Tamil Nadu Assembly National Anthem Raw: कौन हैं राज्यपाल RN Ravi? स्टालिन सरकार से क्यों छिड़ी आर-पार की जंग
Tamil Nadu Assembly National Anthem Row: तमिलनाडु में राज्यपाल आर.एन. रवि और मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन की सरकार के बीच का टकराव अब एक ऐतिहासिक और गंभीर मोड़ ले चुका है। राज्यपाल आर.एन. रवि ने विधानसभा में साल के पहले दिन दिए जाने वाले पारंपरिक 'अभिभाषण' को पढ़ने से इनकार कर दिया और सदन से वॉकआउट कर गए।
यह लगातार दूसरा साल है जब राज्यपाल और सरकार के बीच राष्ट्रगान और भाषण को लेकर इतना तीखा सार्वजनिक टकराव देखा गया है।

20 जनवरी 2026 को विधानसभा सत्र के पहले दिन राज्यपाल का वॉकआउट करना महज एक प्रोटोकॉल का उल्लंघन नहीं, बल्कि राजभवन और निर्वाचित सरकार के बीच गहरी होती खाई का प्रतीक है। विस्तार से जानिए कौन हैं तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन. रवि? क्यों मचा है घमासान...
Who is RN Ravi Governor: कौन हैं राज्यपाल आर.एन. रवि?
आर.एन. रवि केवल एक राज्यपाल नहीं हैं, बल्कि उनका करियर भारत की आंतरिक सुरक्षा और कूटनीति से गहराई से जुड़ा रहा है। इनका जन्म बिहार के पटना में हुआ। 1974 में इन्होंने फिजिक्स (Physics) में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद वो 1976 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) में शामिल हुए। उन्होंने CBI और इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB) जैसी संस्थाओं में दशकों तक काम किया।
राज्यपाल रवि ने जम्मू-कश्मीर, पूर्वोत्तर और नक्सल प्रभावित इलाकों में उग्रवाद विरोधी अभियानों का नेतृत्व किया। वे आतंकवाद विरोधी अभियानों और 'काउंटर-टेररिज्म' के वैश्विक रणनीतिकार माने जाते हैं। नागा शांति समझौता में उनका महत्तवपूर्ण योगदान रहा था। दरअसल, 2014 में उन्हें केंद्र सरकार ने 'नागा शांति वार्ता' के लिए वार्ताकार (Interlocutor) नियुक्त किया। उनके प्रयासों से दशकों पुराने अलगाववादी आंदोलन को मुख्यधारा में लाने में बड़ी सफलता मिली।
इसके बाद वे 'डिप्टी नेशनल सिक्योरिटी एडवाइजर' (Deputy NSA) रहे और 2019 में नागालैंड के राज्यपाल बने। 18 सितंबर 2021 को उन्होंने तमिलनाडु के 26वें राज्यपाल के रूप में शपथ ली।
Tamil Nadu Assembly Controversy: तमिलनाडु विधानसभा में क्या हुआ?
सत्र की शुरुआत होते ही विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने राज्यपाल से अनुरोध किया कि वे केवल सरकार द्वारा अनुमोदित 'प्रथागत संबोधन' ही पढ़ें। इस पर राज्यपाल ने आपत्ति जताई। राज्यपाल का तर्क था कि सदन की शुरुआत में 'राष्ट्रगान' (National Anthem) नहीं बजाया गया, जो संवैधानिक मर्यादा का अपमान है।
राज्यपाल रवि ने सदन के बीच से ही कहा, "यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि मेरे भाषण में हस्तक्षेप किया गया। राष्ट्रगान को उचित सम्मान नहीं दिया गया और मेरा माइक बार-बार बंद किया जा रहा है।" इसके बाद वे बिना अपना भाषण पूरा किए सदन से बाहर निकल गए।
राजभवन का आरोप: राजभवन ने बाद में एक बयान जारी कर सरकार पर गंभीर आरोप लगाए। बयान में कहा गया कि सरकार के भाषण में 'भ्रामक दावे' और 'तथ्यहीन बातें' थीं। तमिलनाडु में दलितों के खिलाफ बढ़ती हिंसा जैसे मुद्दों को सरकार ने भाषण से गायब कर दिया। निवेश के आंकड़ों (12 लाख करोड़ रुपये) को झूठा करार देते हुए कहा गया कि हकीकत में तमिलनाडु अब विदेशी निवेश (FDI) के मामले में चौथे से खिसक कर छठे स्थान पर आ गया है।
National Anthem vs Tamil Thai Vaazhthu विवाद की असली वजह क्या है?
राजभवन बनाम द्रविड़ राजनीति के इस बड़े विवाद की जड़ तमिलनाडु की वो परंपरा रही है जिसमें विधानसभा सत्र की शुरुआत राज्य गीत 'तमिल थाई वाजथु' से होती है और अंत राष्ट्रगान से। राज्यपाल रवि इस परंपरा को बदलना चाहते हैं। उनका कहना है कि संविधान के अनुसार राष्ट्रगान शुरुआत और अंत दोनों समय होना चाहिए।
इसके अलावा, सरकार के भाषण में 'द्रविड़ मॉडल' और पेरियार जैसे नेताओं के जिक्र पर भी राज्यपाल अक्सर आपत्ति जताते रहे हैं। मुख्यमंत्री एम.के. स्टालिन ने राज्यपाल के इस व्यवहार को 'बचकाना' करार दिया है।
संवैधानिक संकट की ओर बढ़ रहा तमिलनाडु?
राज्यपाल और सरकार का यह टकराव अब केवल प्रोटोकॉल तक सीमित नहीं है। यह 'राज्य की स्वायत्तता' बनाम 'केंद्र के प्रतिनिधि' की लड़ाई बन चुका है। विधानसभा अध्यक्ष ने स्पष्ट कहा कि "सदन के भीतर केवल विधायकों की राय मायने रखती है," जबकि राज्यपाल का कहना है कि "वे गलत को पढ़ने के लिए बाध्य नहीं हैं।"
अगला कदम क्या होगा? क्या राज्य सरकार इस मुद्दे पर राष्ट्रपति से हस्तक्षेप की मांग करेगी? या राज्यपाल केंद्र को अपनी रिपोर्ट भेजकर तमिलनाडु में संवैधानिक तंत्र की विफलता का दावा करेंगे? आने वाले दिन तमिलनाडु की राजनीति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होने वाले हैं।
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