत्री रहे हों वह सरकारी किराया देने के लिए मोल-तोल कर सकता है ? इतने बड़े परिवार का व्यक्ति आलिशान बंगले में रहे और किराया देने के समय कह दे कि अमुक रकम देने की तो उसकी हैसियत ही नहीं है, यह कहां तक उचित है ? एक तरफ गांधी परिवार भाजपा सरकार का विरोध करता है तो दूसरी करने फायदे के लिए उससे गुहार भी लगाता है।
आरके धवन के परिवार पर कब्जा का आरोप
गांधी परिवार और उनके सहयोगियों के लिए बंगला विवाद कोई नया नहीं है। पंजाब और उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल सर सीपीएन सिन्हा की बेटी जयश्री सिंह ने 2018 में आरोप लगाया था कि इंदिरा गांधी के निजी सचिव रहे आरके धवन की पत्नी उनका पैतृक मकान हड़पना चाहती हैं इसको लेकर मुकदमा भी हुआ था। 1977 में जब इंदिरा गांधी सत्ता से बेदखल हो गयीं तो अचानक बहुत कुछ बदल गया। आर के धवन इंदिरा गांधी के निजी सचिव थे। चुनाव हार जाने के बाद जब इंदिरा गांधी के अपने आवास पर संकट छा गया था तो वे अपने निजी सचिव को भला कैसे साथ रखतीं। बिहार के कांग्रेस नेता और शिक्षाविद सर सीपीएन सिन्हा प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू के घनिष्ठ मित्र थे। नेहरू जी ने उन्हें राजदूत और राज्यपाल बनाया था।
पूर्व राज्यपाल की बेटी ने लगाया था आरोप
सर सीपीएन सिन्हा, इंदिरा गांधी के लिए भी घर के सदस्य जैसे थे। सर सीपीएन सिन्हा बिहार के छपरा (सारण) जिले के जमींदार भी थे। उनके कई शहरों में मकान थे। दिल्ली के गोल्फ लिंक्स में भी उनका एक दोमंजिला मकान था। 1977 में हार के बाद इंदिरा गांधी ने सर सीपीएन सिन्हा को कहा कि वे आर के धवन को अपने घर में रख लें। इसके बाद धवन अपने परिवार के साथ इस घर के ग्राउंड फ्लोर पर रहने के लिए आ गये। सर सीपीएन सिन्हा ने आरके धवन से कोई किराया नहीं लिया। सर सीपीएन सिन्हा के निधन बाद भी उनकी बेटी जयश्री सिंह ने भी यह व्यवस्था चलने दी। लेकिन जब 2018 में आरके धवन के निधन हो गया तो उन्होंने अपने घर को खाली करने के लिए नोटिस दी थी।












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