बीसीसीआई को नई चयन समिति की ज़रूरत क्यों पड़ी?

बीसीसीआई रोजर बिन्नी
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बीसीसीआई रोजर बिन्नी

बीते 19 अक्टूबर को मुंबई के होटल ताज पैलेस में भारतीय क्रिकेट बोर्ड की सालाना बैठक समाप्त हुई. भारत के पूर्व ऑलराउंडर रोजर बिन्नी, सौरव गांगुली की जगह बीसीसीआई के अध्यक्ष बने.

इस बैठक के अंत में भारतीय टीम की चयन समिति को विस्तार देने पर संक्षिप्त चर्चा हुई लेकिन इस मामले में कोई भी फ़ैसला वर्ल्ड टी-20 के समाप्त होने तक टाल दिया गया.

बैठक में शामिल लोगों में इस बात पर सहमति थी कि टी -20 वर्ल्ड कप के नतीजे के बाद इस पर चर्चा होनी चाहिए. इससे चयन समिति के सदस्यों को ये तो अंदाज़ा हो गया था कि वो तलवार की धार पर हैं.

10 नवंबर को टी-20 वर्ल्ड कप में जब इंग्लैंड ने भारत को दस विकेट से रौंद दिया था, तब शायद चयन समिति में पूरी तरह बदलाव की बात हुई होगी. वैसे टीम के लिए दक्षिण अफ्रीका के ख़िलाफ़ मुक़ाबले में ही मुश्किलें शुरू हो गई थीं.

भारतीय बल्लेबाज़ 20 ओवरों में नौ विकेट पर महज़ 133 रन बना सके थे. मैच का नतीजा भले अंतिम ओवर में निकला हो लेकिन भारतीय गेंदबाज़ दक्षिण अफ्रीकी टीम को रोक नहीं सके थे.

भारत अपने पहले मैच में पाकिस्तान को भी इसलिए हरा पाया था क्योंकि पाकिस्तानी टीम अंतिम पलों का दबाव सह नहीं सकी थी.

टी-20 वर्ल्ड कप में भारत के बाहर होने से उत्तर क्षेत्र के चेतन शर्मा, मध्य क्षेत्र के हरविंदर सिंह, दक्षिण क्षेत्र के सुनील जोशी और पूर्व क्षेत्र के देबाशीष मोहंती की आशंका सच साबित हुई और 18 नवंबर को भारतीय क्रिकेट बोर्ड ने पात्रता पूरी करने वाले पूर्व खिलाड़ियों से कोच के पद के लिए पर आवेदन मांग लिया.

सौरव गांगुली
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सौरव गांगुली

28 तक कर सकेंगे आवेदन

बीसीसीआई की मेल से इसका पता नहीं चलता है कि बीसीसीआई की मौजूदा चयन समिति का क्या स्थिति है? क्या उन्हें बर्ख़ास्त कर दिया गया है या फिर वे अभी भी अपने पद पर बने हुए हैं?

बीसीसीआई के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक बीसीसीआई ने चयन समिति को बर्ख़ास्त नहीं किया है, हालांकि 18 नवंबर को चयन समिति के विज्ञापन आने के बाद ज़्यादातर मीडिया प्रकाशनों में उनके बर्ख़ास्त किए जाने की रिपोर्ट छपी हैं.

उच्च पदस्थ सूत्र ने स्थिति के बारे में एक्सप्लेन करते हुए बताया है, "मौजूदा चयनकर्ता भी फिर से आवेदन कर सकते हैं, अगर उन्होंने चयनकर्ता के तौर पर चार साल पूरे नहीं किए हों तब."

दूसरे शब्दों में कहें, तो चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति के सभी चयनकर्ता फिर से आवेदन कर सकते हैं, क्योंकि इन्हें 2020 या 2021 में नियुक्त किया गया है. लेकिन इसके बाद इन सबको क्रिकेट एडवाइजरी कमेटी (सीएसी) के सामने इंटरव्यू की प्रक्रिया से गुजरना होगा.

इस चयन समिति में केवल पश्चिमी क्षेत्र के चयनकर्ता अभय कुरुविल्ला ने अपना कार्यकाल पूरा किया था और उनकी जगह किसी को नहीं दी गई थी.

हालांकि मौजूदा चयनकर्ता इस पद के लिए फिर से आवेदन करते हैं या नहीं करते हैं, इसका पता आवेदन जमा करने की अंतिम तारीख यानी 28 नवंबर को ही पता चल पाएगा.

दरअसल, यह कोई रहस्य की बात नहीं है कि भारत के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ चेतन शर्मा को 2020 में चयन समिति का प्रमुख बनाए जाने की एक वजह उनकी भारतीय जनता पार्टी से करीबी भी थी.

चेतन शर्मा क्यों चुने गए?

मुख्य चयनकर्ता से बनाए जाने से पहले वे बीजेपी से स्पोर्ट्स सेल के संयोजक थे और फरीदाबाद से बीजेपी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके थे.

इससे पहले 2009 में वे बहुजन समाज पार्टी के टिकट पर 2009 में फरीदाबाद लोकसभा सीट से अपनी किस्मत आजमा चुके थे. चुनाव में तीसरे स्थान पर रहते हुए चेतन शर्मा ने एक लाख 14 हज़ार वोट हासिल किए थे.

उसी साल वो बहुजन समाज पार्टी से इस्तीफ़ा देते हुए बीजेपी में शामिल हो गए थे.

इससे पहले उनकी पहचान ऐसे गेंदबाज़ के तौर पर थी जिनकी ओवर की आख़िरी गेंद पर शारजाह में 1986 में खेले गए एशिया कप फ़ाइनल में जावेद मियांदाद ने छक्का लगाकर अपनी टीम को जीत दिलाई थी.

तब ये कयास लगाए गए थे कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के बेटे जय शाह और सौरव गांगुली के नेतृत्व वाली बीसीसीआई के निर्देशों को मानने में चेतन शर्मा को कोई मुश्किल नहीं होगी और उन्हें पद पर बने रहने में कोई मुश्किल नहीं होगी.

बीसीसीआई के अंदर किसी को भी अंदाज़ा नहीं था कि चेतन शर्मा को सबसे बड़ा विरोध टीम के मुख्य कोच राहुल द्रविड़ की ओर से झेलना होगा.

दरअसल चयन समिति को अपनी पसंद की टीम को लेकर राहुल द्रविड़ और टीम प्रबंधन को भरोसे में लेने में बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा था.

ऐसे कई मौकों पर ये साफ़ ज़ाहिर भी हुआ, जैसे कि राहुल द्रविड़ के नेतृत्व में टीम प्रबंधन ने ऋषभ पंत की जगह दिनेश कार्तिक को खिलाने का फ़ैसला लिया.

महज 23 साल की उम्र में इंग्लैंड और ऑस्ट्रेलिया की मुश्किलों पिचों पर अपने दम पर टीम को मैच जीताने वाले पंत की उपेक्षा कर टीम प्रबंधन ने दिनेश कार्तिक के अनुभव पर भरोसा किया.

टीम प्रबंधन पंत की फिटनेस को लेकर संतुष्ट नहीं थी और ऐसे में दिनेश कार्तिक के खेलने का रास्ता साफ़ हुआ. वहीं इसी तरह यजुवेंद्र चाहल की जगह रविचंद्रन अश्विन की वापसी हो गई.

चाहल की कमी टीम को तब महसूस हुई जब इंग्लैंड की सलामी जोड़ी जोस बटलर और एलेक्स हेल्स ने बिना विकेट खोए 169 रनों का टारगेट पूरा करके दिखाया. टीम का कोई गेंदबाज़ इस जोड़ी पर असर नहीं डाल सका.

टीम प्रबंधन ने चाहल को पूरे टूर्नामेंट में प्लेइंग इलेवन से बाहर रखा. यह स्थिति तब थी जब चाहल बीते दो सीज़न से लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रहे थे और अश्विन को टेस्ट में तरजीह मिलती थी. इंग्लैंड के ख़िलाफ़ टीम इंडिया की हार के पीछे कई विश्लेषकों ने माना कि टीम इंडिया को चाहल की कमी खली.

इंडियन टीम
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इंडियन टीम

नयी चयन समिति की ज़रूरत क्यों हुई?

दरअसल पिछले कुछ महीनों से, चयन समिति अपने फै़सलों की वजह से लगातार सवालों के घेरे में है. ये भी कहा जा रहा है कि चयन समिति की ओर से सही टीम नहीं चुनने की वजह से ही भारत लगातार दो टी-20 वर्ल्डकप में बेहतर नहीं कर सका.

चेतन शर्मा की अगुवाई वाली चयन समिति पर आरोप है कि भारतीय टीम के साथ काफी प्रयोग किए जा रहे हैं. इस प्रयोग का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि वर्क लोड के नाम पर एक साल में आठ भारतीय को कप्तानी की ज़िम्मेदारी मिल चुकी है.

हालांकि इसका एक दूसरा पहलू यह है कि यह भी कहा जा रहा है कि चयन समिति के पास निर्णायक क्षमता नहीं है या फिर वह अपनी क्षमता का पूरा इस्तेमाल नहीं कर रही है.

आठ महीने के अंतराल पर टी 20 वर्ल्ड कप के लिए केएल राहुल की टीम में वापसी पर सोशल मीडिया तक में मजाक़ देखने को मिला था.

इतना ही नहीं, यह आरोप भी लगा कि दोनों टी-20 वर्ल्ड कप के लिए टीम चुनने वक्त ना तो घरेलू क्रिकेट और ना ही आईपीएल मैचों के प्रदर्शन को ही ध्यान में रखा गया. इसके चलते ही दोनों टी-20 वर्ल्ड कप में भारत का प्रदर्शन उम्मीद से कहीं कमतर रहा था.

यह भी अनुमान लगाया जा रहा है कि बीसीसीआई टी-20 क्रिकेट के लिए नया कप्तान और कोच रख सकती है. ऐसी स्थिति में राहुल द्रविड़ के पास वनडे और टेस्ट टीम की ज़िम्मेदारी रहेगी.

टी-20 कोच के तौर पर जिन खिलाड़ियों को लेकर कयास लगाए जा रहे हैं, उनमें महेंद्र सिंह धोनी भी शामिल हैं, लेकिन बीसीसीआई की गाइडलाइंस के मुताबिक रिटायरमेंट के कम से कम पांच साल बाद ही खिलाड़ी ऐसे किसी पद के लिए दावेदार हो सकते हैं, धोनी अभी इस शर्त को पूरा नहीं करते हैं.

बहरहाल, देखना ये होगा कि बीसीसीआई बदलावों की शुरुआत चयन समिति के माध्यम से किस तरह करती है.

अगर मौजूदा चयन समिति के सदस्यों ने आवेदन कर दिया तो क्या होगा? उन्हें दोबारा मौका मिलेगा या फिर नयी चयन समिति कार्यभार संभालेगी, स्थिति जल्दी ही स्पष्ट हो जाएगी.

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