'बिना डरे अपना फैसला सुनाना चाहिए', जानें कौन हैं यह बयान देने वाले सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल?
Supreme Court Justice SK Kaul Profile: सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश न्यायमूर्ति संजय किशन कौल 25 दिसंबर को रिटायर हो रहे हैं। इससे पहले वो अपने 'बिना डरे अपना फैसला सुनाना चाहिए' वाला बयान देकर सुर्खियों में हैं। ऐसे में जानिए सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल कौन हैं?
सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एसके कौल ने शुक्रवार को अपने कोर्ट के अंतिम कार्य दिवस पर कहा कि लोगों को एक दूसरे की राय के प्रति सहनशीलता रखनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि एक न्यायाधीश का निडर होना एक बहुत अहम कारक है। बार का कर्तव्य है कि वह न्यायपालिक की स्वतंत्रता की रक्षा कर सके।

कौन हैं जस्टिस एसके कौल?
संजय किशन कौल सीजेआई डीवाई चंद्रचूड़ के बाद सुप्रीम कोर्ट के सबसे सीनियर जज हैं। जस्टिस कौल ने सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश के रूप में 6 साल और 10 महीने के ज्यादा के वक्त तक अपनी सेवाएं दी हैं।जस्टिस
SK कौल का न्यायिक सफर
- 41 साल की उम्र में वरिष्ठ वकील के रूप में नोमिनेट होने वाले सबसे कम उम्र के वकीलों में से एक जस्टिस एसके कौल
- साल 2001 में दिल्ली हाई कोर्ट में न्यायाधीश के रूप में प्रमोट किया गया।
- साल 2013 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के रूप में नियुक्ति किया गया
- साल 2014 में मद्रास हाई कोर्ट में चीफ जस्टिस के तौर पर नियुक्त हुए।
- साल 2017 में सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस के रूप में नियुक्ति हुए।
श्रीनगर में जन्मे जस्टिस कौल
जम्मू कश्मीर के श्रीनगर में 26 दिसंबर 1958 को जस्टिस संजय किशन कौल का जन्म हुआ था। जस्टिस एसके कश्मीरी हिंदू ब्राह्मण दत्तात्रेय कौल परिवार से हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके परदादा सर दया किशन कौल ने महाराजा सूरज किशन कौल जम्मू-कश्मीर रियासत की रीजेंसी काउंसिल में राजस्व मंत्री थे। इसके अलावा वो राजनेता भी थे। वहीं उनके दादा राजा उपिंदर किशन कौल ने भी सार्वजनिक सेवा में रहे हैं।
जस्टिस एसके कौल के जीवन पर एक नजर
जस्टिएस एसके कौल ने साल 1982 में लॉ की बैचलर डिग्री हासिल की थी। कश्मीर में जन्मे एसके कौल ने अपनी ज्यादातर पढ़ाई दिल्ली में करकी है। उन्होंने दिल्ली के सेंट स्टीफंस कॉलेज से इकॉनमिक्स (ऑनर्स) में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद 1982 में दिल्ली यूनिवर्सिटी से लॉ की बैचलर डिग्री ली। इसी साल वो दिल्ली बार काउंसिल में बतौर वकील रजिस्टर हो गए थे।
2001 में बने दिल्ली हाईकोर्ट में जज
जस्टिस कौल ने एक एडवोकेट के तौर पर दिल्ली हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस की। इसके बाद उनको 1987 में सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड बना दिया गया। वहीं दिसंबर 1999 में उन्हें सीनियर एडवोकेट का पद मिला। एसके कौल दिल्ली हाई कोर्ट और दिल्ली यूनिवर्सिटी के सीनियर काउंसिल भी रह चुके हैं। वहीं केंद्र सरकार के सीनियर पैनल में भी शामिल रहे। तीन मई 2001 को उनको दिल्ली हाईकोर्ट में एडिशनल जज के तौर पर नियुक्त किया गया, फिर सितंबर 2012 में उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस नियुक्त किया गया।
इसके बाद उनको जून 2013 में पंजाब-हरियाणा हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया। फिर इसके बाद 26 जुलाई 2014 को मद्रास हाई कोर्ट का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किया गया, जहां से उन्हें प्रमोट करते हुए 17 फरवरी 2017 को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया।
जस्टिस एसके कौल के अहम न्यायिक फैसले
- साल 2010 में आर्म्ड फोर्सेज में महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन देने का फैसला किया।
- इसके बाद साल 2017 में निजता के अधिकार को मौलिक अधिकार के रूप में पुष्टि की थी।
- फिर 2018 में पदोन्नति में आरक्षण के संबंध में फैसला। सरकारी सेवाओं में SC/ST के लिए 'क्रीमी लेयर' की शुरुआत की।
- साल 2019 केंद्र सरकार की तरफ से राफेल लड़ाकू विमान की खरीद की कोर्ट की निगरानी में जांच का आदेश नहीं देने का फैसला
- इसके बाद 2021 में NDA में ट्रेनिंग के लिए लड़कियों को शामिल करने की अनुमति दी।
- हाल ही में साल 2023 में सीजेआई की अगुवाई वाली बेंच में समलैंगिक विवाह को कानूनी मान्यता देने से इनकार।
- हाल ही में 11 दिसंबर को जम्मू-कश्मीर के आर्टिकल 370 हटाने में पक्ष में फैसला दिया।












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